मासा के लेबर कोड्स के खिलाफ प्रदर्शन में उ.प्र. निर्माण व असंगठित मज़दूर यूनियन ने भी लिया हिस्सा

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मज़दूर विरोधी लेबर कॉड्स के खिलाफ 13 नवंबर 2022 को मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा ) के घटक 16 मजदूर संगठनों द्वारा आहूत मजदूर आक्रोश रैली में दिल्ली, एनसीआर, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक तथा महाराष्ट्र आदि 18 राज्यों से आये फैक्ट्री-कारख़ानो, खदानों, खेत-खलिहानों, सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारी, भोजन माताएं, आशा वर्कर आदि हजारों मजदूर रामलीला मैदान में सुबह 11 बजे इकट्ठा हुए। इस प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश निर्माण व असंगठित मज़दूर यूनियन की ओर से साथी हर्षित, साथी विवेक और साथी सागर ने भी हिस्सेदारी की। 

देश भर से आये क्रांतिकारी मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने मजदूर आक्रोश रैली की सभा में मोदी सरकार की मजदूर-मेहनतकश विरोधी नीतियों के खिलाफ घोर निंदा करते हुए कहा कि ये फासीवादी सरकार अडानी-अंबानी आदि बड़े पूंजीपतियों का मुनाफा बढ़ाने की खातिर मजदूर विरोधी लेबर कोड ले कर आई है। सरकारी उपक्रमों का निजीकरण तेज कर दिया है। महंगाई चरम पर है, लगातार मजदूरों-मेहनतकशों का जीवन कठिन होता जा रहा है।

देशी-विदेशी कारपोरेट पूंजी और फासीवादी ताकतों के खिलाफ मजदूर वर्ग की जुझारू एकता ही इसको पीछे ढकेल सकती है।

सभा के बाद रामलीला से जैसे ही रैली निकली, रामलीला मैदान के मुख्य गेट पर पुलिस ने बैरिकेट लगाकर रोक दिया। मजदूरों के भारी विरोध के बाद दिल्ली पुलिस को बैरिकेड्स हटाने पड़े।

इसके बाद राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़ रही रैली जब ज़ाकिर हुसैन कॉलेज पहुंची तो पुलिस ने फिर से बैरिकेट लगाकर रोक दिया जिससे भारी प्रतिवाद हुआ। “दिल्ली पुलिस हाय हाय!” “मोदी सरकार डरती है पुलिस को आगे करती है।” “तानाशाही नहीं चलेंगी!” हजारों मज़दूर नारे लगाते, नगाड़े, ढोल और डफली बजाते, क्रांतिकारी गीत गाते हुए सड़क पर ही बैठ गए। उधर वाहनों की लंबी कतार से जाम भी लग गया।

दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी मासा के 6 प्रतिनिधियों को ज्ञापन दिलाने के लिए राष्ट्रपति भवन ले गये।

इस बीच प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति को 6 सूत्रीय माँगों का ज्ञापन देकर वापस लौटा और प्रदर्शनकारी मज़दूरों को संबोधित किया और इन मांगों को पूरा कराने के लिए इससे बड़े संघर्षों को संगठित करने का संकल्प लिया। विरोध प्रदर्शन की समाप्ति की घोषणा की, तब मज़दूर सड़क से उठे और वापस लौटे।

राष्ट्रपति के ज्ञापन के लिए मासा की केंद्रीय मांगें –

1. मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताए तत्काल रद् करो ! श्रम कानूनों में मजदूर-पक्षीय सुधार करो!
2. बैंक, बीमा, कोयला, गैस-तेल, परिवहन, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि समस्त सार्वजनिक क्षेत्र-उ़द्योगों-संपत्तियों का किसी भी तरह का निजिकरण बंद करो!
3. बिना शर्त सभी श्रमिको को यूनियन गठन व हड़ताल-प्रदर्शन का मौलिक व जनवादी अधिकार दो ! छंटनी-बंदी-ले ऑफ गैरकानूनी घोषित करो!
4. ठेका प्रथा खत्म करो, फिक्स्ड टर्म-नीम ट्रेनी आदि संविदा आधारित रोजगार बंद करो- सभी मजदूरों के लिए 60 साल तक स्थायी नौकरी, पेंशन-मातृत्व अवकाश सहित सभी सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर सुरक्षा की गारंटी दो! गिग-प्लेटर्फाम वर्कर, आशा-आंगनवाड़ी-मिड डे मील आदि स्कीम वर्कर, आई टी, घरेलू कामगार आदि को ‘कर्मकार’ का दर्जा व समस्त अधिकार दो!
5. देश के सभी मजदूरों के लिए दैनिक न्यूनतम मजदूरी रु1000 (मासिक रु 26000) और बेरोजगारी भत्ता महीने में रु 15000 लागू करो!
6. समस्त ग्रामीण मजदूरों को पूरे साल कार्य की उपलब्धता की गारंटी दो! प्रवासी मजदूर सहित सभी मजदूरों के लिए कार्य स्थल से नजदीक पक्का आवास-पानी-शिक्षा-स्वास्थ्य-क्रेच की सुविधा और सार्वजिनक राशन की सुविधा सुनिश्चित करो!

मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के 16 संगठनों के अलवा मजदूर आक्रोश रैली के समर्थन में कई राज्यों के मजदूर संगठनों तथा यूनियनों ने भागीदारी की।

2 COMMENTS

  1. बहुत अच्छा। इंकलाब जिंदाबाद! दुनिया के मजदूरो, एक हो!

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