‘मार्क्सवाद और राष्ट्रीय प्रश्न’ विषय पर सेमिनार 7 नवंबर को

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प्रेस विज्ञप्ति

06 नवंबर 2021, चंडीगढ़। रूस की महान समाजवादी क्रांति की 104वीं वर्षगाँठ के अवसर पर अदारा ‘प्रतिबद्ध’ द्वारा ‘मार्क्सवाद और राष्ट्रीय प्रश्न’ पर एकदिवसीय सेमिनार 7 नवंबर को तर्कशील भवन, बरनाला में करवाया जा रहा है। सेमिनार में ‘प्रतिबद्ध’ के संपादक सुखविंदर, इंकलाबी मज़दूर केंद्र के केंद्रीय कमेटी मैंबर रोहित रुहेला, प्रोलेतारियन रिऑर्गनिज़िंग कमेटी, सीपीआई(एमएल) के महासचिव अजय सिन्हा, ‘संघर्षरत मेहनतकश’ पत्रिका के अमित आकाश, ‘देश-विदेश’ पत्रिका की और से दिगंबर और अन्य वक्ताओं द्वारा विचार पेश किए जाएँगे।

अदारा ‘प्रतिबद्ध’ की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए तजिंदर ने कहा रूस की समाजवादी क्रांति की वर्षगाँठ का यह अवसर ‘मार्क्सवाद और राष्ट्रीय प्रश्न’ पर विचार-चर्च के लिए बहुत उपयुक्त है। यह समाजवादी रूस (बाद में सोवियत यूनियन) ही था, जिसने यह दिखाया कि एक बहुराष्ट्रीय देश में राष्ट्रीय प्रश्न कैसे हल किया जा सकता है। समाजवादी सोवियत यूनियन ने ना केवल ज़ारशाही रूस द्वारा उत्पीड़ित राष्ट्रों को ही ग़ुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराया, बल्कि तीसरी दुनिया के औपनिवेशिक, अर्ध-औपनिवेशिक देशों के राष्ट्रीय आंदोलनों का भी बेग़रज़ समर्थन किया और इनकी आज़ादी में अहम भूमिका निभाई। मौजूदा वक़्त में ना केवल भारत बल्कि दुनिया के अनेकों देशों में राष्ट्रीय प्रश्न विशेष महत्व हासिल करता जा रहा है। इसलिए राष्ट्रीय प्रश्न पर मार्क्सवादी शिक्षाओं की ओर लौटने की ज़रूरत बढ़ गई है।

राष्ट्रीय प्रश्न भारतीय समाज का, भारतीय क्रांति का एक अहम सवाल है। इसका सामना किए बिना भारत में सर्वहारा क्रांति सफल नहीं हो सकती। भारत का कम्युनिस्ट आंदोलन शुरू से ही इस प्रश्न के साथ जूझता रहा है और आज भी जूझ रहा है। 2014 से फासीवादी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राजनीतिक शाखा भारतीय जनता पार्टी दिल्ली के तख़्त पर विराजमान है। यह फासीवादी सरकार जहाँ भारत के मज़दूरों, ग़रीब किसानों, अन्य मेनहतकशों, औरतों, दलितों और आदिवासियों के लिए ख़तरनाक़ है, वहीं भारत में राष्ट्रीय उत्‍पीड़न और तीखा हुआ है।
पूरी दुनिया में और भारत में राष्ट्रीय प्रश्न को मार्क्सवादी शिक्षाओं की रौशनी में समझने की ज़रूरत है। राष्ट्रीय प्रश्न पर मज़दूर वर्ग के महान अध्यापकों के विचारों और राष्ट्रीय प्रश्न हल करने के सोवियत अनुभव की रौशनी में आज राष्ट्रीय प्रश्न पर उठ रहे और भविष्य में उठने वाले भटकावों को मात दी जा सकती है और भारत में राष्ट्रीय प्रश्न का कोई ठोस हल खोजा जा सकता है। इन प्रश्नों का सामना करते हुए ही भारत में मज़दूर आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।

 

जारी कर्ता,

तजिंदर, अदारा ‘प्रतिबद्ध’

संपर्क- 9815587807

 

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