‘मज़दूर पंचायत’ के लिए जारी पर्चाः इस तरह के प्रयोगों को सभी शहरों में किए जाने की जरूरत

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‘मज़दूर पंचायत’ के लिए जारी पर्चा
(8 नवंबर, लुधियाना)
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बिन हवा न पत्ता हिलता है, बिन लड़े न कुछ भी मिलता है!
मज़दूर एकता जि़ंदाबाद!
मज़दूर भाइयो, बहनो! उठो! जागो! एकजुट हो जाओ!
ज़ोरदार संघर्ष का बिगुल बजाओ!
– वेतन में ज़रूरी वृद्धि के लिए,
– स्त्री मज़दूरों को पुरुषों के बराबर वेतन के लिए,
– कोरोना के बहाने वेतन कम करने व वेतन में अन्य नाज़ायज कटौतियों के खि़लाफ़
– क़ानूनी श्रम अधिकारों के लिए
– पूँजीपतियों द्वारा मज़दूरों के हर प्रकार के लूट-शोषण के खि़लाफ़
लुधियाना में पूँजीपति मज़दूरों से कठोर मेहनत भरा काम ले रहे हैं, लेकिन बदले में जायज़ वेतन और अन्य बुनियादी सुविधाएँ तक नहीं दे रहे। निठल्ले पूँजीपति मज़दूरों के हाड़तोड़ श्रम से ढेरों मुनाफ़ा कमाकर अकूत सुख-सुविधाएँ ले रहे हैं, लेकिन मज़दूरों को भोजन, दवा-इलाज जैसी बेहद बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भी ज़रूरी वेतन नहीं दे रहे। अब हालात बद से बदतर हो चुके हैं। एकजुट होकर लूट-शोषण का विरोध करना, वेतन वृद्धि और अन्य अधिकारों के लिए संघर्ष करना, इन हालातों को बदलना हम मज़दूरों के लिए अब जीने-मरने का सवाल बन चुका है।
पिछले सालों में महँगाई बहुत अधिक बढ़ चुकी है। लेकिन उसके मुताबिक़ वेतन नहीं बढ़ाए गए। कोरोना के बहाने केंद्र की मोदी सरकार और पंजाब की कैप्टन सरकार द्वारा लागू की गई जनविरोधी नीतियों ने मज़दूरों की हालात पहले से कहीं अधिक बदतर बना दी है। कोरोना को महामारी बताया गया, लेकिन अब सरकार के इस झूठ भांडा पूरी तरह फूट चुका है। यह एक आम बीमारी निकली, जिसके लिए लॉकडाउन-कर्फ़्यू जैसे दमनकारी क़दमों की ज़रा भी ज़रूरत नहीं थी। मज़दूरों-मेहनतकशों को दमनकारी लॉकडाउन के चलते जान-माल का जो भारी नुक़सान हुआ और मुसीबतें झेलनी पड़ी हैं, उसका सरकार और पूँजीपतियों द्वारा मज़दूरों को मुआवज़ा तो क्या दिया जाना था, बल्कि इसके बाद मज़दूरों पर और भी अधिक आर्थिक बोझ लाद दिया गया है, लूट-शोषण और भी तीखा कर दिया गया है।
लॉकडाउन के प्रभावों से महँगाई रिकार्ड तोड़ गति से बढ़ती जा रही है, जिससे ग़रीब मज़दूरों-मेहनतकशों का गुज़ारा चलना मुश्किल हो गया है, लेकिन इस हिसाब से पूँजीपति मज़दूरों के वेतन नहीं बढ़ा रहे। वेतन बढ़ाया जाना मज़दूरों का पूरी तरह जायज़ अधिकार है और न टाली जा सकने वाली ज़रूरत है। इसके विपरीत बहुत सारे पूँजीपतियों ने मज़दूरों के वेतन घटा दिए हैं। लॉकडाउन के दौरान कुछ मालिकों ने मज़दूरों को जो थोड़ा-बहुत पैसा दिया था, वो अब वेतन से काट लिया गया है या किश्तवार काटा जा रहा है। स्त्रियों को वेतन के मामले में बहुत बड़ा भेदभाव किया जाता है। अधिकतर मामलों में उन्हें पुरुषों से कम वेतन दिया जा रहा है।
मज़दूरों को जायज़ वेतन मिलना तो दूर की बात है, मालिक तो उन्हें सरकार द्वारा श्रम क़ानूनों के मुताबिक़ तय न्यूनतम वेतन देने के लिए भी राजी नहीं हैं। उल्टा बहुत से पूँजीपति कर्मचारियों के वेतन से ई.पी.एफ़. के पैसे काटते हैं, लेकिन ई.पी.एफ़. विभाग को आगे जमा नहीं करवाते। मालिकों के हिस्से से दिया जाने वाला ई.पी.एफ़. का हिस्सा भी वेतन से नाजायज़ तौर पर काट लिया जाता है। ऐसा ही कुछ ई.एस.आई. सुविधा के मामले में भी हो रहा है। अधिकतर मज़दूरों को तो ये सुविधाएँ दी ही नहीं जा रहीं। साल में कम से कम एक महीने के वेतन के बराबर बोनस मिलना होता है। अधिकतर मज़दूरों को ये सुविधाएँ नहीं दी जा रहीं। इन सबके चलते मज़दूरों की कमाई बहुत गंभीर रूप में प्रभावित हो रही है। इस भयानक लूट से मज़दूरों का जीवन-स्तर दिन-ब-दिन गिरता जा रहा है। कारख़ानों और अन्य काम की जगहों पर असुरक्षित हालातों के चलते होने वाली बीमारियों और हादसों की वजह से मज़दूर ग़रीबी के गढ्ढे में और भी गहरे धँस जाते हैं। इसलिए, पूँजीपतियों की मनमानियों को, हमारी लूट को, शोषण को अब और नहीं सहा जा सकता।
पूँजीपति अपने संगठन बनाकर मज़दूरों को अधिक से अधिक लूटने, बेहिसाब मुनाफ़े कमाने की योजनाएँ बनाते हैं। सरकारें खुलकर पूँजीपतियों का साथ दे रही हैं। अब कोरोना के बहाने केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा श्रम क़ानूनों में बदलाव करके मज़दूरों के बहुत से क़ानूनी श्रम अधिकारों को खत्म कर दिया गया है। पूँजीपतियों और सरकारों के नापाक गठजोड़ का मुक़ाबला मज़दूर संगठित होकर ही कर सकते हैं।
कारख़ाना मज़दूर यूनियन और टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन द्वारा 8 नवंबर 2020 को इन मुद्दों पर संघर्ष आगे बढ़ाने के लिए ‘मज़दूर पंचायत’ बुलाई गई है। हर मज़दूर चाहे पुरुष हो या स्त्री, नौजवान हो या बुजुर्ग ‘मज़दूर पंचायत’ में हरेक का आना बहुत ज़रूरी है। हमारी सबकी यह जि़म्मेदारी है कि हम अधिक से अधिक मज़दूरों को लेकर आएँ। पंचायत में हमने अपने मसलों पर विचार-चर्चा करनी है, माँगों और आगे के संघर्ष के बारे में तय करना है। इसलिए आपसे हमारी ज़ोरदार अपील है कि आप ख़ुद तो ‘मज़दूर पंचायत’ में पहुँचें ही, बल्कि अपने कारख़ानों, बेहड़ों, मोहल्लों से और मज़दूरों को और शहर में अपने जानकार मज़दूरों को अधिक से अधिक संख्या में ‘मज़दूर पंचायत’ में लेकर आएँ।
‘मज़दूर पंचायत’ का संदेशा हर मज़दूर तक पहुँचाने के लिए जारी प्रचार मुहिम में शामिल हों।
पर्चा-पोस्टर वितरण, मीटिंगों, नुक्कड़ सभाओं आदि गतिविधियों में बढ़-चढक़र शामिल हों।
लूट, शोषण, अन्याय के खि़लाफ़ मज़दूरों के इस संघर्ष में शामिल होने के लिए नीचे दिए गए पतों-फ़ोन नंबरों पर संपर्क करें।
कारख़ाना मज़दूर यूनियन
कार्यालय पता – शहीद भगतसिंह पुस्तकालय, # 498, एल.आई.जी. फ़्लैट्स, जमालपुर कालोनी, लुधियाना। फ़ोन नं. – 9646150249
टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन
कार्यालय पता – मज़दूर पुस्तकालय, # 4135, ई.डब्ल्यू.एस. कालोनी, नज़दीक दयाल पब्लिक स्कूल, ताज़पुर रोड, लुधियाना। फ़ोन नं. – 9888655663

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