केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश हेतु कॉमन प्रवेश परीक्षा CUCET का विरोध आखिर क्यों जरूरी हो गया है?

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मानव उमेश, बीएचयू

CUCET, देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाख़िला लेने के लिए आयोजित होने वाली एक ‘कॉमन’ प्रवेश परीक्षा है। इस प्रणाली के माध्यम से देश के लगभग 54 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने के लिए अब एक ही परीक्षा ली जाएगी। इससे पहले सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय अपना ख़ुद का प्रवेश परीक्षा आयोजित करते थे। जिसके माध्यम से छात्र-छात्राओं को प्रवेश मिलता था।
अब केंद्रीय विश्वविद्यालयों में CUCET के माध्यम से केंद्रीकृत परीक्षा कराकर अभ्यर्थियों को प्रवेश देने की तैयारी है। CUCET की शुरुआत 2010 से ही शुरू हो गई थी। लेक़िन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 आने के बाद केंद्रीकृत परीक्षा नीति पूरी तरह लागू करने की तैयारी हो रही है। अधिकतर केंद्रीय विश्वविद्यालयों ने इस बात की स्वीकृति दे दी है। लेक़िन जामिया और अलीगढ़ ने अपनी विशेषता व विविधता का हवाला देकर कोर्ट का रुक किया है। जिसका असर यह हुआ है 2022 में होने वाले CUCET की परीक्षा जो NTA द्वारा कराई जाएगी,उसमें ये दोनों यूनिवर्सिटी शामिल नहीं होगी। CUCET की परीक्षा CBT(कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) मोड पर ही होगी। यानी परीक्षा पूर्णतः ऑनलाइन होगी।
CUCET लागू होने के बाद JEE व NEET की तरह ही इसकी तैयारी के लिए बड़े- बड़े कोचिंग की दुकानें खुलेगी। जहां मोटी रकम लेकर इसकी तैयारी करवाई जायेगी। साधारण सी बात है इन महंगी कोचिंग संस्थानों में कौन पढ़ पाएंगे? वही पढ़ेंगे जिनके पास इन कोचिंग संस्थानों को देने के लिए अकूत पैसे होंगे। किसानों-मजदूरों व गरीबों के बच्चें इन कोचिंग संस्थानों से स्वतः ही दूर हो जाएंगे। यानी कि इस व्यवस्था के आने की बाद आर्थिक रूप से कमजोर घरों के बच्चों के लिए यह बाधा सिद्धि होगी। यानी जो कोचिंग की फीस भरने में सक्षम होगा वही कोचिंग के माध्यम से विश्वविद्यालयों में दाखिला भी ले पायेगा। सरकार इस प्रणाली को लाकर गरीबों,दलितों व आदिवासियों के बच्चों को पूरी तरह से यूनिवर्सिटी में प्रवेश लेने से रोक देगी।
पहले इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेज में 12वीं तक सामान्य स्कूली पढ़ाई करने के बाद प्रवेश पाना संभव था। लेकिन केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली लागू होने के बाद लोग पेट काटकर – खेत बेचकर शहरों के बड़े कोचिंग माफियाओं के पास जाने को मजबूर हुए। क्योंकि इन परीक्षाओं में प्रश्न पूछने के पैटर्न को ऐसा बना दिया गया कि आपको कोचिंग जॉइन करना ही पड़ेगा, आप चाहे कितना भी ज्ञान क्यों न रखतें है। जिसका नतीजा यह होता है कि मेडिकल व इंजीनियरिंग में अच्छी रुचि व ज्ञान रखने वाले लाखों छात्र-छात्राएं महंगे कोचिंग की फ़ीस न होने के कारण पढ़ नहीं पाते हैं। इसी का नतीजा है कि इंजीनियरिंग/मेडिकल के लिए कोटा /पटना व दिल्ली का मुख़र्जी नगर सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी का हब बना हुआ है। क्योंकि यहाँ बड़े-बड़े शिक्षा माफियाओं के कोचिंग हैं।
वही हाल CUCET के जरिये बाक़ी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के प्रवेश परीक्षा को पूरी तरह कोचिंग-इंस्टिट्यूट पर निर्भर कर देना है। अब तक आप बारहवीं की पढ़ाई के दम ही किसी भी यूनिवर्सिटी में प्रवेश परीक्षा ज़रिए दाख़िला पा लेते थें। लेक़िन अब उसी प्रवेश परीक्षा को पूंजीपतियों के मुनाफ़े की दुकान बनाना है।
शिक्षा के मामले में महिलाएं पहले से ही हाशिए पर है। यह परीक्षा प्रणाली महिलाओं को और भी पीछे ढकेल देगी। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को पढ़ाने के लिए अगर अपने लड़के-लड़कियों के बीच चुनाव करना पड़े तो वे लड़के को ही चुनते हैं। कई अभिभावक अपनी बेटियों को अपने घर से नजदीक के विश्वविद्यालय में दाखिला दिलाना पसंद करते हैं। लेकिन CUCET के माध्यम से अगर घर से काफ़ी दूरी वाले विश्वविद्यालय मिल गया तो बहुत कम ही अभिभावक अपनी बेटियों को इतनी दूर भेजने के तैयार होंगे। इस प्रकार देश की महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा केंद्रीय विश्विद्यालय में पढ़ने से महरूम रह जायेगा।
CUCET उन सभी विश्वविद्यालयों की विविधता व विशेषता पर हमला है जो किसी खास उद्देश्य व लक्ष्य को ध्यान में रखकर स्थापित किया गया है। यह ज्ञात है कि सभी विश्वविद्यालय की अपनी विशेषता व विविधता है और उनकी स्थापना पार्लियामेंट के विशेष एक्ट से हुई है। वहीं जामिया, अलीगढ़,ट्राइबल यूनिवर्सिटी व अंबेडकर यूनिवर्सिटी आदि जैसे विश्वविद्यालयों में सामाजिक रूप से पिछड़े व कमजोर वर्गों व जातियों को आरक्षण का प्रावधान है। जिसके ज़रिए कोशिश की जाती है कि विश्वविद्यालय में सभी जाति-धर्मों के समुदायों से आने वालों बच्चों को प्रतिनिधित्व मिल पाय। लेक़िन अगर यह प्रणाली लागू हुई तो सभी विश्वविद्यालयों की विशेषता व विविधता को नष्ट हो जाएगी। इस नई प्रणाली के तहत सभी विश्वविद्यालय अपनी स्वायत्तता भी खो देंगे।
हम सभी भली-भांति जानते हैं कि अपना देश भारत विविधताओं व बहु-संस्कृतियों,बहु-भाषाओं से परिपूर्ण हैं। हर संस्कृति की अपनी-अपनी ख़ासियत है, और किसी का महत्व कम या ज्यादा नहीं है। तो फ़िर कैसे हम पूरे देश के छात्र-छात्राओं का ज्ञान व प्रतिभा एक तरह के प्रश्न पत्रों से जांच सकते हैं।
वहीं जब देश की प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था हीं एक समान नहीं है तो उच्च शिक्षा के लिए कैसे हम एक “कॉमन” प्रवेश परीक्षा की वकालत कर सकते हैं।
जिस देश में दो परती शिक्षा व्यवस्था हो सरकारी( जहाँ गरीबों, दलितों आदि के बच्चे पढ़ते हैं जो संसाधन व गुणवत्ता विहीन है) व दूसरी तरफ प्राइवेट( जहां अमीरों, उच्च वर्ग व जातियों के बच्चे पढ़ते हैं जो संसाधन व गुणवत्ता परिपूर्ण है)। देश में जब इतनी विविधता व गैरबराबरी है तब कॉमन एंट्रेस लेना सरासर अन्याय व देशवासियों के साथ धोखा है। पहले प्राथमिक स्तर के विद्यालयों में समानता लाने की जरूरत है तब उच्च शिक्षा के बारे में सोचा जाना चाहिए।
इस तरह CUCET ज्ञान विरोधी, गरीब विरोधी,महिला विरोधी,कॉरपोरेट परस्त,उच्च वर्गीय व उच्च जातीय आधारित भेदभाव पूर्ण केंद्रीकृत परीक्षा व्यवस्था है। देश के तमाम छात्र/छात्राओं, बुद्धिजीवियों व समतामूलक शिक्षा पसंद लोगों को इसके खिलाफ़ एकजुट होकर विरोध करना चाहिए व विकेंद्रित, विविधतापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को स्थापित करने के लिए संघर्ष करना चाहिए। साथ ही साथ वर्तमान सरकार द्वारा जो एक भाषा-एक संस्कृति-एक चुनाव प्रणाली-एक कानून-एक धर्म जैसे जो फ़ासीवादी एजेंडे को थोपा जा रहा है उस से देश की विविधताओं व शांति पर खतरा है। इसलिए हम सभी न्यायपसन्द देशवासियों को मिलकर अपने देश की रक्षा करने के लिए इसका विरोध करना जरूरी है। भारत विविधताओं वाला एक खूबसूरत देश है। गुलदस्ते की खूबसूरती एक तरह के फूलों से नहीं बल्कि अनेक व विविध फूलों से होती है।

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