माओवादी के आरोप में गिरफ्तार नाजिर मुण्डा की रिहाई को लेकर आंदोलन की चेतावनी 

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  • विशद कुमार
विस्थापन विरोधी जनविकास आंदोलन, झारखंड इकाई के संयोजक दामोदर तुरी और मनोनीत संयोजक शैलेन्द्र सिन्हा ने एक संयुक्त  प्रेस बयान जारी कर बताया है कि पिछले 25 जनवरी 2021 को अपराह्न 3 : बजे दिन में नाजीर मुण्डा सामाजिक कार्यकर्ता को सरायकेला-खरसावां जिला के पुलिस प्रशासन द्वारा कुचाई थाना अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया, तथा मनगढ़ंत कहानी बनाते हुए नाजिर मुण्डा को भाकपा माओवादी संगठन के महराज प्रमानिक दस्ता का सदस्य बताया गया। पुलिस द्वारा कहा गया है की नई कृषि कानून के खिलाफ पोस्टर्स सहित नक्सली पोस्टर्स उनके दो पहिया वाहन से बरामद किया गया है। पुलिस ने 27 जनवरी 2021 को 17 एवं 18 सीएल एक्ट जैसे संगीन धाराओं में नाजीर मुण्डा को जेल भेज दिया गया है। प्रेस बयान में बताया गया है कि नाजीर मुण्डा पर लगाए गए पूरी तरह निराधार है।
बता दें कि नाजिर मुण्डा सर‌ायकेला-खरसावां जिला के कुचाई थाना अंतर्गत धुनाडीह गांव, टोला गुगडूदिरी के रहने वाले हैं। वे ईचा खरक‌ई डेम परियोजना के खिलाफ आंदोलन में अपना योगदान दे रहे थे। ज्ञात हो कि ईचा खरक‌ई डेम परियोजना के खिलाफ 1978 ई० से ही जनता आंदोलनरत है। क्योंकि इस  परियोजना से 124 गांवों से लगभग 2 लाख जनता को घर से बेघर होना पड़ेगा। बता दे कि चुनाव से पहले हेमंत सोरेन ने अपनी चुनावी सभा में बोल चुके हैैं कि अगर हम सत्ता में आते हैं तो इस परियोजना को रद्द कर देगें। परंतु हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री बने एक साल से ऊपर हो चुके हैैं, परंतु परियोजना तो रद्द नहीं हुआ, लेकिन आंदोलनकारियों के ऊपर पुलिस प्रशासन के जुल्म, अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। इसी कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता नाजिर मुण्डा की गिरफ्तारी है। प्रेस बयान में कहा गया है कि आंदोलन को कुंद करने हेतु नक्सलवाद, माओवाद का झूठा आरोप लगाकर आंदोलनकारी जनता व कार्यकर्त्ताओं को भयभीत किया जा रहा है, ताकि इस विनाशकारी परियोजना का रास्ता साफ हो सके। नाजिर मुण्डा को गिरफ्तार करने के बाद 24 घंटा से अधिक रख कर शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना की गयी, जो  डी .के .बासु के गाइड लाइन का घोर उल्लंघन है। इस मनगढ़ंत पोस्टर्स एवं बैनर रखने का झूठा मुकदमा लगाकर जेल भेजे जाने का विस्थापन विरोधी जनविकास आंदोलन, झारखंड इकाई तीब्र निंदा व भ्रत्सना करता है, एवं अविलंब बिना शर्त नाजिर मुण्डा की रिहाई की मांग करता है। विस्थापन विरोधी जनविकास आंदोलन अह्वान करता है कि अगर मुण्डा को रिहा नहीं किया गया तो पूरे झारखंड क्षेत्र में सरकार व पुलिस  प्रशासन के खिलाफ जनांदोलन तेज किया जाएगा।

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