मधुपुर विधानसभा उपचुनाव भाजपा—झामुमो की नाक का सवाल

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  • विशद कुमार

17 अप्रैल को होने वाला झारखंड में मधुपुर विधानसभा उपचुनाव में वैसे तो 6 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला दलीय आधार पर केवल दो ही उम्मीदवार झामुमो के हफीजुल अंसारी और भाजपा के गंगा नारायण सिंह के बीच है। क्योंकि बाकी 4 उम्मीदवार निर्दलीय हैं।
बताते चलें कि मधुपुर उपचुनाव के लिए 8 लोगों ने नामांकन किया था। संविक्षा में एक का नामांकन रद्द हो गया। जबकि एक निर्दलीय प्रत्याशी ने पहले ही नाम वापस ले लिया था। नाम वापसी के बाद अब छह उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

मधुपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव :

2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में मधुपुर सीट से झामुमो प्रत्याशी हाजी हुसैन अंसारी ने जीत दर्ज की थी। हेमंत सरकार में वे अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बने थे। कोरोना संक्रमित होने के बाद वे ठीक भी हो गए थे, लेकिन 3 अक्टूबर 2020 को उनकी मौत हो गयी। उसके बाद से यह सीट खाली है।

2019 के चुनाव में हाज़ी हुसैन अंसारी (जेएमएम) विजेता रहे। उन्हें 88,115 मत मिले थे। जबकि भाजपा के राज पालीवाल 65,046 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे। वे हाज़ी हुसैन अंसारी से 23,069 मतों से पीछे रह गए। वहीं आजसू पार्टी के गंगा नारायण राय 45,620 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। जबकि एआईएमआईएम के मो.इकबाल को 9,866 मतों से ही संतोष करना पड़ा।
मधुपुर विधानसभा का 2005 के बाद के चुनाव परिणाम को देखें तो हर चुनाव में बदलाव होता रहा है।
2005 में राज पालीवाल बीजेपी 48,756 मत पाकर विजेता रहे और दूसरे नंबर पर जेएमएम के हुसैन अंसारी 42,089 मत पाकर मात्र 6,667 मतों से पिछड़ गए।
2009 में हुसैन अंसारी जेएमएम के 47,880 मत पाकर विजेता रहे, जबकि जेवीएम के शिव दत्त शर्मा मात्र 27,412 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे।
2014 में पुन: बीजेपी के राज पालीवाल विजेता रहे। उन्हें 74,325 मत मिले, जबकि जेएमएम के हाजी हुसैन अंसारी को 67,441 मतों के साथ दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा।
इस उपचुनाव में भाजपा ने पार्टी के राज पालीवाल जो 2019 में दूसरे स्थान पर रहे थे, को टिकट न देकर आजसू पार्टी के गंगा नारायण राय को जो तीसरे स्थान पर रहे थे, को टिकट दिया है। जिसके कारण राज पालीवाल के समर्थकों का धड़ा अंदर ही अंदर पार्टी से नाराज है। वहीं आजसू पार्टी भी अपने नेता को खो देने से भीतर ही भीतर नाराज है, जिसका लाभ झामुमो को मिल सकने की संभावना है।

बता दें कि झामुमो ने उपचुनाव की तारीख के एलान से पहले ही हाजी हुसैन अंसारी के पुत्र हफीजुल अंसारी को मंत्री बनाकर अपनी मंशा साफ कर दी थी कि मधुपुर उपचुनाव में पार्टी हफीजुल अंसारी को ही मैदान में उतारेगी। बता दें कि बीते वर्ष अक्टूबर में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री और झामुमो विधायक हाजी हुसैन अंसारी के निधन से ये सीट खाली हो हुई है।

उल्लेखनीय है कि मधुपुर विधानसभा सीट पर पिछले दो दशक से झामुमो और भाजपा के बीच सीधी टक्कर होती आ रही है। इस बार भी दोनों के बीच कड़े मुकाबले की संभावना बनी हुई है।

1990 के बाद यहां नहीं जीती कांग्रेस, भाजपा-झामुमो में ही रहा मुकाबला

1990 के बाद से इस सीट पर कांग्रेस को कभी जीत नहीं मिली। 1995 में झामुमो के टिकट पर हाजी हुसैन अंसारी चुनाव लड़े और हैट्रिक लगा चुके कांग्रेस के कृष्णा नन्द झा को हरा दिया। 2000 में हाजी हुसैन अंसारी ने दूसरी बार जीत हासिल की। साल 2005 से राज पलिवाल और हाजी हुसैन अंसारी बारी-बारी से जीतते-हारते रहे हैं।

जहां मधुपुर उपचुनाव के मैदान में अब राज्य के मुखिया हेमंत सोरेन कूद पड़े हैं। वहीं भाजपा सारे दिग्गज मधुपुर में जमे हुए हैं।

मधुपुर विधानसभा क्षेत्र झारखंड के देवघर जिला तथा गोड्डा संसदीय क्षेत्र में आता है।  इस संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के निशिकांत दुबे सांसद हैं, उन्होंने झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के प्रदीप यादव को 2019 के लोक सभा चुनाव हराया था। ये तमाम नेता मधुपुर विधानसभा क्षेत्र में जमे हुए हैं। भाजपा का दावा है कि यह सीट पर उसकी ही जीत होगी और इस चुनाव के बाद झारखंड भाजपा की सरकार बनेगी। वैसे भाजपा ने बेरमो और दुमका उप चुनाव के समय ही सरकार बनाने का दावा किया था। लेकिन उसे सफलता नहीं मिली, अब देखना भाजपा के दावा में कितना दम है। दूसरी तरफ मधुपुर उपचुनाव को लेकर झामुमो की सक्रियाता बढ़ गई है। पार्टी के अन्य मोर्चा और प्रकोष्ठों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है।

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