फर्जी लेबर डिमांड तथा मास्टररोल निर्गत किए जा रहे हैं  तथा मजदूरों का मस्टररोल में भुगतान नहीं हो रहा है — अनिरुद्ध पाण्डेय

224
871

लगातार 32वें दिन मनरेगा कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे रहे। मानव श्रृंखला बनाकर, हाथों में तख्ती लिए, मनरेगा कर्मियों ने प्रदर्शन किया तथा सरकार द्वारा अनदेखी और अड़ियल रवैये पर आक्रोश प्रकट किया। झारखंड के इस आंदोलन के समर्थन में आज राष्ट्रव्यापी दो दिवसीय कलमबंद हड़ताल का अंतिम दिन पूर्ण रूपेण सफल रहा, पहली मनरेगा के आंदोलन को पूरे देश से समर्थन मिला है जम्मू कश्मीर से केरल तक और गुजरात से मिजोरम तक सभी मनरेगा कर्मियों ने एकजुट हो कर एकता का परिचय दिया है।


मौके पर प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पाण्डेय ने कहा कि पंचायतों में न तो कोई काम हो रहा है, नहीं किसी मजदूर को वास्तविक रूप से काम दिया जा रहा है। मनरेगा सॉफ्ट में लेबर इंगेजमेंट प्रदर्शित करने के लिए फर्जी लेबर डिमांड तथा मास्टररोल निर्गत किए जा रहे हैं। किंतु इन मजदूरों का मस्टररोल में भुगतान नहीं हो रहा है, अधिकांश मस्टररोल शुन्य किए जा रहे हैं तथा मजदूरों को मस्टर रोल में अनुपस्थित दिखा दिया जा रहा है। इसके लिए पंचायत सचिव एवं मुखिया पर लगातार अनुचित दबाव बनाया जा रहा है, इस अनुचित दबाव से पंचायत सचिव तथा मुखिया भी तंग आ चुके हैं तथा मुखिया संघ की ओर से बगावती सुर आने शुरू हो गए हैं, मुखिया संघ के अध्यक्ष विकास महतो ने कहा है कि यदि इस प्रकार के अनुचित दबाव बंद नहीं किए गए, तो मुखिया संघ भी आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
प्रदेश अध्यक्ष अनिरूद्ध पाण्डेय ने कहा कि मनरेगा के प्रति सरकार की नीति और नियत दोनों खराब है, इसलिए गांवों में मनरेगा के तहत महज पांच हजार और दस हजार की योजनाएं जबरदस्ती थोपने का काम किया जा रहा है। जबकि पड़ोसी राज्यों में जल संरक्षण, जल संचयन एवं ग्रामीण सड़कें जैसी बड़ी-बड़ी योजनाएं ली जा रही हैं, जिससे व्यापक रूप से मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
झारखंड में विगत वर्ष 2015 से ही ग्रामसभा का महत्व खत्म कर दिया गया है। ग्राम सभा द्वारा ली गई योजनाओं के बजाय एसी कमरों में बैठकर तय की गई योजनाएं थोपी जा रही हैं, जिससे मनरेगा कार्यों में काफी शिथिलता आई है। वर्ष 2016 के बाद राज्य मनरेगा परिषद का एक भी बैठक नहीं हुआ है, जबकि यह हरेक छह माह में किया जाना है। इसके पदेन अध्यक्ष माननीय मुख्यमंत्री एवं पदेन सदस्य जिले के उपायुक्त होते हैं, जो राज्य में मनरेगा के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं की समीक्षा कर, इसके बेहतरी के लिए सुझाव देते हैं तथा इसके लिए नीति एवं नियम बनाते हैं। लेकिन विगत 4 वर्षों से मनरेगा परिषद अफसरशाही का भेंट चढ़ गया है। राज्य में अफसरशाही पूरी तरह हावी है, यह लोग ना तो राज्य का, न मनरेगा का और नहीं मनरेगा कर्मी का भला होने देना चाहते हैं।
प्रदेश महासचिव मो० इम्तियाज ने कहा कि मनरेगा कर्मी अपनी मांगों की पूर्ति के लिए पिछले 13 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। इन 13 वर्षों में कई बार सरकारें बदली लेकिन मनरेगा कर्मियों की समस्याएं जस की तस हैं। ना तो नौकरी की गारंटी, ना सामाजिक सुरक्षा और ना ही वेतनमान मिला है। आज भी अल्प मानदेय भोगी मनरेगा कर्मी सरकारी शोषण के लिए विवश हैं। सरकार को चाहिए कि मनरेगा कर्मियों के समस्याओं का स्थाई हल निकालें, ताकि बार-बार हड़ताल करने की आवश्यकता ना पड़े। उन्होंने कहा कि बातचीत से ही समस्याओं का समाधान होगा, जब तक सकारात्मक वार्ता नहीं होगी तब तक मनरेगा कर्मी हड़ताल पर डटे रहेंगे।
रांची जिला के सभी मनरेगा कर्मियों ने नामकुम स्थित दुर्गा सोरेन चौक के पास हाथों में तख्ती ले कर मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रकट किया, बारिश के बावजूद मनरेगा कर्मी डटे रहे। कार्यक्रम का नेतृत्व रांची जिला अध्यक्ष संजय कुमार प्रामाणिक, जॉन पीटर बागे, मो इम्तेयाज, गुंजन कुमार, अवनींद्र कुमार, संजय कुमार, निरोज लकड़ा, संध्या कुमारी, मोनिका कुल्लू, उषा कुजूर ,एनिमा तिग्गा, शुशीला मिंज समेत सैकड़ों की संख्या में मनरेगा कर्मी उपस्थित थे।

वहीं विकास खंड सेवापुरी के वाराणसी जनपद में झारखंड के साथियों के समर्थन में मनरेगा कर्मचारी महासंघ के आह्वाहन पर दो दिवसीय कार्यक्रम के तहत साथियों द्वारा कलम बन्द हड़ताल के परिपेक्ष्य में GRS,TA, लेखाकार ,कम्प्यूटर ऑपरेटर सभी संयुक्तरूप से शामिल हुए ।
* विशद कुमार

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here