पंजाब के 5 जनसंगठनों ने की लॉकडाउन खत्म करने की माँग

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16 मई 2020, चंडीगढ़। पंजाब के पाँच जनसंगठनों कारखाना मज़दूर यूनियन, टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन, नौजवान भारत सभा, पेंडू मज़दूर यूनियन (मशाल) व पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन (ललकार) ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी करके केंद्र व राज्य सरकारों से घोर गरीब विरोधी, जनविरोधी, गैरजनवादी व दमनकारी लॉकडाउन जारी ना रखने व इसकी जगह कोरोना संकट के हल के लिए युद्धस्तर पर पुख्त कदम उठाने की माँग की है। जनसंगठनों की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए राजविंदर, सुखदेव सिंह भूँदड़ी व छिंदरपाल ने कहा है कि लॉकडाउन से कोरोना संकट का हल करने के सरकार के दावे पूरी तरह झूठ साबित हुए हैं बल्कि सरकार की इस दमनकारी, गैर-वैज्ञानिक, गैरजरूरी व मुजरमाना कार्रवाई ने मेहनतकश जनता की मुसीबतों में भारी वृद्धि की है। इसके चलते गरीबी बदहाली के गढ्ढे में और अधिक धँसी जनता पर कोरोना समेत अन्य तमाम शारीरिक व मानसिक बीमारियों की मार का खतरा भी कई गुणा अधिक बढ़ गया है। एक तरफ़ कोरोना मरीजों की ही देखभाल व इलाज के नामात्र प्रबंध हैं और दूसरी तरफ़ अन्य सभी बीमारियों संबंधी स्वस्थ्य सेवाएँ ठप्प पड़ी हैं। सैंकड़ों लोग लॉकडाउन के चलते पैदा हुए भयानक हालातों के कारण मारे गए हैं। लाखों गरीब, भुखमरी के मारे, बीमार, स्त्रियाँ, बच्चें, बजुर्ग पैदल व साइकलों पर हजारों कि.मी. का सफर तय करने के लिए मज़बूर हैं। लोग आत्महत्याएँ करने के लिए मज़बूर हो गए हैं। संगठनों की माँग है कि बजुर्गों, शारीरिक तौर पर बेहद कमज़ोर व बीमारों जिन्हें कोरोना वायरस संक्रमण से काफी नुकसान हो सकता है, को इस लाग से बचाने के लिए अलग रख कर देखभाल करने, कोरोना मरीजों के निःशुल्क इलाज व देखभाल, बड़े स्तर पर टेस्टों, लोगों की रोग प्रतिरोधक ताकत बढ़ाने के लिए पोष्टिक भोजन की पूर्ति व अन्य तमाम पुख्ता कदम उठाएँ जाएँ। इस सब का खर्च सरकार द्वारा उठाया जाए। इसके लिए पूँजीपति वर्ग महांमारी टेक्स लगाया जाए व तुरंत वसूली की जाए। संगठनों ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र का सरकारीकरण व प्रसार करने, सभी कच्चे स्वस्थ्य कर्मी पक्का करने की भी माँग उठाई है।

संगठनों ने यह भी माँग उठाई है कि सरकारी-गैरसरकारी मज़दूरों-मुलाजिमों को लॉकडाउन समय का पूरा वेतन दिया जाए, सरकार की लॉकडाउन की नाजायज कार्रवाई के चलते सभी मेहनतकशों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिया जाए। हज़ारों कि.मी. के सफ़र के लिए पैदल व साइकलों पर निकले प्रवासी मज़दूरों को बसों-रेलगाड़ियों से उनके घर पहुँचाने के तुरंत कदम उठाए जाएँ। जनता के कहीं भी आने पर लगाई गई तमाम पाबंदियाँ तुरंत हटाई जाएँ।

जननेताओं का कहना है कि लॉकडाउन से कोरोना संकट न सिर्फ हल होने की बजाए और बिगड़ा है बल्कि इसका इसका इस्तेमाल सरकारों ने मेहनतकश जनता पर राजनीतिक-आर्थिक-समाजिक हमले तेज़ करने के लिए की है जो बेहद घिनौनी फासीवादी कार्रवाई है। कोरोना संकट को बहाना बनाकर व लॉकडाउन का फायदा उठाकर लागू किए गए काले कानून, आठ घंटे की जगह बारह घंटे कार्यदिवस लागू करने व यूनियन बनाने के अधिकार खत्म करने जैसे श्रम अधिकारों के हनन के देसी-विदेशी पूँजीपतियों के हित में उठाए कदमों, पूँजीपतियों को कर्ज माफी, जनवादी कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों की ज़ुबानबंदी व दमन, नागरिकता अधिकारों पर हमलों के खिलाफ़ संघर्ष को दबाने व अन्य तमाम घोर जनविरोधी कदम वापिस लेने की भी जनसंगठनों ने माँग उठाई है। संगठनों ने सभी जनवादी व न्यायप्रिय संगठनों व लोगों से लॉकडाउन जारी रखने की योजना के खिलाफ़ आवाज़ बुलंद करने का आह्वान किया है।
मुक्तिमार्ग

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