शहादत दिवस पर याद किए गए प्रथम स्वतंत्रता संग्रामी बाबा तिलका मांझी

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विशद कुमार 
इतिहास के पन्नों में बेइमानी के शिकार आदिवासी क्रान्तिकारियों में अंग्रेज़ों के खिलाफ प्रथम स्वतंत्रता संग्रामी बाबा तिलका मांझी का आज शहादत दिवस मनाया गया।
 बाबा तिलका मांझी के शहादत दिवस पर  बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन (बिहार) द्वारा शहीद तिलका मांझी को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ किसानों के आंदोलन की एकजुटता में प्रतिवाद-प्रदर्शन का कार्यक्रम भी किया गया।
  अवसर पर सबसे पहले ‘तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय’ कार्यालय परिसर में अवस्थित शहीद बाबा तिलका मांझी की प्रतिमा पर बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन (बिहार) द्वारा माल्यार्पण व श्रद्धांजलि का कार्यक्रम किया गया और तिलकामांझी की विरासत को बुलंद करने का संकल्प लिया गया।
माल्यार्पण व श्रद्धांजलि कार्यक्रम में यूनियन के कार्यकर्ताओं के साथ बुद्धिजीवियों व राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया।
इस मौके पर बहुजन बुद्धिजीवी डॉ.विलक्षण रविदास ने कहा कि ‘आज भारत और भागलपुर-संथाल परगना प्रक्षेत्र के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी, महान् क्रान्तिकारी किसान नेता एवं महान मूलनिवासी बहुजन नायक अमर शहीद तिलका मांझी का 236 वां शहादत दिवस है। इस अवसर पर हमें अपने 35 वर्षीय अमर युवा शहीद के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए उनकी जुझारु-लड़ाकू विरासत को बुलंद करने और फिर से देशी-विदेशी पूंजीपति व उसके दलालों से देश को बचाने के लिए निर्णायक जंग लड़ने का संकल्प लेना है।’
इस मौके पर डॉ.योगेन्द्र ने कहा कि ‘शहीद तिलका मांझी ने मात्र 29 वर्ष की आयु में 1779 में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कम्पनी की 10 वर्षीय कृषि ठेकेदारी की आर्थिक लूट की व्यवस्था व फूट डालो- राज करो की नीति, आदिवासियों एवं किसानों का किए जा रहे सूदखोरी -महाजनी शोषण, पहाड़िया-संथाल जनजातियों के विद्रोहों-आन्दोलनों को कुचलने की दमनकारी नीतियों-कार्यों के खिलाफ मूलनिवासी किसानों को संगठित कर  विद्रोह का बिगुल बजा दिया था। शहीद तिलकामांझी के वारिसों को आज खेत-खेती पर देशी-विदेशी पूंजीपतियों के कब्जे के लिए बनाये गये तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहे किसानों के साथ ताकत के साथ खड़ा होने की जरूरत है।’
माल्यार्पण व श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के रिंकु यादव, अंजनी भी मौजूद थे।
अंत में प्रतिमा स्थल से तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन के साथ एकजुटता और नई शिक्षा नीति-2020, निजीकरण व बेरोजगारी के खिलाफ
 बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन (बिहार) के कार्यकर्ताओं ने मार्च निकाला और विश्वविद्यालय कार्यालय परिसर के मुख्य द्वार पर प्रतिवाद प्रदर्शन किया।
इस मौके पर बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन (बिहार) के सोनम राव और विभूति ने कहा कि ‘तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के छात्र तिलका मांझी की विरासत को बुलंद करते हुए देशी-विदेशी पूंजीपतियों के कब्जे से खेत व खेती बचाने के लिए लड़ रहे किसानों के साथ है। नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा देश को देशी-विदेशी पूंजीपतियों को सौंप देने के खिलाफ किसान-मजदूर-छात्र-नौजवानों को मिलकर निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी।
अवसर पर अभिषेक आनंद और राजेश रौशन ने कहा कि ‘नई शिक्षा नीति-2020 संपूर्ण सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने और शिक्षा व्यवस्था को देशी-विदेशी पूंजीपतियों के हवाले कर देने के लिए लाया है। इससे बहुसंख्यक आबादी शिक्षा से वंचित होगी। अत: इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
सौरव राणा और ऋषि राज ने कहा कि ‘निजीकरण के जरिए नरेन्द्र मोदी सरकार बेरोजगारी बढ़ा रही है और देश को गुलाम बना रही है। नरेन्द्र मोदी सरकार देश बेचना बंद करे।’
माल्यार्पण व प्रतिवाद प्रदर्शन में साजन,अंगद, ऋषि राज, अभिषेक आनंद, आदित्य राज, नंदलाल, विभूति, विनय, राजेश रौशन, रणवीर, रोहित, रघुनंदन, सुशील, अंगद, साजन, डेविड, लालू, दीपक, शिरीष, सूरज, सुधाकर, श्वेत कमल सहित कई लोग शामिल थे।

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