मनीषा वाल्मीकि को इंसाफ़ और दोषियों को फाँसी दिलाने के लिए ज़ोरदार आवाज़ उठाओ!

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स्त्रियों पर जुल्मों-सितम के खात्मे के लिए विशाल आंदोलन के लिए आगे आओ!
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के भुलगढ़ी गाँव में पिछली 14 सितंबर को 19 वर्षीय मनीषा वाल्मीकि के साथ गाँव के कुछ दबंगों ने सामूहिक बलात्कार की बर्बर घटना को अंजाम दिया। इंसानों के भेष में इन भेडिय़ों ने पीडि़ता की रीड़ की हड्डी तोड़ डाली और जीभ तक काट डाली। वैसे तो हर जाति के पुरुषों द्वारा हर जाति की स्त्रियों का शोषण समाज की एक कड़वी सच्चाई है लेकिन तथाकथित निचली जाति की स्त्रियों को तथाकथित उच्च जातियों के पुरुषों में बड़े स्तर पर मौजूद जातिवादी संस्कृति-अहंकार-धौंस के कारण विशेष भयानक हालातों का सामना करना पड़ता है। मनीषा वाल्मीकि के साथ भी यही हुआ। उसका एक गुनाह तो यह था कि वो एक स्त्री थी! दूसरा उसका गुनाह था कि वो एक गरीब घर से थी!! तीसरा उसका गुनाह था कि वो एक दलित परिवार से थी!!! स्त्री विरोधी पुरुषवादी-जातिवादी-पूँजीवादी मानसिकता वाले दबंगों ने उसे इतना बर्बर ढंग से नोच डाला कि सूनने वालों की रूह काँप उठती है। ऐसे दरिंदों के लिए फाँसी के सिवा और कोई सजा नहीं हो सकती।
लेकिन सजा के दोषी और भी हैं। पीडि़त परिवार को एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिए सप्ताह भर तक दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं। इस मामले के दोषी पुलिस अफसरों को सजा मिलनी चाहिए। दोषियों को बचाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गड़बड़ी की गई। इसके दोषी डॉक्टरों और मिलीभगत करने वाले अन्य लोगों को सजा मिलनी चाहिए। मनीषा की मौत के बाद माँ-बाप उसकी लाश को घर पर लेकर जाना चाहते थे। योगी सरकार ने ऐसा नहीं होने दिया। बेहद घृणित काली करतूत को अंजाम देते हुए पुलिस ने पीडि़त परिवार को घर में बंद कर दिया और चोरी छिपे रात को ढाई बजे मनीषा की लाश को आग लगा दी। उसका आदर सहित अंतिम संस्कार तक नहीं होने दिया गया। इस घोर अमानवीय अपराध के दोषी मुख्य मंत्री योगी, योगी सरकार के अन्य मंत्रियों, उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
भाजपा अन्य पार्टियों से कहीं अधिक स्त्री विरोधी और जातिवादी व्यवस्था की समर्थक पार्टी है। यह स्त्रियों और दलितों को गुलाम बनाकर रखने की हामी है। आर.एस.एस. की चुनावी शाखा यह पार्टी मनुस्मृति लागू करना चाहती है जिसके तहत स्त्रियों को पुरुषों के और दलितों को उच्च जातियों के मातहत रहना होगा। इसलिए कोई हैरानी की बात नहीं कि जैसे जैसे भारत में आर.एस.एस.-भाजपा का उभार होता गया वैसे वैसे स्त्रियों और दलितों पर अत्याचार भी बढ़ते गए हैं। केंद्र में मोदी हुकूमत के चलते पूरे देश में यह हाल देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के चलते इस राज्य में तो और भी बुरे हालात हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 2015 से 2019 तक 9703 लड़कियों से बलात्कार हुए। इनमें से 988 वारदातों में कत्ल भी किए गए। एक बार योगी की उपस्थिति में भाजपा नेता ने भाषण में मृत मुस्लमान औरतों को कब्रों से निकालकर बलात्कार करने की बात कही थी। विधायक कुलदीप सेंगर बलात्कार (उनाव कांड) का दोषी है। आसिफा (कठुआ) बलात्कार और कत्ल केस में भाजपा नेताओं ने दोषियों के पक्ष में रैलियाँ निकाली। अब हाथरस मामले में भी भाजपा नेता खुलकर दोषियों के पक्ष में खड़े हो गए हैं। ऐसी घोर स्त्री विरोधी भाजपा के राज में स्त्रियाँ कैसे सुरक्षित हो सकती हैं? भोली-भाली हिंदू जनता को दूसरे धर्मों के लोगों के खिलाफ़ नफऱत की घुट्टी पिलाकर, तथाकथित ‘राम राज्य’ का सपना दिखाकर वोट बटोरकर सत्ता पर काबिज होने वाले धार्मिक कट्टरपंथी मोदी और योगी के तथाकथित ‘राम राज्य’ की यह है एक भयानक तस्वीर।
वास्तव में भाजपा हो या कांग्रेस या कोई और पूँजीवादी वोट-बटोरू पार्टी सभी के राज में स्त्रियों, गरीबों और दलितों को भयानक लूट, शोषण का शिकार होना पड़ता रहा है। ये हुकूमतें स्त्रियों और दलितों के हालात सुधारने के लिए कदम उठाना तो दूर की बात रही बल्कि इस शोषण में दोषी के रूप में शामिल रही हैं।
समाज में आज चारों तरफ स्त्री विरोधी संस्कृति का बोलबाला है। फिल्मों-गीतों-इंटरनेट आदि पर ऐसी घटिया सामग्री भरी पड़ी है जो लगातार स्त्री विरोधी भयानक मानसिकता को बढ़ावा देती जा रही है। सरकारें पूरी तरह मुनाफाखोरों के साथ खड़ी हैं जो इन सबसे खूब मुनाफा बटोरते हैं। घर और या समाज, हर जगह स्त्रियाँ असुरक्षित हो चुकी हैं। इस सबमें मनुवादी भाजपा-आर.एस.एस. के उभार ने हालात पहले से कहीं अधिक भयानक बना दिए हैं।
इन सब हालातों में स्त्रियों में अपने अधिकारों, अपनी सुरक्षा, अपने आत्मसम्मान के लिए जागरूक होना होगा, जुल्मों-सितम के मुकाबले के लिए बहादुर बनना होगा, स्त्रियों की एकजुटता बनानी होगी, स्त्री विरोधी अपराधों, अत्याचार-शोषण के खिलाफ़ एक व्यापक स्त्री आंदोलन खड़ा करना होगा। बिना शक यह आंदोलन पुरुष विरोधी नहीं बल्कि स्त्री विरोधी विचारों, पुरुषवादी दबदबे के खिलाफ़ होगा, मनुवादी-जातिवादी अहंकार के खिलाफ़ होगा, धन-दौलत के नशे में स्त्रियों को पैर की जूती समझने वालों के खिलाफ़ होगा, स्त्रियों को शोषण-अत्याचार का शिकार बनाने वालों के खिलाफ़ होगा। इंसाफपसंद पुरुष स्त्री आंदोलन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे। बलात्कार जैसे घृणित अपराधों को अंजाम देने वाले मानव रूपी भेडिय़ों को फाँसी के तख्तों तक पहुँचाने के लिए विशाल स्त्रियों में जागरूकता, विशाल स्त्री आंदोलन और जन आंदोलन की एकमात्र रास्ता है।
जारीकर्ता संगठन
कारखाना मज़दूर यूनियन, पंजाब
कार्यालय पता – शहीद भगतसिंह पुस्तकालय, 498,
एल.आई.जी. फ़्लेट्स, जमालपुर कालोनी, लुधियाना।
फोन नं. – 9646150249
टेक्सटाइल-हौजऱी कामगार यूनियन, पंजाब
कार्यालय पता – मज़दूर पुस्तकालय, 4135,
ई.डब्ल्यू.एस. कालोनी, नज़दीक दयाल पब्लिक स्कूल,
ताज़पुर रोड, लुधियाना। फोन नं.- 9888655663

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