बिजलीकर्मी कार्य बहिष्कार के फैसले पर अड़िग

38
578
*निजीकरण की कार्यवाही पर ऊर्जा प्रबन्धन के हठवादिता के चलते वार्ता बेनतीजाः बिजलीकर्मी कार्य बहिष्कार के फैसले पर अड़िगः सरकार को गुमराह कर ऊर्जा निगमों में प्रबन्धन थोप रहा है हड़ताल : बिजलीकर्मियों के आंशिक कार्य बहिष्कार का आज चौथा दिन : ऊर्जा क्षेत्र में टकराव समाप्त करने हेतु मा0 मुख्यमंत्री जी से प्रभावी हस्तक्षेप की अपील :*
लखनऊः निजीकरण पर ऊर्जा निगम प्रबन्धन के हठवादी रवैये के चलते अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा), उप्र शासन व अध्यक्ष, पावर कारपोरेशन श्री अरविंद कुमार एवं विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष प्रतिनिधियों के मध्य शक्ति भवन में आज हुई वार्ता बेनतीजा रही। संघर्ष समिति ने एक बार पुनः प्रदेश के मुख्यमंत्री मा0 योगी आदित्यनाथ जी से प्रभावी हस्तक्षेप किये जाने की अपील की है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में टकराव की स्थिति समाप्त हो एवं बिजलीकर्मी पूर्ववत् निष्ठापूर्वक निर्बाध विद्युत आपूर्ति के कार्य में जुटे रह सके। आज हुई वार्ता के दौरान विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने दिनांक 05 अप्रैल, 2018 को मा0 ऊर्जा मंत्री पं0 श्रीकान्त शर्मा के साथ हुए लिखित समझौते ‘‘उप्र में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही विद्युत वितरण में सुधार हेतु कर्मचारियों एवं अभियन्ताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जायेगी। कर्मचारियों एवं अभियन्ताओं को विश्वास में लिये बिना उप्र में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नही किया जायेगा’’ का आदर/पालन करते हुये पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लि0 के निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि समझौते के अनुसार प्रबन्धन बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों एवं अभियन्ताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही करे, जिस पर प्रबन्धन द्वारा कुछ भी पहल नही की गयी। संघर्ष समिति ने पुनः प्रस्ताव दिया कि समझौते के अनुसार निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त कर सुधार की कार्य योजना बनाई जाय जिसके लिये बिजलीकर्मी संकल्पबद्ध है। संघर्ष समिति के सुधार के संकल्प के बावजूद ऊर्जा निगम प्रबन्धन निजीकरण पर अड़ा रहा एवं निजीकरण करने के प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग को अस्वीकार कर दिया, जिससे वार्ता बेनतीजा रही। वार्ता के दौरान प्रबन्धन की ओर से अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) श्री अरविंद कुमार, प्रबन्ध निदेशक पाकालि श्री एम देवराज, प्रबन्ध निदेशक उत्पादन निगम श्री सेन्थिल पांडियन सी एवं संघर्ष समिति की ओर से इं0 शैलेन्द्र दुबे, इं0 ए के सिंह, इं0 वी पी सिंह, इं0 प्रभात सिंह, इं0 जी बी पटेल, इं0 जय प्रकाश, श्री पी एन तिवारी, श्री महेन्द्र राय, श्री सद्रुदीन राना, श्री शशिकान्त श्रीवास्तव, श्री विनय शुक्ला, श्री सुहैल आबिद, श्री डी के मिश्रा, श्री परशुराम, श्री ए के श्रीवास्तव, श्री वी के सिंह कलहंस, श्री आर के सिंह, श्री हसमत, श्री राकेश, श्री कपिल मुनि, श्री सुनील प्रकाश पाल, श्री वी सी उपाध्याय, श्री राजेन्द्र जी मुख्यतया उपस्थित रहे।
शांतिपूर्ण आंदोलन के चौथे दिन आज जारी 03 घण्टे के कार्य बहिष्कार के दौरान प्रदेश में राजधानी लखनऊ समेत अनपरा, ओबरा, मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, सहारनपुर, बुलन्दशहर, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी, प्रयागराज, मिर्जापुर, कानपुर, झांसी, मुरादाबाद, बरेली, बांदा, आगरा, अलीगढ़, पनकी, पारीछा, हरदुआगंज, बस्ती, अयोध्या, देवीपाटन, पिपरी समेत सभी जनपद मुख्यालयों एवं परियोजनाओं पर विशाल विरोध सभायें हुई।
शक्ति भवन लखनऊ पर हुई विरोध सभा में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लि0 के विघटन/निजीकरण/अन्य संस्थानों को हैण्डओवर किये जाने के प्रस्ताव के विरोध में बिजलीकर्मी विगत 01 सितम्बर से शांतिपूर्ण ध्यानाकर्षण आन्दोलन चला रहे हैं, किन्तु प्रबन्धन ने समस्या के समाधान हेतु सार्थक प्रयास न कर शांतिपूर्ण आंदोलन को हड़ताल बताकर सरकार को गुमराह कर रहें है और बिजली कर्मचारियों पर हडताल थोपने का कार्य कर रहे है। उन्होने बताया कि संघर्ष समिति की नोटिस के अनुसार बिजलीकर्मी विगत 4 दिनां से 3 घंटे का कार्य बहिष्कार कर रहे हैं और 5 अक्टूबर से पूरे दिन का कार्य बहिष्कार किया जायेगा। नोटिस में स्पष्ट लिखा गया है कि कार्य बहिष्कार के दौरान बिजली का ग्रिड फेल न हो और आम नागरिको को तकलीफ न हो इस हेतु बिजली उत्पादन गृहों, 765/400 के0वी0 विद्युत उपकेन्द्र और प्रणाली नियंत्रण में पाली में काम करने वाले कर्मचारियों को कार्य बहिष्कार से अलग रखा गया है, किन्तु पावर कारपोरेशन प्रबन्धन शांतिपूर्ण आंदोलन को हड़ताल बता कर दमनात्मक कार्यवाही कर प्रदेश सरकार को गुमराह कर रहा है जिससे ऊर्जा निगमों में अनावश्यक टकराव का वातावरण एवं औद्योगिक आशांति उत्पन्न हो रही है।
संघर्ष समिति ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने पावर ग्रिड कारपोरेशन, प्रशासनिक अधिकारियों तथा लेखपालों आदि को तमाम बिजलीघरों और संस्थानों का चार्ज देने के निर्देश दिये गये है, जो पूरी तरह असंवैधानिक और आवांछित है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण कार्यरत बिजली कर्मचारियों का चार्ज यदि बाहरी एजेन्सियों और प्रशासनिक/अन्य अधिकारियों को सौंपने की कोशिश की गयी तो इसके गंभीर परिणाम होंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी पावर कारपोरेशन प्रबन्धन की होगी।
शैलेंद्र दुबे
संयोजक

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here