मनरेगा कर्मचारी संघ ने पत्र लिखकर संविदा की नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की

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  • विशद कुमार

झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश सोरेन ने पत्रांक — JRM/09/2020 के तहत मुख्यमंत्री झारखंड एवं JRM/10/2020 के तहत राज्यपाल झारखंड को एक पत्र लिखकर अस्थाई / संविदा की नियुक्ति पर अविलंब रोक लगाने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायादेश CIVIL APPEAL NO. 7423-7429 OF2018(Arising out of SLP (CIVIL)Nos.19832-19823 of. 2017)  के कांडिल 14 के अनुसार अस्थाई अनुबंध पर नियुक्त नहीं किया जाना है।

झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक संख्या-569 दिनांक 10.06.2020 एवं संविदा पर नियुक्त हेतु अन्य आदेशों के आलोक के अंतर्गत संविदा के आधार पर विभिन्न पदों (यथा ग्राम रोजगार सेवक, लेखा सहायक, कंप्यूटर सहायक, कनीय अभियंता, सहायक अभियंता, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी) पर नियुक्ति हेतु विज्ञापन का प्रकाशन कर नियुक्ति की प्रक्रिया की जा रही है। पत्र में कहा गया है कि इतना कम मानदेय में अनुबंध पर कर्मचारियों की नियुक्ति करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 (क) का घोर उल्लंघन है, साथ ही श्रम विभाग द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन ₹24000 से कम मानदेय पर काम कराना एक प्रकार का शोषण है।


पत्र में कहा गया है कि झारखंड में लगभग 600000 (छ: लाख) संविदा कर्मी हैं, जो प्राय: आंदोलन करते रहे हैं। वर्तमान में मनरेगा कर्मी और झारखंड सहायक पुलिस कर्मी आंदोलनरत हैं। इसका मुख्य कारण भी कम मानदेय मिलना और अनुबंध / संविदा पर नियुक्ति करना है।
पत्र में निवेदन किया गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायादेश के आलोक में संविदा पर वर्तमान में कार्य कर रहे मनरेगा कर्मचारियों को स्थायीकरण सहित समान काम, समान वेतन का लाभ देते हुए उन्हें स्थायीकरण किया जाए, साथ ही अस्थाई / संविदा की नियुक्ति पर अविलंब रोक लगाई जाए। ताकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान किया जा सके।

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