पुलिस की गोली से चार मरे, पांच पटना रेफर, कई का अभी तक पता नहीं, प्रशासन का फायरिंग से इंकार

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  • विशद कुमार 

बिहार में आज पहले चरण के 16 जिलों की 71 सीटों पर मतदान है। 71 सीटों पर पहले चरण के चुनाव में 2 करोड़ 14 लाख 84 हजार 787 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। उम्मीदवारों में आठ मंत्री सहित 952 पुरुष व 114 महिला प्रत्याशी शामिल हैं। पहले चरण में जिन आठ मंत्रियों की प्रतिष्ठा दाव पर है, इनमें कृषि मंत्री प्रेम कुमार, शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेश कुमार, विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री जयकुमार सिंह, भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री राम नारायण मंडल, श्रम मंत्री विजय कुमार सिन्हा, खनन मंत्री बृजकिशोर बिंद, परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला शामिल हैं।

पहले चरण के इन 71 सीटों में मुंगेर भी एक है, जहां पिछली 26 अक्टूबर की रात को जिला पुलिस द्वारा मूर्ति विसर्जन को लेकर की गई फायरिंग में चार लोगों ने घटना स्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि कई लोग बुरी तरह घायल हो गये। जिनमें से काफी गंभीर स्थिति के पांच लोगों को पटना रेफर किया गया है। कुछ लोग जो घटना बाद लापता हैं, वे अभी तक घर नहीं लौटे हैं, जिनको लेकर लोगों को संदेह है कि वे पुलिस की गोली के शिकार हो चुके हैं, जिसे पुलिस ने ही उन्हें गायब कर दिया है।

घटना के बारे में बताया जाता है कि 26 अक्टूबर की रात को मुंगेर के दीनदयाल चौक से जब मूर्ति विसर्जन के लिए लोग गुजर रहे थे, तभी पुलिस ने आकर उन्हें आगे बढ़ने से रोका, जिसको लेकर पुलिस व मूर्ति विसर्जन में शामिल लोगों में झड़प हो गई। पुलिस ने पहले लाठी चार्ज की, जब लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हुए तब पुलिस द्वारा फायरिंग शुरू हो गई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। गंभीर  रूप से घायल पांच लोगों को पटना रेफर किया गया। पुलिस टीम का नेतृत्व मुंगेर जिला की एसपी लिपि सिंह कर रही थीं, जो जदयू के वरिष्ठ नेता आर पी सिंह की पूत्री हैं, जो नीतीश कुमार के सबसे ज्यादा करीबी माने जाते हैं। नीतीश कुमार ने उन्हें एक बार राज्यसभा भी भेजा था। इस घटना पर पुलिस फायरिंग से मुंगेर रेंज के डीआईजी मनु महाराज ने साफ इंकार किया है। वे कहते हैं कि प्रशासन ने मूर्ति विसर्जन की तारीख 25 अक्टूबर को निधारित की थी, लेकिन 26 को प्रतिमा विसर्जन किया जाने लगा गया, पुलिस ने इसे रोका तो असामाजिक तत्वों द्वारा गोलीबारी की गई, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई।

इस घटना में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि तीन लोगों की मौत को पुलिस प्रशासन क्यों छुपा रहा है? वहीं असामाजिक तत्वों द्वारा गोलीबारी करने के पीछे का मकसद क्या है? कहीं ऐसा तो नहीं कि इस घटना को सांप्रादायिक रंग देने की प्रशासनिक कोशिश थी? अगर ऐसी मंशा थी तो प्रशासन की मंशा को मुंगेर की जनता ने फेल कर दिया है। अब यह मामला जनता बनाम जिला प्रशासन का हो गया है। भले ही आज के चुनाव के मद्देनजर लोग चुप्पी मारे हुए हैं, मगर प्रशासन के खिलाफ यहां के लोगों में भीतर ही भीतर आक्रोश पनपता जा रहा है। खबर के मुताबिक चुनाव के बाद लोगों ने प्रशासन के खिलाफ दो दो हाथ करने का मन बना लिया है।

 बता दें कि चुनावी मैदान में मुंगेर विधानसभा से एनडीए उम्मीदवार भाजपा के प्रणव यादव हैं, वहीं राजद से अविनाश कुमार हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार हुई थी। इस बार भी जीत की उम्मीद कम दिख रही थी।

बता दें कि मुंगेर में विधानसभा चुनाव के पहले चरण का चुनाव के कारण 26 अक्टूबर को चुनाव प्रचार बंद हो गया था। ऐसे में विधि व्यवस्था बिगड़ने की कोई संभावना भी नहीं थी, जो प्रशासन की मंशा को स्पष्ट कर रहा है।

इस घटना पर प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन के अंजनी बताते हैं कि मुंगेर जिला की एसपी लिपि सिंह के नेतृत्व में विसर्जन के समय निर्दोष युवा व बच्चों पर गोलियां चलाई गईं हैं, जिसमें चार लोगों की घटना स्थल पर ही मौत हो गयी और पांच लोग पटना रेफर हैं। कुछ युवा घटना के बाद अभी तक घर नहीं लौटे हैं।

एसपी लिपि सिंह जदयू पार्टी के वरिष्ठ नेता आर पी सिंह की पुत्री हैं, जो नीतीश कुमार के सबसे ज्यादा करीबी हैं। इसलिए मैडम सत्ता के नशे में इतनी चूर हैं कि मासूम युवाओं पर भी गोली चलवाने से परहेज नहीं किया।

बता दें कि घटना के बाद से ही लिपि सिंह मुंगेर जिला से गायब हैं।

इस घटना के बाद लोगों के बीच भय का माहौल है। पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है।

वहीं प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ने लोगों से उक्त पुलिसिया जुल्म के खिलाफ एकजुट होकर प्रतिरोध करने और एसपी को बर्खास्त करने की मांग को लेकर आन्दोलन करने की अपील की है। अंजनी बताते हैं कि घटना के बाद हरेक जगह पुलिस प्रशासन को भर दिया गया है, क्योंकि जो आक्रोश आम लोगों में उभर रहा है, उस आक्रोश को रोकने के लिए फिर से बंदूक का भय जारी है।

वहीं ऑर्गनाइजेशन के मानस कहते हैं कि जब इस व्यवस्था में पुलिस प्रशासन ही आम आदमी का भक्षक बन जाए तो आप किससे उम्मीद कर सकते हैं।

भाजपा-जदयू इस तरह बौखला गए हैं कि उनके पुलिस प्रशासन अब खुलेआम यूपी की तरह बिहार में भी भय का ट्रेलर पैदा करना चाह रहे हैं।

ऑर्गनाइजेशन की मांग है कि इन मासूम युवाओं की हत्यारी एसपी लिपि सिंह व गोली चलाने वाले पुलिस कर्मीयों की अविलंब गिरफ्तारी हो।

अगर इन नरसंहार करने वाले पुलिस हत्यारों का अविलंब गिरफ्तारी नहीं होती है तो आप समझ लें कि ये व्यवस्था खोखली हो चुकी है और पूरे देश में गोलियों के भय पर भाजपा अपनी सत्ता चलाना चाहती है।

क्षेत्र के युवाओं, बुद्विजीवियों, मजदूर-किसानों से हम अपील करते हैं कि अपने बच्चों को न्याय दिलाने के लिए अपनी आवाज को बुलंद करें।

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