मुंगेर कांड : थम नहीं रहा प्रशासन के खिलाफ जनाक्रोश, बिना संगठित नेतृत्व का स्वत:स्फूर्त उभरा जन—आंदोलन

0
34056
  • विशद कुमार

26 अक्टूबर को हुई मुंगेर शहर में नरसंहार की घटना पर पूरा मुंगेर शहर इतना आक्रोशित हो उठा है कि भीड़ ने कल यानी 29 अक्टूबर को शहर के कई थानों को आग के हवाले कर दिया। सबसे पहले पूरब सराय थानों के सामने आगजनी हुई। उसके बाद आक्रोशित भीड़ ने एसपी कार्यालय, एसडीओ कार्यालय, कोतवाली थाना, मुफ्सिल थाना, वासदेवपुर थाना और कासिम बाजार थाना में पथराव किया। घटना को देखते हुए चुनाव आयुक्त द्वारा तत्काल एसपी लिपी सिंह व डीएम राजेश मीणा को प्रभाव से मुक्त कर मुंगेर से हटाया गया और मुफ्सिल थाना के थाना प्रभारी ब्रजेश सिंह व वासदेवपुर थाना प्रभारी सुशील कुमार को लाईन हाजिर किया गया। जबकि आक्रोशित भीड़ की मांग थी कि एसपी व दोनों थाना प्रभारी को सस्पेंड किया जाय।

उल्लेखनीय है कि 26 अक्टूबर की रात दुर्गा विसर्जन के दौरान, पुलिस द्वारा गोलियां चलाई गयी। जिसमें 18 साल के अनुराग पोद्दार की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी। अनुराग की मां अपने बेटे की मौत के गम में अभी तक सदमे से नहीं उबरी है और जीवन मौत से लड़ रही है।

उक्त घटना से अक्रोशित शहर वासियों ने 27 अक्टूबर की अहले सुबह जुलूस व धरना दिया। क्योंकि 28 अक्टूबर को बिहार चुनाव के पहले चरण में मुंगेर में भी मतदान था। जिसको लेकर पूरा शहर पुलिस छावनी में तब्दील था। इसीलिए लोग 28 अक्टूबर तक चुप रहे। जनता का गुस्सा 29 अक्टूबर को देखने को मिला, जब 5000 से ज्यादा लोग ने शहर में मार्च किया और कई थानों को आग के हवाले कर दिया। स्वत: स्फूर्त, बिना किसी नेतृत्व के एक जुलूस की शक्ल में लोग एसपी कार्यालय पहुंचे और कार्यालय पर पथराव किया। कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दी गयी। पूरा शहर आक्रोश की आग में जल रहा था।

जनता का मुख्य नारा था“लिपि सिंह को गिरफ्तार करो”, “दोषियों को सख्त सजा दो”

चुनाव आयोग ने मामले पर संज्ञान लेते हुए एस पी व डी एम को हटा दिया। तथा सफ्ताह भर के अंदर जांच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। घटना के बाद शाम 4:30 के बाद  मुंगेर रेंज के डीआईजी मनु महाराज के नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस बल द्वारा शहर में फ्लैग मार्च किया गया। बता दें कि डीआईजी मनु महाराज ने पुलिस फायरिंग से साफ इंकार किया था। उनका कहना था कि पुलिस ने नहीं कुछ उपद्रवी तत्वों ने गोली चलाई थी। जबकि प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वासदेवपुर थाना प्रभारी सुशील कुमार व मुफ्सिल थाना प्रभारी ब्रजेश सिंह 26 को घटना स्थल पर मौजूद थे और इन दोनों के नेतृत्व में गोली चलाई गई, जिसका नेतृत्व मुंगेर पुलिस कप्तान लिपी सिंह कर रही थीं।

                                डीएम रचना पाटिल                              एस.पी. मानवजीत सिंह

मुंगेर की जनता का आरोप है कि जो भी घटना शहर में घटी है, उसके जिम्मेवार डीआईजी मनु महाराज हैं, क्योंकि इन्होंने चुनाव आयुक्त को गुमराह करने का काम किया है। शहर के आमजनों का कहना है कि थाना प्रभारी को लाईन हाजिर करने और एसपी व डीएम को मुंगेर से हटा देने से काम नहीं चलेगा। जबकि सरकार को मासुम युवाओं के नरसंहार के दोषी एसपी व दोनों थाना प्रभारी सहित गोली चलानेवाले पुलिस के ऊपर 302 का मुकदमा दर्ज हो और उनकी अविलंब गिरफ्तारी हो। लोगों का कहना है कि जब तक दोषी पुलिस पदाधिकारियों पर मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

इस घटना की सबसे चौकाने वाला पहलू यह है कि स्थानीय लोगों के अनुसार इस गोलीकांड में चार लोगों की मौत हुई है, जबकि प्रशासनिक स्तर से केवल एक 18 वर्षीय अनुराग पोद्दार की मौत को ही स्वीकार किया जा रहा है और स्थानीय मीडिया भी प्रशासनिक बयान पर ही मुंहर लगा रहा है। जबकि आमजन चार लोगों की मौत का दावा कर रहे हैं। लोगों का यह भी आरोप है कि मामले पर दर्जनों लोगों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है, घटना के बाद भी दर्जनों लोग लापता हैं, जो अभी तक घर वापस नहीं आ पाए हैं। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गये लोगों की भी पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है।

जिसको भी लेकर लोगों में संदेह और गुस्सा है। लोगों का मानना है कि प्रशासन द्वारा ही इस घटना को सांप्रादायिकता का रंग देने की शुरू से ही कोशिश होती रही है, ताकि उन्हें सबकुछ जनता पर थोपने का बहाना मिल जाय। लेकिन लोगों की सुझबुझ के कारण प्रशासन अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाया और खुद अपने जाल में फंस गया है।

मामले पर भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल बताते हैं कि माले की टीम ने घटना पर सर्वे किया है, जिसमें केवल एक युवा अनुराग पोद्दार की मौत का मामला सामने आया है और एक दर्जन लोगों के घायल होने की जाकारी मिली है।

वहीं माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य से जब हमने फोन से संपर्क कर मामले पर बात की तो उन्होंने एक सवाल के जवाब में बताया कि ”पुलिस ने गोली चलाई है या उपद्रवी तत्वों ने गोली चलाई है? अगर ईमानदारी से जांच हो तो साफ हो जाना चहिए। जांच में जो दोषी पाएं जाएं उनपर कार्यवाई हो। वैसे जनता पर गोली चलाने का यह चरित्र नीतीश सरकार का ही चरित्र है। नीतीश सरकार में पुलिस निरंकुश रही है।” वे आगे कहते हैं कि ”अगर जनता स्वत:स्फूर्त आंदोलन करने को आगे आई है, तो यह बदलाव का अच्छा संकेत है, बशर्ते वे किसी भटकाव के शिकार न हों।”

बताते चलें कि 26 अक्टूबर की रात को मुंगेर के दीनदयाल चौक से जब दुर्गा की मूर्ति विसर्जन के लिए लोग गुजर रहे थे, तभी पुलिस ने आकर उन्हें आगे बढ़ने से रोका, जिसको लेकर पुलिस व मूर्ति विसर्जन को जा रहे लोगों में झड़प हो गई। पुलिस ने पहले लाठी चार्ज किया फिर फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए।

बता दें कि इस नरसंहार के खिलाफ अभी तक कोई संगठित नेतृत्व उभर कर सामने नहीं आया है। जनता स्वत:स्फूर्त आंदोलन में सक्रिय है। वैसे मुंगेर में नये एसपी मानवजीत सिंह व डीएम रचना पाटिल ने पदभार ग्रहण कर लिया है। देखना है ऊंट किस करवट बैठता है।

वैसे बताना जरूरी होगा कि उप महानिरीक्षक के.औ.सु.ब. पूर्वी क्षेत्र मुख्यालय, पटना ने इलेक्शन सेल एफएचक्यू नई दिल्ली को एक पत्र भेजकर बताया कि 26 अक्टूबर 2020 को मुंगेर में आत्म रक्षार्थ जिला पुलिस ने गोली चलाई।

 

 

 

 

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here