अखिल भारतीय हड़ताल के समर्थन में माले ने आयोजित की सभा

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26 नवम्बर को आयोजित अखिल भारतीय हड़ताल के समर्थन में वाराणसी में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया।
नाटी इमली स्थित लेबर ऑफ़िस में भाकपा माले, ऐपवा, एक्टू एवम नागरिक समाज के बैनर से आज किसानों और मजदूरों से सम्बंधित काले कानूनों को वापस लेने के लिए विरोध प्रदर्शन किया गया और राष्ट्रपति के नाम 10 सूत्रीय मांगपत्र भी अपर श्रम आयुक्त के माध्यम से दिया गया।
खेग्रामस के राष्ट्रीय पार्षद एवं भाकपा माले के जिला सचिव का. अमरनाथ राजभर ने कहा कि लेबर कानूनों को सरकार रद्द करें और किसानों के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशो को लागू करें और बंटाईदारों को किसानों का दर्जा दिया जाए।
ऐपवा राज्य सचिव कुसुम वर्मा ने कहा कि स्वयँ सहायता समूह की महिलाओं के सभी के कर्ज़े सरकार माफ करे और महिलाओं को समान काम के लिए समान मजदूरी की गारंटी सरकार को करनी होगी।
खेग्रामस के पिंडरा ब्लाक के सचिव का. अशोक ने कहा कि सभी असंगठित मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा की गांरन्टी की जाय साथ ही उनके नियमित रोजगार की भी गांरन्टी सुनिश्चित की जाय।
सामाजिक कार्यकर्ता, जाने-माने इतिहासकार और ऑल इंडिया सेकुलर फोरम के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद आरिफ ने कहा की सरकार को देश हित में राष्ट्रीय सम्पत्ति को बेचना नही चाहिए और न ही कृषि को कॉरपोरेट के हाथ बेचना का कोई अधिकार है बल्कि संविधान के मुताबिक जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को सुनिश्चित करना चाहिए। श्री आरिफ ने कहा कि संविधान हमारे देश का आधुनिक मानव मूल्यों पर आधारित वह पहला लिखित दस्तावेज है जो हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों को विनियमित करता है। उन्होंने कहा कि इतिहास की गति को पीछे की ओर ले जाने वाली ताकतें आज संविधान की मूल आत्मा के साथ खिलवाड़ कर रही हैं और उसके स्थान पर प्रतिगामी मूल्यों को स्थापित करना चाहती हैं, जिसे इस देश के इंसाफपसंद नागरिक कभी भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि आज कमजोर-वंचित तबकों और स्त्रियों के साथ-साथ अल्पसंख्यक समुदाय भी निशाने पर हैं, कभी लव-जिहाद के नाम पर तो कभी गोरक्षा के नाम पर मासूमों को निशाना बनाया जा रहा है। इसकी मूल वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि रसातल में जाती अर्थव्यवस्था और संसाधनों की पूँजीपतियों द्वारा लूट से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के प्रपंच रचे जा रहे हैं। सरकार जहाँ मजदूर अधिकारों को कुचलते हुए उनके खिलाफ तरह-तरह के कानून ला रही है वहीं खेती-किसानी को भी तबाह किया जा रहा है, जिससे कि कृषि क्षेत्र में बड़ी पूँजी के प्रवेश की राह को हमवार बनाया जा सके।
सभा को ऐपवा से विभा वाही, रुखसाना, भाकपा माले से का. नरेंद्र पांडेय ने भी सम्बोधित किया। इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ मुनिज़ा रफीक खान, एपवा नेता डॉ. नूर फातमा विशेष रूप से उपस्थित थीं।

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