डिग्री घोटाला और थीसिस चोरी के आरोप के बाद कुलपति को बर्खास्त करने की उठी मांग, शिक्षा मंत्री का फूंका पुतला

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महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा इन दिनों चर्चा में है। हिंदी विश्वविद्यालय में आरएसएस से जुड़े कुलपति रजनीश कुमार शुक्ल का योगी सरकार द्वारा फर्जी डिग्री मामले में गठित एसआईटी जांच में नाम है। वहीं 59 वर्षीय एक महिला सुधा पांडेय ने आरोप लगाया है कि शुक्ल ने उनकी थीसिस से लगभग 80 फीसदी कॉपी कर पीएचडी डिग्री हासिल की है।

आज दिल्ली के पत्रकारिता संस्थान, आईआईएमसी के एक कार्यक्रम में आरोप झेल रहे रजनीश शुक्ल के साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ मंच साझा करेंगे। इससे नाराज वर्धा के छात्रों ने आज शिक्षा मंत्री का पुतला फूंक दिया। छात्रों ने मांग की कि डिग्री घोटाले के मामले में दोषी ठहराए गए व थीसिस चोरी के आरोपी कुलपति रजनीश शुक्ल को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर बेदाग कुलपति की नियुक्ति हो।

अरोपकर्ता सुधा पांडेय ने कल शिक्षा मंत्री को टैग कर ट्वीट करते हुए लिखा कि “जब कुलपति प्रो. रजनीश को पद मुक्त कर मुझे न्याय देना चाहिए तब शिक्षा मंत्री महोदय उनके साथ मंच साझा कर रहे हैं। मंत्री महोदय क्या आपका मुझ जैसे आम नागरिक के साथ यही न्याय है?”

इस मामले में अभी तक कई छात्र संगठनों ने कुलपति रजनीश शुक्ल की बर्खास्तगी की मांग करते हुए राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। आइसा, एनएसयूआई, एआईएसएफ की राष्ट्रीय एवं उत्तर प्रदेश की स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की राज्य कमेटी ने राष्ट्रपति व शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिख हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति की बर्खास्तगी की मांग की।

क्या है पूरा मामला?

कुछ समय पहले ही बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में फर्जी डिग्री धारियों की नियुक्ति का मामला सामने आया था। परिषद के स्कूलों की शिक्षक भर्ती में सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी की फर्जी डिग्रियों का उपयोग किया गया था। उत्तर प्रदेश शासन ने इस मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराई थी। एसआईटी ने 2004 से 2014 के बीच चयनित उन शिक्षकों का दोबारा सत्यापन कराया। उनमें कई फर्जी मिले। जांच अवधि के दौरान संस्कृत विश्वविद्यालय में नियुक्त और कार्यभार संभालने वाले कुलसचिवों और परीक्षा नियंत्रकों को एसआईटी ने फर्जीगिरी के लिए दोषी माना है।

जांच रिपोर्ट के साथ उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव मनोज कुमार की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि फर्जी डिर्गी जारी करने के मामले में दोषी पाए 19 लोगों ने अपने दायित्वों का पालन नहीं किया। अनुचित लाभ और निजी हितों के लिए डिग्रियों का फर्जी ढंग से सत्यापन किया। साथ ही परीक्षा विभाग के अभिलेखों में हेराफेरी, जालसाजी और कूटरचना की गई है। विशेष सचिव ने विश्वबिद्यालय को निर्देश दिया है कि कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, उपकुलसचिव, सहायक कुलसचिव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाई विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के तहत होगी।

एसआईटी की जांच अवधि में ही हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति रजनीश कुमार शुक्ल सम्पूर्णानन्द में कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक की भूमिका निभा रहे थे।

इसी बीच कारवां हिंदी की एक रिपोर्ट के बाद खुलासा हुआ कि 59 वर्षीय महिला की थीसिस चोरी कर रजनीश कुमार शुक्ल ने पीएचडी डिग्री हासिल की है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से वर्ष 1991 में कांट के सौंदर्यशास्त्र पर सुधा पांडेय ने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उसी विश्वविद्यालय व विभाग से प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने वर्ष 1995 में पीएचडी जमा की। आरोप है कि रजनीश शुक्ल ने सुधा की थीसिस से 80 फीसदी हिस्सा हू-ब-हू कॉपी कर अपनी थीसिस तैयार की है। वहीं कई आरोपों के साथ यह भी है रजनीश शुक्ल के गाइड प्रो. रेवती रमण पाण्डेय ने थीसिस में कहीं भी मौलिकता का दावा भी नहीं किया गया है।

डॉक्टर सुधा पांडेय को अपनी थीसिस चोरी हो जाने की जानकारी दैनिक जागरण के वाराणसी संस्करण से 2012 में प्राप्त हुई। तबसे वे कार्यवाई की मांग लेकर सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, राज्यपाल, राष्ट्र्पति व प्रधानमंत्री को कई पत्र लिख चुकी हैं लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सुधा पांडेय का आरोप है कि आरएसएस से जुड़े होने व सरकार में रजनीश शुक्ल ली पकड़ होने के कारण उनपर कोई कार्यवाई नहीं हो रही है। इसलिए उन्हें सड़क पर उतरना पड़ रहा है। दो दिन पहले ही सुधा पांडेय अपनी 92 वर्षीय मां और बेटे के साथ बीएचयू के सिंह द्वारा से पीएम कार्यालत तक पैदल न्याय मार्च कर न्याय की मांग की।

वर्धा में शिक्षा मंत्री का पुतका दहन

हिंदी विश्वविद्यालय के छात्र सोशल मीडिया पर लम्बे समय से दागदार कुलपति की बर्खास्तगी व बेदाग कुलपति की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। आज शिक्षा मंत्री द्वारा आईआईएमसी में रजनीश शुक्ल के साथ मंच साझा करने पर कुछ छात्र संगठनों ने पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया।
रिपोर्ट – विक्की सवाई वर्धा

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