पुलिसिया जुल्म के शिकार आदिवासी बंशी मांझी

0
364
  • विशद कुमार

बुडगड्डा मोड़ के पास पेंक थाना के पुलिस की चेकिंग द्वारा उन्हें पूछताछ के लिए रोका गया। पूछताछ के क्रम में उन्हें गालियां दी गईं, साला मांझी, बोका मांझी तथा आदिवासी जातिसूचक अपशब्दों के साथ मां—बहनों की गालियां दी गईं। जिसका विरोध करने पर वहां मौजूद एएसआई सुमन कुमार सिंह व अन्य पुलिसकर्मीयों द्वारा बंदूक के कुंदे से मुंह पर मारा गया, जिससे वे जमीन पर गिर गए।

झारखंड में हेमंत सरकार के एक साल हो गए। हेमंत सोरेन के सत्ता संभालने के बाद राज्य के आदिवासियों को सबसे अधिक खुशी इस बात की हुई थी कि अब उनका मुख्यमंत्री है, अब उनके साथ कोई गलत नहीं होगा। लेकिन उनकी यह खुशी कुछ ही दिनों में गायब हो गई। क्योंकि सत्ता बदलने के बाद भी पुलिस के चरित्र में कोई बदलाव नहीं आया है। पहले की तरह ही पुलिसिया जुल्म के शिकार आदिवासी होते रहे हैं।

पिछले 12 दिसंबर को बोकारो पुलिस का ऐसा ही चेहरा सामने आया है। बोकारो जिले के पेंक—नारायणपुर थाना की पुलिस ने एक 40 वर्षीय आदिवासी बंशी मांझी को इतनी पिटाई की वह बेहोशी की हालत में ही गिरते—पड़ते किसी तरह अपने घर पहुंच पाया।
घटना के बारे में पीड़ित का 19 वर्षीय राजू मांझी बताता है कि उसके पिता बंशी मांझी आईईएल (Indian Explosive Ltd.) गोमिया में बतौर दैनिक मजदूर कार्यरत हैं, वे रोज की तरह ड्यूटी से शाम को साइकिल से घर वापस लौट रहे थे कि रास्ते में बुडगड्डा मोड़ के पास पेंक—नारायणपुर थाना क्षेत्र की पुलिस ने उन्हें पुछताछ के लिए रोका। उन्होेंने पुलिस को बताया कि वे आईईएल में मजदूरी करते हैं और काम लौट रहे हैं। बावजूद पुलिस वालों ने उन्हें गाली दी और उनको इतना मारा कि वे लगभग बेहोश हो गए और किसी तरह गिरते—पड़ते घर आए। उन्हें खून से लथपथ देखकर हमलोग कुछ समझ नहीं पाए, वे कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थे, अत: घरवाले बिना कोई देरी किए नजदीकी अस्पताल आईईएल, गोमिया की ओर चल दिये।
गोमिया के अस्पताल में प्राथमिक उपचार के दौरान वहां के डॉक्टरों द्वारा बताया गया कि नाक की हड्डी तथा दांत टूट गए हैं तथा सिर में अंदरूनी चोट से नाजुक स्थिति बताकर वहां से तुरंत मुस्कान अस्पताल बोकारो के लिए रेफर कर दिया।

बताते चलें कि बोकारो जिले के पेंक—नारायणपुर थाना क्षेत्र के ग्राम धावैया के बंशी मांझी पिता स्व0 जीतन मांझी, आईईएल, गोमिया में दैनिक मजदूर हैं। उनका घर धावैया गोमिया से लगभग 20 किमी की दूरी पर है। वे रोज की तरह काम से छुट्टी के बाद 12 दिसंबर को शाम के करीब 5:30 बजे साइकिल से अपने लौट रहे थे कि बुडगड्डा मोड़ के पास पेंक थाना के पुलिस की चेकिंग द्वारा उन्हें पूछताछ के लिए रोका गया। पूछताछ के क्रम में उन्हें गालियां दी गईं, साला मांझी, बोका मांझी तथा आदिवासी जातिसूचक अपशब्दों के साथ मां—बहनों की गालियां दी गईं। जिसका विरोध करने पर वहां मौजूद एएसआई सुमन कुमार सिंह व अन्य पुलिसकर्मीयों द्वारा बंदूक के कुंदे से मुंह पर मारा गया, जिससे वे जमीन पर गिर गए। बंशी मांझी के जमीन पर गिरने के बाद कुंदों और बुटों से मारा गया। ‘भागो साले यहां से’ बोलते हुए बुटों से हमले किए गए।
उन्हें घायल कर लगभग अधमरा कर दिया गया। कुछ देर बाद जब बंशी को होश आया तब उसने पाया कि पुलिस वाले उन्हें छोड़कर जा चुके थे। होश आने के बाद किसी तरह वे घर पहुंचे तो पुन: बेहोश हो गये। खून से लथपथ देखकर घरवाले बिना किसी देरी के नजदिकी अस्पताल आईईएल गोमिया ले आए जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बोकारो के एक निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जहां इलाज के बाद 15 दिसंबर को अस्पताल से छुट्टी कर दी गई। मजे की बात तो यह रही कि पुलिस की दरिंदंगी पर स्थानीय एक दैनिक अखबार छोटी सी खबर डालकर अपने पत्रकारिता धर्म से मुक्त हो गया।
इस बीच गोमिया से बोकारो जाने के क्रम में पेंक—नारायण थाना के एएसआई सुमन कुमार सिंह व अन्य पुलिसकर्मीयों के द्वारा पीछा किया गया और धमकी दी गयी कि अगर हमारे खिलाफ शिकायत करोगे तो पूरे परिवार को मार देंगे। इतना ही नहीं बोकारो में भी मामले को रफा—दफा करने के लिए कई तरह से दबाव बनाये गये। इस बीच 13 दिसंबर को किसी ने मामले पर झारखंड पुलिस को ट्वीट कर दिया था, जिसके जवाब में बोकारो पुलिस को मामले की जांच के लिए झारखंड पुलिस मुख्यालय से ट्वीट आ गया। वहीं दूसरी तरफ पीड़ित परिवार ने पेंक—नारायण थाना के एएसआई सुमन कुमार सिंह व अन्य पुलिसकर्मीयों के खिलाफ बोकारो एसपी और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति थाना, सेक्टर 4, बोकारो में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत पत्र में बंशी मांझी के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि विगत 2—3 माह पूर्व बंशी मांझी और ग्राम पेंक के इंतियाज अंसारी के बीच जमीन विवाद में एक समझौते के दौरान एएसआई सुमन कुमार सिंह ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी थी। अत: हमें और हमारे परिवार को सुरक्षा मुहैया कराया जाए तथा दोषियों के विरूद्ध त्वरित कानूनी कार्यवाई कर हमें न्याय दिलाया जाए।
बता दें इस तरह पुलिसिया जुल्म की बारदात पहली बार नहीं है। पिछले 28 नवंबर को दुमका के एक आदिवासी दिव्यांग छात्र को थानेदार रवि शंकर सिंह ने चार दिनों तक बिना किसी ठोस वजह के थाने में रखा और उसकी पिटाई की। जब इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और संताल प्रक्षेत्र के डीआइजी से की गई और न्याय की मांग की गई और दिव्यांग छात्र जोसेफ सोरेन के लिए न्याय की मांग में दुमका के छात्र संगठन भी उतर आए, तब डीआइजी सुदर्शन प्रसाद मंडल ने कहा है कि मामले की शिकायत मिली है और इसकी जांच करवा कर संबंधित थाना प्रभारी रविशंकर सिंह पर कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि जोसेफ सोरेन 70 प्रतिशत तक दिव्यांग है और पाकुड़ जिले के पाकुड़िया प्रखंड के गोलपुर गांव का रहने वाला है, वह दुमका में एसपी काॅलेज में भौतिकी स्नातक का छात्र है।

उक्त घटना के कुछ महीने पहले झारखंड के साहिबगंज जिले के बरहेट थाने में थानेदार द्वारा एक युवती की पिटाई करने व उन्हें गंदी गालियां देने का वीडियो सामने आया था। उस मामले ने भी काफी तूल पकड़ा था, जिसके बाद मुख्यमंत्री के आदेश पर डीजीपी ने थानेदार को सस्पेंड कर दिया था और जांच का आदेश दिया था।

वहीं 20 मार्च को खूंटी जिले में एक निर्दाेष आदिवासी युवक रोशन होरो को सीआरपीएफ ने पकड़ कर उग्रवादी बताते हुए गोली मार दी थी। यह घटना रांची से सटे खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड क्षेत्र में घटित हुई थी। इस मामले का खुलासा सीआइडी एडीजी द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट की समीक्षा के बाद हुआ है। उक्त युवक को पीछे से गोली मारी गई है। होरो की मौत पर पुलिस ने भी माना था कि सुरक्षा कर्मियों से गलती हुई है और पुलिस ने मानवीय आधार पर युवक के परिजनों से माफी मांगी थी।
अब देखना है कि बंशी मांझी के मामले क्या होता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here