लाल झंडे के सैलाब से पटा पटना का फ्रेजर रोड: तीनों कृषि कानून के खिलाफ मानव शृंखला ने रचा इतिहास

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विशद कुमार
आज 30 जनवरी तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ महात्मा गांधी के शहादत दिवस पर आज महागठबंधन के आह्वान पर आहूत मानव शृंखला में खेतिहर मजदूरों-गरीब किसानों-बटाईदार किसानों, महिलाओं, बुद्धिजीवियो ने अपनी जोरदार ताकत दिखलाई। बिहार के शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक 12.30 बजे से लेकर 1 बजे तक मानव शृंखला आयोजित की गई। पटना में 12 बजे से ही बुद्धा स्मृति पार्क से लाइन लगनी शुरू हो गई, जो डाकबंगला होते हुए रेडियो स्टेशन की ओर बढ़ता गया। पूरा फ्रेजर रोड कृषि विरोधी नारों की तख्तियों व लाल झंडे के सैलाब से जैसे उमड़ पड़ा था। महागठबंधन के दलों भाकपा-माले, राजद, सीपीआई, सीपीआईएम, कांग्रेस के अलावा मजदूर-किसान-छात्र-महिला संगठनों ने भी आज के कार्यक्रम में अपनी भागीदारी निभाई। वहीं, माले के विधायकों ने अपने-अपने इलाकों में मोर्चा संभाला।
बुद्धा स्मृति पार्क के पास माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य के साथ-साथ राजद नेता व नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, सीपीआईएम के अवधेश कुमार, सीपीआई के रामबाबू कुमार व कांग्रेस के राज्यस्तरीय नेताओं के साथ-साथ अखिल भारतीय किसान महासभा, ऐक्टू, खेग्रामस, आइसा, आरवाईए आदि संगठनों के भी कार्यकर्ता मानव शृंखला में शामिल हुए। माले राज्य सचिव कुणाल, धीरेन्द्र झा, अमर, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बिहार-झारखंड प्रभारी राजाराम सिंह, अखिल भारतीय किसान महासभा के वरिष्ठ नेता केडी यादव, शिवसागर शर्मा, राजेन्द्र पटेल, ऐपवा की मीना तिवारी, शशि यादव, सरोज चैबे, ऐक्टू के आरएन ठाकुर, रणविजय कुमार, आरवाईए के सुधीर कुमार, विनय कुमार, आइसा के विकास यादव, दानिश, प्रियंका प्रियदर्शीनी, कार्तिक पासवान आदि नेताओं ने इसका नेतृत्व किया. मौके पर राजद प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह व प्रवक्ता मनोज झा भी मौजूद रहे।
मानव शृंखला के दौरान माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि किसान आंदोलन देश में नई ऊंचाई ग्रहण कर रहा है। 26 जनवरी को आयोजित किसानों की परेड में हुई छिटपुट घटना की आड़ में मोदी सरकार आंदोलन को कुचलना चाहती थी। दिल्ली बाॅर्डर व यूपी में कुचलने की साजिशें आरंभ भी हो गई थीं. लेकिन मोदी-योगी की तानाशाही के खिलाफ पूरा पश्चिम उत्तरप्रदेश उठ खड़ा हुआ। आज बिहार में मानव शृंखला लगाई जा रही है। भाजपा के लोग दुष्प्रचारित कर रहे थे कि बिहार में किसान आंदोलन नहीं है। आज वे अपनी आंखों से देख लें कि पंजाब-हरियाणा-यूपी -बिहार यानि पूरा देश मोदी सरकार के खिलाफ उठ खड़ा हो रहा है। बिहार में एमएसपी को कानूनी दर्जा देने और एपीएमसी एक्ट पुनर्बहाल करने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठ रही है।
आगे कहा कि कुछ लोगों की समझदारी थी कि बिहार में महागठबंधन केवल चुनाव भर का गठबंधन है. ऐसा बिल्कुल नहीं है। महागठबंधन आंदेालन का गठबंधन बनता जा रहा है. हम सब एक साथ खड़े हैं। बिहार में महागठबंधन किसानों व संविधान के साथ खड़ा है। जब तक कानून वापस नहीं होंगे, हम आंदोलन जारी रखेंगे।
पटना में इकनम टैक्स गोलबंर और समनपुरा के इलाके में भी मानव शृंखला लगी। समनपुरा की शृंखला में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी दिखी। फुलवारीशरीफ में विधायक गोपाल रविदास तथा पालीगंज में संदीप सौरभ ने दसियों किलोमीटर लंबी मानव शृंखला का नेतृत्व किया।
भोजपुर के पीरो, सहार, अगिआंव, आरा, जगदीशपुर आदि प्रखंड मुख्यालयों पर शृंखला लगाई गई। इन कार्यक्रमों में विधायक सुदामा प्रसाद, मनोज मंजिल, माले के युवा नेता राजू यादव आदि शामिल हुए। राज्यव्यापी आह्वान के तहत चंपारण में बेतिया स्टेशन चैक पर माले विधायक बीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में दसियों किलोमीटर लंबी मानव शृंखला आयोजित की गई। मुजफ्फरपुर में महागठबंधन के साथ-साथ इंसाफ मंच के भी कार्यकर्ता सड़क पर उतरे। सकरा, कुढ़नी, मुरौल, औराई आदि स्थानों पर मानव शृंखला आयोजित हुई. मधुबनी के जयनगर में महात्मा गांधी व बाबा साहेब अंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण करके लंबी शृंखला लगी। बक्सर में एनएच 84 पर दो स्थानों ज्योति चैक व ब्रह्मपुर में आयोजित हुई। जहानाबाद में मानव शंृखला का नेतृत्व विधायक रामबलि सिंह यादव ने किया। महबूब आलम ने बारसोई, अरूण सिंह ने काराकाट, अरवल में महानंद सिंह, सिवान में सत्यदेव राम आदि विधायकों ने आज की मानव शृंखला का नेतृत्व किया. सारण, गोपालगंज, भागलपुर, नवादा, पूर्णिया, गया, औरंगाबाद, कैमूर, समस्तीपुर आदि तमाम जिला मुख्यालयों पर लंबी कतारें दिखीं।

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