काशी के लेनिन के कामों की केंद्रीय हुकूमत ने की सराहना

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भारतीय संसद के राज्य सभा सचिवालय के एडिशनल डायरेक्टर श्री भूपेंद्र भाष्कर ने 5 जुलाई, 2022 को कार्यालय अधिसूचना पत्रांक संख्या LAFEAS-HF21012/1/2022- H and FW-RSS जारी करके मानवाधिकार जननिगरानी समिति के संयोजक डॉ लेनिन रघुवंशी को पत्र लिखकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के फ़ूड रेगुलेशन सेक्शन और बाल स्वास्थ्य सेक्शन और FSSAI से प्राप्त जवाब को प्रेषित किया|
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) से प्राप्त कमेंट के अनुसार सितम्बर, 2021 में आईआईएम, अहमदाबाद को भारतीय आबादी के उपभोक्ताओ से पैकेज्ड फूड के लिए अलग-अलग फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल धारणाओं पर सर्वेक्षण-आधारित अध्ययन के संचालन के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया|
आईआईएम अहमदाबाद ने 15.02.2022 को आयोजित हितधारकों की बैठक में सर्वेक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिसने भारतीय उपभोक्ताओं की पहचान और समझ में आसानी और खरीद व्यवहार में बदलाव के सावधानीपूर्वक संयोजन को प्राप्त करने के लिए एक मॉडल के रूप में स्टार रेटिंग की सिफारिश की। इसके अलावा, इसी बैठक में संबंधित वैज्ञानिक पैनल द्वारा इन श्रेणियों के लिए भोजन के वर्गीकरण के साथ-साथ थ्रेसहोल्ड की भी सिफारिश की गई थी। 15.02.2022 को हुई बैठक के कार्यवृत्त एफएसएसएआई की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर वैज्ञानिक पैनल के साथ-साथ आईआईएम, अहमदाबाद द्वारा की गई सिफारिशों को मसौदा अधिसूचना के रूप में एफएसएस विनियमों में शामिल किया जाएगा, जिसे एफएसएसएआई की वेबसाइट पर रखा जाएगा।
इस साल के अप्रैल महीने में डॉ लेनिन रघुवंशी ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI ) द्वारा भारत मे सभी पैकेट बंद खाद्य पदार्थो पर वार्निंग लेबल के साथ फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग (FOPL) नियामक को अनिवार्य रूप से तत्काल लागू करने की माँग माननीय प्रधानमंत्री, संसदीय स्थायी समिति – स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण संबंधी समिति के अध्यक्ष, सदस्यों, राजनैतिक दल, संसद सदस्य से पत्र के माध्यम से हस्तक्षेप करने की अपील की|
वही मई, 2022 को दिल्ली के गाँधी पीस फाउंडेशन मे “बच्चों के पोषण अधिकार और पैकेज फूड लेबलिंग” के मुद्दे पर आयोजित राष्ट्रीय बहु-हितधारक संवाद में भागीदारी करते हुये एम्स ऋषिकेश के डॉ प्रदीप अग्रवाल ने नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस -5) के परिणामों को खतरे की घंटी बताते हुए कहा कि “भारत जल्द ही मधुमेह और बच्चों में मोटापे की वैश्विक राजधानी बनने का अंवाछनिय उपलब्धि हासिल करने वाला है। देश में सभी प्रकार के एनसीडी तेजी से बढ़ रहे हैं। एम्स द्वारा भारत के चारों कोनों से किए गए एक अवलोकन अध्ययन में पाया गया है कि लोगों को चेतावनी लेबल से सबसे ज्यादा फायदा होगा।”
अधिक जानकारी के लिये 9935599333 पर संपर्क कर सकते है|
जै कुमार मिश्रा
महासचिव

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