नए वर्ष पर याद किये गये खरसावां गोली कांड के शहीद

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  • विशद कुमार
बोकारो के सेक्टर-12 स्थित बिरसा बासा में जनाधिकार मंच एवं आदिवासी हो समाज बोकारो के तत्वावधान में खरसावां गोली कांड के शहीदों को श्रद्धांजली दी गई। समारोह की अध्यक्षता आकाश टुडू व संचालन झरीलाल पात्रा ने की। श्रद्धांजलि समारोह में आदिवासी हो समुदाय के लोगों ने शहीदों की स्मारक की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर याद किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि एक जनवरी के दिन ही खरसावां हाट में 50 हजार से अधिक आदिवासियों की भीड़ पर ओड़िशा मिलिटरी पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग की थी। जिसमें 25 से 30 हजार लोग शहीद हुए थे। इस सभा स्थल में संविधान सभा के सदस्य जयपाल सिंह मुंडा स्वतंत्रता अधिनियम के तहत आदिवासी क्षेत्रों के करार की जानकारी देने पहुंचने वाले ही थे। लेकिन पुलिस ने भीड़ को घेर कर बिना कोई चेतावनी दिए निहत्थे लोगों पर गोलियां चलानी शुरु कर दी। वक्ताओं ने आगे बताया कि खरसावां के इस ऐतिहासिक मैदान में एक कुआं था, भागने का कोई रास्ता भी नहीं था। कुछ लोग जान बचाने के लिए मैदान में मौजूद एकमात्र कुएं में कूद गए, पर देखते ही देखते वह कुआं भी लाशों से पट गया।
खरसावां हाट में 50 हजार से अधिक आदिवासियों की भीड़ पर ओड़िशा मिलिटरी पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग की थी। जिसमें 25 से 30 हजार लोग शहीद हुए थे। इस सभा स्थल में संविधान सभा के सदस्य जयपाल सिंह मुंडा स्वतंत्रता अधिनियम के तहत आदिवासी क्षेत्रों के करार की जानकारी देने पहुंचने वाले ही थे। लेकिन पुलिस ने भीड़ को घेर कर बिना कोई चेतावनी दिए निहत्थे लोगों पर गोलियां चलानी शुरु कर दी।
आदिवासी समुदाय के लोग खरसावां को ओड़िशा में विलय किये जाने का विरोध कर रहे थे और खरसावां को बिहार में शामिल करने की मांग कर रहे थे। जनाधिकार मंच के संयोजक मंडल के सदस्य राजकुमार गोरांई ने कहा कि आजाद भारत का यह सबसे बड़ा गोलीकांड माना जाता है। गोलीकांड के बाद जिन लाशों को उनके परिजन लेने नहीं आये, उन लाशों को कई कुओं में डाला गया और कुओं का मुंह बंद कर दिया गया। जहां पर शहीद स्मारक बनाया गया हैं। इसलिए कोल्हान के आदिवासी समुदाय एक जनवरी को काला दिवस के रूप में मानता है।

कोल्हान के आदिवासी एक जनवरी को मनाते हैं काला दिवस

इस दौरान शहीदों की याद में नारा लगाया गया। कार्यक्रम खरसवां गोली कांड व कोल्हान सहित झारखंड के वीर शहीद अमर रहे, अमर रहे, पोटो हो, केरसा हो, पंडुवा हो, नाराह हो, बोड़ो हो ज़ोरोंग जीत, ज़ोरोंग जीत, ज़ोरोंग जीत। कोचे हो, जोंकों हो, बोरजो हो, रितुई-गुनडुई हो अमर रहे, अमर रहे। वीर बिरसा, सिद्दू-कानू, जयपाल सिंह मुंडा का जय-जयकार करते हुए पुरखों की लड़ाई को सदैव जिंदा रखने का आह्वान किया।श्रद्धांजलि समारोह को रेंगो बिरुवा, कंडे सवैयाँ, फुलजेन्स एक्का आदि ने संबोधित किया।
मौके पर मास्टर मुंडा, रवि मुंडा, पदमा देवी, अंजू बोदरा, नानिका पुर्ती, रानी गोडसोरा, सोनाराम गोडसोरा सहित अन्य मौजूद थे।

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