केशव शरण की कविता ज्योति

3
152

केशव शरण

ज्योति
____

बारह सौ किलोमीटर
सायकिल चलाकर आयी है
हरियाणा से दरभंगा
अपने बाप को बिठाकर लायी है
पंद्रह साल की लड़की
ज्योति
वो रही टीवी पर
क्या कमाल की लड़की !

अब वह जायेगी दिल्ली
सरकार के बुलावे पर
सायकिलिंग सीखने
ओलम्पिक के लिए
दृढ़ निश्चयी, साहसी, पराक्रमी
भाग्यवान

सबसे बड़ी ख़ुशी
यह कि
वह ज़िंदा रही
देखने को जहान
मारता
और हारता

जय हो उसकी
और वह जिए
शान से
सही फ़ैसले लेने वाले
श्रमिक को सम्मान देने वाले
नये हिंदुस्तान में !

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here