वरवर राव के समुचित इलाज और रिहाई के लिए कार्यक्रम

4
138

दिनांक 18 जुलाई को वाराणसी में साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों ने नरेन्द्र मोदी की फासिस्ट सरकार के सामने मांग रखते हुए प्रदर्शन किया. प्रदर्शन कचहरी चौक में होना था लेकिन कोरोना के केस सामने आने के कारण कचहरी चौक को कन्टेनमेंट जोन घोषित कर सील कर दिया गया है . अत: स्थान परिवर्तित कर यह कार्यक्रम सिकरौल गाँव में सामाजिक कार्यकर्ता सिद्धार्थ यादव के घर के लॉन में किया गया.

ज्ञातव्य हो कि सामाजिक कार्यकर्त्ता और तेलुगु भाषी कवि वरवर राव को भीमा-कोरगांव मामले में पिछले दो सालों से जेल में बंदी बनाकर रखा गया है. हाल ही में उनकी तबियत अधिक बिगड़ गई और वे स्मृति लोप के शिकार होने लगे . इसके बावजूद जेल प्रशासन ने उनके इलाज के लिए कोई कदम नहीं उठाया और इलाज के अभाव में लगातार उनकी तबियत में गिरावट आती गई . उनके लिए दैनिक क्रियाएं करना भी मुश्किल हो गया और तलोजा जेल में कोविद 19 संक्रमण फैलने के बाद उनके स्वास्थ्य को लेकर जब देश भर के सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से आवाज उठाना शुरू किया तब जाकर उन्हें मुंबई के जे जे अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ कोविड 19 के टेस्ट के बाद उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है,जो चिंताजनक बात है.

कल के कार्यक्रम की शुरुआत में गाँव के लोग की कार्यकारी संपादक अपर्णा ने कहा कि वरवर ऐसे कवि हैं जिनकी कविताओं के केंद्र में समाज के हाशिये पर रहने वाले संघर्षशील, वंचित और सर्वहारा जनता है . अपर्णा ने वरवर राव की ‘वेताल शव’, ‘चिन्ता’ और ‘सीधी बात’ आदि कविताओं का पाठ किया.

वाराणसी की जाने-माने कवि केशव शरण ने कहा कि इस महामारी में जहाँ संवेदनशील होने की जरूरत हैं वहीँ सरकार अकडू रवैय्या अपनाते हुए लगातार जनता के हित के विरुद्ध जाकर निर्णय ले रही है . सभी नाकामयाबियों और कमियों को कोरोना की आड़ में छिपाया जा रहा है. वरवर राव अँधेरे समय में चमकते हुए सूर्य की तरह रौशनी बिखेरने वाले कवि हैं . वे अत्यंत सम्मानित और बुजुर्ग कवि हैं . उनके स्वास्थ्य को देखते हुए सरकार को उनसे डरना नहीं चाहिए और जेल से रिहा करके उनका इलाज करना चाहिए . इसके साथ ही केशव शरण ने कुछ स्वरचित कवितायें भी सुनाईं .

भगत सिंह के छात्र मौर्चा के युवा साथी विनय ने कहा कि वरवर राव कवि ही नहीं हैं . यदि केवल कवि होते तो वे पूरी तरह सुरक्षित होते और लगातार कवितायें रचते रहते , उन्हें कोई खतरा नहीं होता, सरकार को दिक्कत है कि वे कवि ही नहीं बल्कि जनता के कवि हैं और सत्ता के खिलाफ कवितायें रचते हुए लगातार सार्वजनिक रूप से लोगों के बीच जाते रहे हैं. जेल में कोरोना पॉजिटिव आना एक तरह से उनकी मृत्यु के लिए ज़मीन तैयार करना है. हम सरकार के इस रवैय्ये का विरोध करते हुए उन्हें रिहा करने की मांग करते हैं.

सामाजिक कार्यकर्त्ता गोकुल दलित ने अपना विरोध ज़ाहिर करते हुए कहा कि कोरना के नाम पर जितने षड्यंत्र हो सकते हैं, सब किये जा रहे हैं. इस दौर में समाज में हो रहे अन्याय को लेकर हम निष्क्रिय हैं इसीलिए स्थितियां लगातार बिगड़ती और हाथ से निकलती जा रही है जिससे असामजिक तत्वों द्वारा गुंडागर्दी, हत्या,बलात्कार समाज का जरूरी हिस्सा बन जीवन के संतुलन को बिगाड़ दिया गया है. हमें सचेत होने की बेहद आवयश्यकता है.

सिद्धार्थ यादव ने अपनी बात रखते उए कहा यह एक अघोषित आपातकाल का समय है. यह एक ऐसा समय है कि कोरोना के नाम पर कोई भी षड्यंत्र किया जा सकता है और यह हमारे लिए और सारे समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है. मैं कॉमरेड वरवर राव की रिहाई और मल्टी स्पेशियलटी अस्पताल में इलाज कराये जाने की मांग करता हूँ .

रामजी यादव ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि इस सरकार ने क्रूरता और बर्बरता की हद पार कर अमानवीयता के चरम पर पहुँच चुकी है, जहाँ अभिव्यक्ति की आज़ादी को अपराध बनाया जा चुका है. संवेदनशीलता और न्यायप्रियता इस सत्ता के शब्दकोश से गयाब हो चुके हैं. इस देश में राजनीतिक लोकतंत्र की नैतिकता नहीं बची है . किसी भी देश की सरकार साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संस्कृतिकर्मियों को अपराधी तभी घोषित करती है जब वह स्वयं न केवल फासिस्ट होती है बल्कि फासीवादी ताकतों को पोसना शुरू कर देती है . और हमारे देश में पिछले सात वर्षों से यही हो रहा है. हम सब लोग जोरदार तरीके से कॉमरेड वरवर राव की रिहाई और इलाज के साथ ही सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग करते हैं .

अंत में हमारा मोर्चा के संपादक कामता प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापन किया.

प्रस्तुति – अपर्णा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here