खबर का असरः बंधक बने मजदूरों को लाने अंडमान निकोबार जा रहा प्लेन

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विशद कुमार    


झारखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों रांची, गुमला, खूंटी, सरायकेला वगैरह जिलों के लगभग 150 मजदूर अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के पोर्टब्लेयर में एक बिल्डर मेसर्स — सुरेंद्र इंफ्रा. प्रा.लि. कंपनी के यहां काम कर रहे थे। लॉकडाउन के बाद काम बंद हो गया और मजदूरों के खाने के लाले पड़ने लगे। इस खबर की जानकारी रांची के लापुंग प्रखंड निवासी झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ओबीसी के प्रदेश महासचिव शंकर कुमार साहु ने 2 जून को हमें दी थी। इस खबर को प्राथमिकता से प्रकाशित किया गया। वहीं शंकर कुमार साहु ने इस मामले को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर उरांव और रांची के उपायुक्त से व्हाट्सप संदेश के माध्यम से बंधक बनाए गए मजदूरों की मदद की गुहार लगाते हुए उन्हें  झारखंड लाने की मांग की थी और मजदूरों को तत्काल भोजन की व्यवस्था किए जाने की भी गुहार लगाई थी। उन्होंने बंधक बने मजदूरों के नामों की सूची भी दी थी।
इस खबर ने अपना रंग दिखलाई और आज यानी 3 जून को झारखंड सरकार ने घोषणा कर दी कि 4 जून यानी कल अंडमान निकोबार द्वीपसमूह हवाई जहाज भेज कर मजदूरों को लाया जाएगा। बता दें कि सुरेंद्र इंफ्रा. प्रा.लि. कंपनी 49 मजदूर काम कर रहे थे। जिनमें से 40 मजदूरों पहली खेप में लाया जाएगा। बाकी 9 मजदूरों को दूसरी खेप में अन्य मजदूरों के साथ लाया जाएगा। वैसे अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में विभिन्न कंपनियों में लगभग 150 झारखंड के मजदूर काम कर रहे थे। जिन्हें अब धीरे धीरे लाया जएगा।
कहना ना होगा कि इस करोना संक्रमण के बहाने किए गए लॉक डाउन में अगर किसी की दुर्दशा हुई है तो वह केवल मजदूरों की हुई है। पूरा देश गवाह है कि किस तरह देश के मजदूरों में अफरा तफरी का माहौल बना और कइयों की मौत इस अफरा तफरी में हुई। कोई सैकड़ों किमी. पैदल चलते हुए भूखे—प्यासे मरा, तो कोई सैकड़ों किमी. साईकिल से अपनों से मिलने की ललक लिए चल तो पड़ा, मगर रास्तें में ही दम तोड़ता गया, कई लोग थका हारा रेल की पटरी को ही बिछावन समझ कर सो गये और मौत का निवाला बन गए। बावजूद जो लोग धैर्य के साथ जहां थे वहीं जमे रहे, तो उन्हें कंपनी के मालिकों का कोप भाजन बनना पड़ा है। एक तो कंपनी के मालिकों द्वारा उन्हें खाने व रहने की व्यवस्था के लिए भी पैसे नहीं दिए गए, वहीं जब ये प्रवासी मजदूर अपने घर वालों, रिश्तेदारों, दोस्तों से पैसा मंगवाकर घर लौटने की कोशिश करने लगे तो कंपनी के मालिकों द्वारा उन्हें रोक दिया गया, एक तरह से उन्हें बंधक बनाया गया। इसके कई उदाहरण मौजूद हैं। इसी कड़ी में अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के पोर्टब्लेयर के मेसर्स — सुरेंद्र इंफ्रा. प्रा.लि. कंपनी के बिल्डर सुभाष सुरेन्द्र ने झारखंड के दर्जनों मजदूरों को बंधक बनाकर रखा था, मजदूरों को झारखंड आने नहीं दिया जा रहा था।
मामले पर सरकार द्वारा लिए संज्ञान पर शंकर कुमार साहु ने आभार व्यक्त करते हुए बताया है ”कल दोपहर 02:30  बजे अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में बंधक हुए 40 प्रवासी मजदूर, अंडमान से रांची , हवाई जहाज के माध्यम से पहुंच जायेंगे। सभी मजदूर काफी खुश हैं । ये पहली बार हवाई जहाज से यात्रा करेंगे , सभी ने हेमन्त सोरेन मुख्यमंत्री झारखंड और सरकार को धन्यवाद दिया है।” उन्होने कहा कि ”हमारा प्रयास प्रयास सफल रहा। इस बंधक मजदूरों को झारखंड लाने की मुहिम में हिना मैम नई दिल्ली, मानस सिन्हा झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डाक्टर राजेश गुप्ता, लगातार डटे रहे, अभी भी 7 मजदूर  हवाई जहाज में सीटों के अभाव में रह गये जो अगली बार आयेंगे।”
10 मई से ही तेलंगाना के हैदराबाद स्थित बांस पल्ली में झारखंड के ही लातेहार व पलामू जिला के दर्जनों प्रवासी मजदूर बंधक बनाकर रखा गया है। जहां से पिछले दिन इन प्रवासी मजदूरों में अभय मिंज व चंदन बड़ाईक सहित एक अन्य मजदूर भाग कर घर आया है। इन्हीं मजदूरों के क्षेत्र का लेबर सप्लायर संदीप खलखो ने ही इन्हें बंधक बनाया है।
दूसरी तरफ झारखंड के पलामू जिला के लगभग दो दर्जन मजदूर राजस्थान के अलवर जिला के निमराना में बंधक बने हुए हैं। ये लोग निमराना स्थित एचएमवी गरिमा कंपनी में काम करते हैं। इन्हें इनके ही क्षेत्र का एक ठेकेदार (लेबर सप्लायर) गुड्डु राम ने कंपनी में काम दिलवाया था और इन्हें आने नहीं दे रहा है।

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