बर्खास्त साथियों की सेवा वापसी तक हड़ताल पर डटे रहेंगे राज्य भर के मनरेगा कर्मी 

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  • विशद कुमार

मंत्री आलमगीर आलम को ज्ञापन सौंपते मनरेगा कर्मी

  • विभागीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तानाशाह अधिकारियों को हटाने की मांग
  • 10 अगस्त को राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम से मनरेगा कर्मियों की वार्ता 
  • संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पांडेय एवं प्रदेश कमिटी के अन्य पदाधिकारी सहित बोकारो जिला कमिटी के सदस्यों और मंत्री जगरनाथ महतो के बीच अनिश्चितकालीन हड़ताल और पांच सूत्री मांगों पर विस्तृत चर्चा

जैसा कि पहले से आशंका थी वही हुआ। झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के अह्वान पर मनरेगा कर्मियों की 27 जुलाई से अपनी 5 सूत्री माँगों को लेकर अनिश्चित कालीन राज्यव्यापी हड़ताल को तोड़ने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों ने कई प्रयास किए, मगर हड़ताल कर्मी अपनी मांगों पर डटे रहे। परिणामत: 10 अगस्त को जब राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम से सकारात्मक वार्ता में अधिकांश मांगों पर सहमति बन गई थी, तथा राज्य भर के मनरेगा कर्मियों ने हड़ताल को स्थगित करते हुए काम पर लौटने का मन बना लिया था, तभी विभागीय अधिकारियों के आदेश पर12 भेजी गई। जिसे मनरेगा कर्मी बदले की भावना से ग्रसित कदम मान रहे हैं तथा उनका आरोप है कि आंदोलन को कुचलने तथा हड़ताली मनरेगा कर्मियों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से, झूठा गबन का आरोप लगाकर संघ के पदाधिकारियों को बर्खास्तगी का आदेश निर्गत किया गया है।

मंत्री जगरनाथ महतो के आवास पर

बताते चलें कि विगत 5 अगस्त को राज्य के शिक्षा सह मद्य निषेध मंत्री जगरनाथ महतो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों को बोकारो जिला स्थित भंडारीदह अपने आवास पर बुलाया था और उनकी समस्याओं के निदान का आश्वासन दिया था।

मंत्री ने कहा था कि मनरेगा कर्मियों की मांगे जायज है। मांगों को पूरा करने के लिए सरकार और संघ के बीच वे मध्यस्थता का काम करेंगे। उस वक्त संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पांडेय एवं प्रदेश कमिटी के अन्य पदाधिकारी सहित बोकारो जिला कमिटी के सदस्यों और मंत्री जगरनाथ महतो के बीच अनिश्चितकालीन हड़ताल और पांच सूत्री मांगों पर विस्तृत चर्चा हुई थी। अवसर पर मंत्री ने कहा था कि जल्द ही आपकी वार्ता विभागीय मंत्री से मेरी उपस्थिति में होगी। सरकार आपकी समस्याओं से अवगत है, कोरोना काल के चलते थोड़ा विलंब हो रहा है।उसके बाद 10 अगस्त को राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम से मनरेगा कर्मियों की वार्ता हुई और अधिकांश मांगों पर सहमति भी बन गई, तभी प्रदेश अध्यक्ष व धनबाद जिला अध्यक्ष की बर्खास्तगी की सूचना विभाग द्वारा निर्गत कर दी गई।

                

  • जिलाध्यक्ष मुकेश राम                                                    * प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पाण्डेय

11 अगस्त को झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ द्वारा जूम—एप के माध्यम से कॉन्फ्रेंस बैठक करके सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक बर्खास्त साथियों की सेवा वापसी नहीं होती है, तब तक राज्य भर के मनरेगा कर्मी हड़ताल पर डटे रहेंगे तथा आंदोलन को उग्र करते हुए माननीय मुख्यमंत्री को सामूहिक इस्तीफा सौंपेंगे।

मनरेगा कर्मियों ने मनरेगा कमिश्नर पर आरोप लगाते हुए कहा है कि ये पिछले पांच सालों से मनरेगा कमिश्नर के पद पर बने हुए हैं तथा मनरेगा को मनमाने ढंग से चलाना चाहते हैं। हड़ताल के पहले ही दिन से इन्होंने आंदोलन को कुचलने का काम किया है। ये हमेशा मनरेगा कर्मियों का अहित करना चाहते हैं। इनके कार्यकाल में दर्जनों मनरेगा कर्मी हाइपोटेंशन ब्रेन हेमरेज शिकार हुए हैं तथा आत्महत्या को बाध्य होकर मौत को गले लगाया है। अतः राज्य भर के मनरेगा कर्मियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि मनरेगा कमिश्नर की उपस्थिति में कोई वार्ता नहीं करेंगे, तथा विभागीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से ऐसे तानाशाह अधिकारियों को हटाने की मांग करेंगे।

संघ द्वारा निर्णय लिया गया है कि बर्खास्त साथियों की वापसी होने से पहले राज्य भर का कोई भी मनरेगा कर्मी हड़ताल से वापस नहीं होगा। संघ ने कहा है कि ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम द्वारा वार्ता के दौरान यह भी आश्वासन दिया गया था कि हड़ताल के दौरान जितने भी कार्रवाई हुए हैं, उसे वापस लिया जाएगा। किंतु अधिकारियों ने मंत्री जी के बातों को हल्के में लेते हुए अनसुना कर दिया तथा प्रदेश अध्यक्ष की बर्खास्तगी का पत्र निरस्त नहीं किया। इसलिए अब इनकी बातों पर भरोसा करने का कोई प्रश्न ही नहीं है। जब तक लिखित रूप से वार्ता नहीं हो जाती है तब तक राज्य भर के मनरेगा कर्मी हड़ताल पर डटे रहेंगे।

बता दे कि एक तरफ अपने पदाधिकारियों की बर्खास्तगी से आक्रोशित राज्य भर के 5000 मनरेगा कर्मियों ने हड़ताल पर डटे रहने की घोषणा की गई है वहीं राज्य के तमाम जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को कोविड—19 महामारी तथा बड़े पैमाने पर प्रवासी एवं गरीब मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता का हवाला देकर सरकार के अवर सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, झारखण्ड सरकार, राँची के पत्रांक (N) 918, दिनांक 07.08.2020 के तहत विभागीय निर्देश आया है कि दिनांक 27 जुलाई, 2020 से मनरेगा कर्मी हड़ताल पर है। हड़ताली मनरेगा कर्मियों से कार्य पर लौटने एवं उनकी विभिन्न माँगों पर वार्ता करने हेतु सरकार द्वारा मीडिया के माध्यम से अपील किया गया है, किन्तु मनरेगा कर्मचारी एवं पदाधिकारी अभी तक हड़ताल पर है। राज्य सरकार द्वारा इस विषय को काफी गंभीरता से लिया गया है। अत: मनरेगा कर्मियों एवं पदाधिकारियों को सूचित किया जाता है कि 48 घंटे के अन्दर अपने मूल कार्य पर लौटना सुनिश्चित करें, अन्यथा बाध्य होकर आपकी संविदा रद्द करते हुए आपके स्थान पर स्थानीय/सक्षम व्यक्तियों को नियमानुसार नियोजित कर (Fresh Recruitment द्वारा) लिया जायेगा।

इस आदेश के बाद संघ की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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