राज्य की दमनकारी मशीनरी और घटती दिहाड़ी के अंतर-संबंधों पर डाली रोशनी

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पटनाः जनतांत्रिक एवं क्रांतिकारी संगठनों के साझा मंच जन अभियान , बिहार के बैनर तले आज 11 दिसम्बर ,2022 को पटना के आईएमए सभागार में ‘बढ़ते आर्थिक संकट व राजकीय दमन से जूझती जनता और जनप्रतिरोध’ विषय पर एक कन्वेंशन का आयोजन किया गया। साढ़े ग्यारह बजे दिन से 4 बजे शाम तक चले इस कन्वेंशन में 300 प्रतिनिधियों की भागीदारी हुई। इसमें जन अभियान, बिहार के घटक संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावे अन्य जनवादी , प्रगतिशील एवं वामपंथी संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। शुरुआत में जन अभियान, बिहार के संयोजक सतीश कुमार ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया, विषय के महत्व पर प्रकाश डाला और कन्वेंशन के संचालन के लिए अध्यक्ष मंडल का प्रस्ताव किया। कन्वेंशन का संचालन चार सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने किया जिसमें सीपीआई (एमएल) के नन्द किशोर सिंह , एमसीपीआई(यू) के विजय कुमार चौधरी , जनवादी लोक मंच के पुकार और जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी के मणिलाल शरीक थे। जन अभियान , बिहार की ओर से तैयार किये गये प्रपत्र को कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया के साथी पार्थ सरकार ने प्रस्तुत किया। इसके बाद एक एक करके सभी घटक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपना वक्तव्य दिया। कन्वेंशन को सम्बोधित करने वाले प्रमुख नेताओं में सर्वहारा जन मोर्चा के अजय सिन्हा, सीपीआई (एमएल) के अशोक बैठा , जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी के मणिलाल , नागरिक अधिकार रक्षा मंच के संजय श्याम , जनवादी लोक मंच के बलदेव झा , कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया के रूद्र , एमसीपीआई (यू) के प्रमोद कुमार , सीपीआई (एमएल) न्यू डेमोक्रेसी के रामचन्द्र सिंह उल्लेखनीय हैं। तमाम वक्ताओं ने कन्वेंशन में पेश किये गये प्रपत्र में उल्लिखित तथ्यों एवं विश्लेषण का समर्थन किया । बढ़ते आर्थिक संकट जनित महंगाई एवं बेरोजगारी से तंग तबाह हो रही जनता की दुर्दशा और राज्य की दमनकारी मशीनरी के जनविरोधी कारनामों पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला और उसके खिलाफ आम जनता को संगठित कर जनप्रतिरोध खड़ा करने की महती आवश्यकता को रेखांकित किया। कन्वेंशन में मॉब लिंचिंग , हिन्दुत्व गुंडावाहिनी से लेकर गोदी मीडिया के एंकरों तथा राज्य के खुले दमन तक की विस्तार से चर्चा हुई। मजदूरों , किसानों , अन्य मेहनतकश वर्गों , दबे कुचले समुदाय के लोगों , खासकर दलितों , आदिवासियों , धार्मिक अल्पसंख्यकों एवं महिलाओं पर ढाये जा रहे शोषण-उत्पीड़न एवं जुल्म अत्याचार के विभिन्न आयामों पर कन्वेंशन में खुल कर चर्चा हुई। केन्द्र की सत्ता में आसीन फासिस्ट मनोमिजाज वाली घोर दक्षिणपंथी , प्रतिगामी , साम्प्रदायिक एवं अंधराष्ट्रवादी भाजपा सरकार की बड़े पूंजीपतियों एवं भूस्वामियों के हितों में ली जा रही साम्राज्यपरस्त जनविरोधी आर्थिक नीतियों के खिलाफ सशक्त जन आंदोलन खड़ा करने का संकल्प कन्वेंशन में लिया गया।
आलेख में यह कहा गया है कि दमनकारी और कॉरपोरेट पक्षीय कानूनों जैसे मजदूर विरोधी लेबरकोड से लेकर जनविरोधी व पर्यावरण विरोधी कानूनों को पारित कर सरकार जनता के विभिन्न वर्गों एवं तबकों को अधिकार विहीन करने का काम कर रही है। जनता के विरोध को कुचलने के लिए फासीवादी ताकतें दम लगा रही है। ऐसी स्थिति में हम न्याय के तमाम स्वर को साथ लेकर चलें ताकि जनता को बांटने में , नफरत फैलाकर अपनी रोटी सेंकने में फासीवादी ताकतें असफल रहें।
कन्वेंशन में अपने विचारों को व्यक्त करने वाले अन्य वक्ताओं में तलाश पत्रिका की सम्पादक मीरा दत्त, कम्युनिस्ट चेतना केन्द्र के रास बिहारी चौधरी , मजदूर बिगुल दस्ता के आकाश , सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद गोपाल कृष्ण , मोमिन फ्रंट के महबूब आलम अंसारी, पूर्व विधायक रविन्द्र सिंह , एनएपीएम के उदयन राय तथा समता सद्भाव दल के नेता चक्रवर्ती अशोक प्रियदर्शी , आदि शामिल थे।

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