लालू प्रसाद यादव को बड़ी राहत : झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका कोषागार मामले में दे दी जमानत

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विशद कुमार

झारखंड हाईकोर्ट से आज 17 अप्रैल को आरजेडी के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने लालू यादव को दुमका कोषागार मामले में जमानत दे दी है। चारा घोटाले से जुड़े एक केस में लालू 23 दिसंबर 2017 को जेल गए थे। इससे पहले लालू यादव को अक्टूबर 2020 में चाईबासा ट्रेजरी मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन दुमका कोषागार मामले की वजह से उनकी रिहाई नहीं हुई थी।

बता दें कि लालू प्रसाद के वकील द्वारा सजा की आधी अवधि गुजर जाने को आधार बनाकर जमानत याचिका दायर की गई थी, जिसे मंजूर करते हुए जस्टिस अपरेश सिंह की अदालत में सुनवाई के बाद उन्हें जमानत मिली है।
कोर्ट ने 1-1 लाख का बेल बांड और 5-5 लाख निजी मुचलकों पर लालू को रिहा करने का आदेश दिया है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में लालू प्रसाद को सीबीआई कोर्ट ने दो अलग-अलग धाराओं में 7-7 साल की सजा सुनाई थी। सजा की आधी ‌‌अवधि काट लेने के आधार पर लालू प्रसाद ने जमानत देने का आग्रह हाईकोर्ट से किया था।

3 मामलों में पहले ही मिल चुकी है जमानत

बता दें कि चारा घोटाले के 5 मामले लालू प्रसाद के खिलाफ चल रहे हैं। इसमें से 4 मामलों में उन्हें सजा मिली है। जबकि 3 मामलों में लालू प्रसाद को पहले ही जमानत मिल गई है। एक मामले में अभी सीबीआई कोर्ट में सुनवाई जारी है। लालू प्रसाद यादव की ओर से याचिका में कहा गया था कि जेल में वो 42 महीने 28 दिनों की हिरासत की अवधि पूरी कर ली है। ऐसे में उन्हें जमानत दी जाए।

कोर्ट ने लयागा ये शर्त

जमानत देने के साथ ही झारखंड हाई कोर्ट ने कई शर्तें भी रखीं हैं। जिसमें कोर्ट आदेश के मुताबिक बिना अनुमति के वे देश से बाहर नहीं जाएंगे और ना ही अपना पता और मोबाइल नंबर बदलेंगे।

25 वर्षों से चल रहा था मामला

उल्लेखनीय है कि लालू प्रसाद को चारा घोटाले के नियमित मामले में 5 वर्ष की सजा सुनाई गई। 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। देवघर कोषागार से जुड़े आरसी 64ए/96 में साढ़े तीन वर्ष की सजा सुनाई गई, जबकि 5 लाख रुपए का जुर्माना लगा। चाईबासा ट्रेजरी से अवैध निकासी मामले में 5 साल की सजा सुनाई गई और 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। दुमका कोषागार से जुड़े मामले में 7-7 वर्ष की सजा सुनाई गई। डोरंडा ट्रेजरी से अवैध निकासी मामले की सुनवाई चल रही है। बता दें कि लालू यादव फिल्हाल दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पिछले काफी लंबे से इलाजरत हैं।

बता दें कि 17 अप्रैल को जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सीबीआई की तरफ से जो फैसला दिया गया था, उसे झारखंड हाई कोर्ट ने निराधार माना और जमानत याचिका स्वीकार कर ली। इस संबंध में लालू के वकील आनंद का कहना है कि जैसे बेल बॉड भरा जायगा, लालू यादव बाहर आ जाएंगे। हालांकि, कोविड-19 को देखकर थोड़ा समय लग सकता है।

तेजस्वी बोले- जमानत की खुशी, लेकिन सेहत की चिंता

हाईकोर्ट के आदेश के बाद लालू यादव के बेटे तेजस्वी ने कहा, ‘हमें न्याय मिलने का भरोसा था। लालू जी अपनी आधी सजा काट चुके हैं। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर उन्हें जमानत दी है। हम कोर्ट का शुक्रिया अदा करते हैं। लालू जी को जमानत मिलने की खुशी है, लेकिन उनकी सेहत को लेकर चिंता बनी हुई है। वे एम्स में भर्ती हैं और कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। उनका इलाज जारी रहेगा। गरीब लोग खासतौर पर खुश हैं कि उनका मसीहा अब बाहर आ जाएगा।’

जल्द ही हम सबों के बीच में आएंगे लालू यादव

लालू यादव की जमानत पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘हम’ के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा है कि लालू यादव की मिली जमानत का हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा स्वागत करती है। रिजवान ने कहा कि जीतन राम मांझी उनके स्वास्थ्य को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे। उन्होंने हमेशा इस चीज का जिक्र भी किया है कि लालू प्रसाद यादव जल्द ही स्वस्थ होकर हम सब के बीच में आएं। आज उनको जमानत मिली है यह खुशी का माहौल है। जमानत के बाद अब वह समूचित इलाज कराकर जल्द ही हम सबों के बीच में आएंगे।

डोरंडा केस में लालू की हो सकती है फिर से जेल वापसी

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के दुमका कोषागार मामले में जमानत मिल गई है। इसके साथ ही फिलहाल उनके जेल से बाहर आने का रास्ता भी साफ हो गया है। फिलहाल इसलिए, क्योंकि इसी केस के डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी मामले में सजा पर फैसला बाकी है। अगर इस मामले में भी उन्हें सजा हुई, तो फिर से वापस जेल जाना पड़ सकता है। डोरंडा मामले की सुनवाई चल रही है। कोरोना की वजह से अभी धीमी है। सीबीआई को उम्मीद थी कि लालू के बेल पिटीशन पर सुनवाई के दौरान ही इस मामले में भी फैसला आ जाएगा। हालांकि पटना हाईकोर्ट के सीनियर वकील अरविंद उज्जवल कहते हैं कि सुनवाई अभी की सामान्य रफ्तार से भी हुई तो डोरंडा पर फैसला आने में एक से डेढ़ माह का वक्त लग सकता है।
चारा घोटाले से ही जुड़े डोरंडा कोषागार अवैध निकासी मामले की सुनवाई अभी कोर्ट में चल रही है। कोरोना काल में वर्चुअल सुनवाई और गवाही प्रक्रिया धीमी होने के कारण ट्रायल की रफ्तार भी धीमी हो गई है। यही वजह है कि अबतक इस मामले में सजा पर फैसला नहीं हो सका है। सजा पर फैसला आने के बाद लालू की जमानत भी सजा अवधि पर निर्भर करेगी। अगर 5 साल की सजा होती है तो ढाई साल, अगर 7 साल की सजा मिलती है तो लालू को साढ़े तीन साल जेल में बिना बेल के रहना होगा।

लालू यादव फिलहाल एम्स दिल्ली में इलाज करवा रहे हैं। करीब ढाई साल रिम्स रांची में इलाज कराने के बाद जनवरी में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी के चलते उन्हें 23 जनवरी 2021 को रिम्स से एम्स रेफर किया गया था।

20 अप्रैल को जेल से आ सकते हैं बाहर

अरविंद उज्जवल के मुताबिक लालू प्रसाद को जेल से आने में 2 से 3 दिन का वक्त लग सकता है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले हाईकोर्ट का आर्डर निचली अदालत यानी सीबीआई कोर्ट को भेजा जाएगा। वहां से रिलीज ऑर्डर का बेल बॉन्ड बनेगा जो रिम्स रांची, के जरिए एम्स दिल्ली में भर्ती लालू प्रसाद तक भेजा जाएगा। इस बेल बॉन्ड पर लालू हस्ताक्षर करेंगे। फिर वह जेल अधीक्षक के पास जाएगा। जेल अधीक्षक रिलीज ऑर्डर जारी करेंगे, फिर बेल होगी। कल 18 अप्रैल को रविवार होने के कारण इस पूरी प्रक्रिया में 2 से 3 दिन का वक्त लग सकता है। लालू 20 अप्रैल को बेल पर बाहर आ सकते हैं।

जमानत रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंच सकती है सीबीआई

चारा घोटाले के मामलों में लालू प्रसाद को मिली जमानत के खिलाफ सीबीआई सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है। सीबीआई ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है और जल्द सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी। सीआरपीसी की धारा 427 को आधार बनाते हुए सीबीआई सुप्रीम कोर्ट से लालू प्रसाद की जमानत रद्द करने का आग्रह करेगी।

सीबीआई के मुताबिक, लालू प्रसाद को चार मामले में अलग अलग सजा हुई है। लेकिन सीबीआई कोर्ट ने सभी सजा एक साथ चलाने का आदेश नहीं दिया है। इस कारण सभी सजा एक साथ नहीं चल सकती। सीआरपीसी की धारा 427 के अनुसार, किसी व्यक्ति को एक से अधिक मामलों में दोषी करार देकर सजा सुनायी जाती है और अदालत सभी सजा एक साथ चलाने का आदेश नहीं देती है तो उस व्यक्ति की एक सजा की अवधि समाप्त होने के बाद ही उसकी दूसरी सजा शुरू होगी।

सीबीआई के मुताबिक, चारा घोटाले के चार मामलों में लालू प्रसाद को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई गई है। किसी भी आदेश में सभी सजा एक साथ चलाने का उल्लेख नहीं किया गया है। इस कारण लालू प्रसाद पर यह धारा लागू होती है और जब तक एक सजा की पूरी अवधि वह हिरासत में व्यतीत नहीं कर लेते, दूसरी सजा लागू नहीं हो सकती। इस आधार पर लालू प्रसाद की यह दलील कि उन्होंने आधी सजा काट ली है, सही नहीं है।

सीबीआई के अनुसार, लालू प्रसाद की ओर से अभी तक अदालत से सभी सजा एक साथ चलाने के लिए कोई आवेदन नहीं दिया गया है। ऐसे में सीआरपीसी की धारा 427 के तहत उन्हें जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
दूसरी तरफ लालू प्रसाद की ओर से इसका विरोध भी किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि सीबीआई ने चारा घोटाले के किसी मामले में यह मुद्दा नहीं उठाया है। हाईकोर्ट ने भी लालू प्रसाद व अन्य को हर मामले में आधी सजा काटने पर जमानत दे चुकी है। इस कारण सीबीआई की ओर से दी गई यह दलील सही नहीं है।

चारा घोटाले के इन 4 मामलों में लालू को सजा सुनाई जा चुकी है

पहला मामला
चाईबासा ट्रेजरी केस
37.7 करोड़ रुपए अवैध निकासी का आरोप
लालू प्रसाद समेत 44 अभियुक्त
मामले में 5 साल की सजा

दूसरा मामला
देवघर ट्रेजरी
84.53 लाख रुपए की अवैध निकासी का आरोप
लालू समेत 38 पर केस
लालू प्रसाद को साढ़े तीन साल की सजा

तीसरा मामला
चाईबासा ट्रेजरी
33.67 करोड़ रुपए की अवैध निकासी का आरोप
लालू प्रसाद समेत 56 आरोपी
5 साल की सजा

चौथा मामला
दुमका ट्रेजरी
3.13 करोड़ रुपए की अवैध निकासी का मामला
दो अलग-अलग धाराओं में 7-7 साल की सजा

लालू को कब-कब जेल जाना पड़ा?

30 जुलाई 1997: पहली बार लालू यादव को जेल जाना पड़ा। इस दौरान कुल 135 दिन जेल में रहे।
28 अक्टूबर 1998: दूसरी बार जेल गए। 73 दिन बाद बाहर निकले।
5 अप्रैल 2000: तीसरी बार जेल गए। 11 दिन बाद जमानत मिली।
28 नवंबर 2000: आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक दिन के लिए जेल गए।
3 अक्टूबर 2013: चारा घोटाले से जुडे़ एक मामले में दोषी साबित होने के बाद जेल गए। 70 दिन बाद बाहर निकले।
23 दिसंबर 2017: चारा घोटाले से जुड़े एक केस में सजा होने के बाद जेल गए। अब जमानत मिली है।

चारा घोटाले में कब-क्या हुआ?

27 जनवरी 1996: पशुओं के चारा घोटाले के रूप में सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए की लूट का पता चला। चाईबासा ट्रेजरी से गलत तरीके से 37.6 करोड़ रुपए निकाले गए थे।
11 मार्च 1996: पटना हाईकोर्ट ने चारा घोटाले की जांच के लिए सीबीआई को निर्देश दिए।
19 मार्च 1996: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश की पुष्टि करते हुए हाईकोर्ट की बेंच को निगरानी करने को कहा।
27 जुलाई 1997: सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव पर शिकंजा कसा।
30 जुलाई 1997: लालू प्रसाद ने सीबीआई अदालत के सामने सरेंडर किया।
19 अगस्त 1998: लालू और राबड़ी देवी के खिलाफ आय से ज्यादा संपत्ति का मामला दर्ज कराया गया।
4 अगस्त 2000: लालू के खिलाफ आरोप पत्र दर्ज हुआ और राबड़ी देवी को सह-आरोपी बनाया गया।
5 अगस्त 2000: लालू और राबड़ी ने सरेंडर किया, राबड़ी को जमानत मिली।
9 जून 2000: कोर्ट में लालू के खिलाफ आरोप तय हुए।
अक्टूबर 2001: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद मामले को नए राज्य में ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद लालू ने झारखंड में सरेंडर किया।
18 दिसम्बर 2006: लालू और राबड़ी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में क्लीन चिट मिली।
2000 से 2012 तक: मामले में करीब 350 लोगों की गवाही हुई। इस दौरान कई गवाहों की मौत हो गई।
17 मई 2012: सीबीआई कोर्ट में लालू नए आरोप तय हुए। इसमें दिसम्बर 1995 और जनवरी 1996 के बीच दुमका ट्रेजरी से 3.13 करोड़ रुपए की निकासी का मामला भी शामिल।
17 सितम्बर 2013: चारा घोटाला मामले में रांची की विशेष अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा।
30 सितम्बर 2013: चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव दोषी करार दिए गए।

सीबीआई ने कहा था- ये सामान्य नहीं व्यापक षडयंत्र का मामला है

चारा घोटाले को लेकर सीबीआई का कहना था कि ये सामान्य आर्थिक भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि व्यापक षड्यंत्र का मामला है जिसमें राज्य के कर्मचारी, नेता और व्यापारी वर्ग समान रूप से भागीदार थे। यह केस सिर्फ राजद तक भी सीमित नहीं रहा। इस सिलसिले में बिहार के एक और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र समेत राज्य के कई मंत्रियों की गिरफ्तारी हुई थी।

जब सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था हाईकोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें उसने लालू के खिलाफ चारा घोटाले में आपराधिक साजिश की जांच खत्म कर दी थी। हाईकोर्ट ने तब तर्क दिया था कि जिस शख्स को दोषी ठहरा दिया गया है या बरी कर दिया गया है, उसे फिर से उसी मामले में जांच के दायरे में नहीं लाया जा सकता है। इसके बाद सीबीआई ने 2014 में सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लालू के खिलाफ चारा घोटाले में अलग-अलग जांच जारी रहेगी।

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