… बहस करते जूझते खुलकर के बोलते हुए जब सुनता हूं (नरेंद्र कुमार की कविता)

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#संवाद करती मजदूर किसान और स्त्रियां!
उन्मुक्त वातावरण में खुलकर संवाद करती
कई पीढ़ियां और स्त्रियों की जमात
आकर्षित करता है
आंदोलन सम्मेलन और धरने
सिर्फ आर्थिक और राजनीतिक मांगों के लिए
महत्वपूर्ण नहीं है
कई पीढ़ियां कई प्रदेश के लोग और
कई सामाजिक स्तरों में बंटे समाज को
एक साथ मिल बैठकर एक
दूसरे की संस्कृति सामाजिक परिवेश
उनकी आकांक्षाएं उनकी पीड़ा उनके उल्लास
उनके जीवन की कहानियों को
सुनने और समझने का मौका भी देता है
इस तरह से ज्ञान शिक्षा और संस्कृति का
विस्तार होता है
इस ज्ञान और शिक्षा के कैनवास को
उस अनंत तक बिखेर देने का
स्वप्न देखा था एक महामानव
जहां इसे प्राप्त करने की कोई सीमा नहीं होती
जरा सोचिए पूरी दुनिया में
अलग-अलग भौगोलिक और सामाजिक परिवेश में पलती बढ़ती पीढ़ियां और समाज
जब एक दूसरे से मिलेंगे
उत्पादन संबंधों की संस्कृतियों की भाषाओं की
उनके अंदर के उल्लास और उत्साह और साहस का
जब एक दूसरे से संवाद होगा
तो ज्ञान कितनी रफ्तार से
उस अनंत आकाश की तरफ
अपनी यात्रा के अभियान पर निकलेगा ।
ऐसे सम्मेलनों में वंचित समाज के लोगों को
मजदूरों को स्त्रियों को
अपने को संप्रेषित करने के लिए उनके
उतावलेपन को
बहस करते जुझते खुलकर के बोलते हुए
जब सुनता हूं
उदास हो चले मन को झंकृत कर देने वाले
उस संगीत को
देखता हूं उनके चेहरे के उल्लास को
उससे जब एकाकार होता हूं
दुनिया के ज्ञान के
प्रेम के
आनंद के
अनंत की यात्रा के द्वार खुल जाते हैं।
लेनिन ने स्वप्न देखा था
मजदूरों के ऐसे ही जनतंत्र का
अपने जनतंत्र के बारे में लिखा था
मजदूरों के पास, मेहनतकाश जमात और
स्त्रियों के पास
इतने साधन नहीं होते
सभागर नहीं होते
सम्मेलन और गोष्ठियों में भाग लेने के लिए
समय नहीं होता
पूंजीवादी लोकतंत्र के संविधान में लिखें
अभिव्यक्ति की आजादी के मुकाबले
जनतंत्र को नीचे से विकसित करने के लिए
स्वप्न यूकेरा था वह महामानव
और नंगा कर दिया था पूंजीवादी लोकतंत्र को
इस घोषणा के साथ कि
ज्यादा से ज्यादा समय और साधन
उपलब्ध कराया जाए
ऐसी गोष्ठियों और आयोजनों के लिए
मजदूरों स्त्रियों और अन्य मेहनतकशों को।
मेहनतकशों का जनतंत्र ऐसा होगा
जिसमें अभिव्यक्ति के हर उन लम्हों को
दर्ज किया जाएगा
जो अभिव्यक्त होगा
इन गोष्ठियों सम्मेलनों और आयोजनों में
इतिहास के धरोहर और ज्ञान के अनंत कोष में

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