लंका गेट बीएचयू पर संयुक्त रूप से विभिन्न संगठनों द्वारा प्रोटेस्ट किया गया

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आज 28/04/2022 को लंका गेट बीएचयू पर संयुक्त रूप से विभिन्न संगठनों द्वारा प्रोटेस्ट किया गया। मामला यह है की भगतसिंह छात्र मोर्चा द्वारा आंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर 13 अप्रैल को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमे ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद के तख्ती और नारे लगे थे। जिसके बाद से संगठन के एक सदस्य को अपराधी व लंपट छात्र कॉल और मैसेज करके आंबेडकर जयंती क्यों मनाया गया? ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद के नारे क्यों लगे? कहकर उठाकर मार देने की धमकी दी गई। जिसकी लिखित तहरीर बीएचयू प्रशासन को दी गई। लेकिन कोई कार्यवाही ना करने की वजह से 22 को योगेश (बीए द्वितीय वर्ष) को धमकी दी गई, मारापीटा गया। फिर 23 अप्रैल को अमन(बीए द्वितीय वर्ष) का अपहरण करके बिरला छात्रावास ले जाकर मारपीटा गया। इन दोनो की तहरीर बीएचयू और जिला प्रशासन को दिया गया, पर काफी भाग दौड़ के बाद भी अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं किया गया। फिर कल 27/04/2022 की रात को बीएचयू की दीवारों पर भगतसिंह छात्र मोर्चा के नाम से “कश्मीर तो झांकी है पूरा भारत बाकी है, BCM ने ठाना है BHU को ब्राह्मण मुक्त बनाना है, ब्राह्मणों तेरी क़ब्र खुदेगी बीएचयू की धरती से” जैसे उकसाउ नारे लिखे गए, जिससे बीसीएम को बदनाम किया जा सके। इन नारों का खण्डन सभी संगठनों ने एक सुर में किया।
लोक बंधु पार्टी के युवा दिग्गज नेता निकलेश सिंह जी ने भी बीएचयू के छात्रों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि सांप्रदायिक सत्यानाशियों के हर बढ़ते हमले का जवाब जनता पुरजोर तरीके से देगी। आज जरूरत इस बात की है कि जनता को गोलबंद किया जाए।
कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए दिशा छात्र संगठन के अमित ने कहा की यह दौर फासीवाद का दौर है। इस दौर में हम सबको एकजुट होने की जरूरत है। तभी इस तरह के दमन के खिलाफ लड़ सकेंगे। ऐपवा से कुसुम वर्मा ने ब्राह्मणवाद को समझाते हुए कहा की इसका मतलब गैर बराबरी से है। खुद को जन्म से ऊंच और दूसरो को नीचा समझना है। भगतसिंह छात्र मोर्चा के सचिव अनुपम ने पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैया पर सवाल खड़ा करते हुए जब कभी किसी छात्र के साथ अनहोनी होती है तो वो पुलिस के पास न्याय की उम्मीद में जाता है, पर जब पुलिस ही उसे भगा दे तो न्याय की उम्मीद किससे करे। जब हमारे साथियों के साथ मारपीट हुई तो प्रशासन हमारा एफआईआर तक दर्ज आज तक नही किया। लेकिन जब हम आंदोलन करते हैं, प्रोटेस्ट करते है तो पुलिस अधिकारी दौड़ कर कार्यकम रोकने आते हैं और एफआईआर कर देते हैं। जब भी कोई गरीब पुलिस स्टेशन जाते हैं तो उन्हें दुत्कार कर भगाया जाता वहीं पुलिस अमीरों तो सलाम ठोकती है। अगर हमारी एफआईआर दर्ज नहीं की गई तो हम बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। बीसीएम के पूर्व सचिव रितेश विद्यार्थी ने कहा की अगर पुलिस प्रशासन अगर कोई कार्यवाही नहीं कर सकती तो हमे लिखित दे दे की प्रशासन असक्षम है। इस देश का हर नागरिक अपनी सुरक्षा के लिए सक्षम है। आखिर क्यों पुलिस गुण्डो बदमाशों पर कार्यवाही करने से पीछे हट रही है, पुलिस प्रशासन पर भी सवालिया निशान है। कार्यक्रम के अंत में मामले पर जल्द से जल्द कार्यवाही की अपील करते हुए पुलिस उपायुक्त के नाम एसीपी भेलूपुर को एक ज्ञापन दिया गया।
कार्यक्रम में क्रांतिकारी गीत भी गाए गए। कार्यक्रम का संचालक आकांक्षा आज़ाद ने किया। यह प्रदर्शन ऐपवा, बीसीएम, दिशा, एसएफआई, पीएस4 कम्युनिस्ट फ्रंट, सीजेपी, प्रलेस, ऑटो यूनियन, ऑल इंडिया सेक्युलर फोरम द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

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