हिमांशु-रूपेश के मुद्दे पर राजकीय दमन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन

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आज दिनांक 19 जुलाई 2022 को बनारस के तमाम संगठनों ने स्वतंत्र पत्रकार रूपेश कुमार सिंह और हिमांशु कुमार व तमाम राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर राजकीय दमन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के शुरुआत में ही मौजूद लोगों और पुलिस के बीच तीखी नोंक झोंक हुई। जिसके कारण कार्यक्रम अपने नियत समय से कुछ समय बाद ही सुचारू रूप चल पाया। इस कार्यक्रम में PS4 प्रमुख डॉक्टर छेदीलाल निराला ने अपनी रखते हुए कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ होते हैं, लोकतंत्र में लोक की पत्रकार ही सामने रखते हैं लेकिन आज रूपेश कुमार जैसे तमाम जनपक्षधर पत्रकारों के साथ ज्यादती हो रही। उन्हें कई हतकण्डो के माध्यम से फंसाया जा रहा ताकि कॉरपोरेट और सरकार की मिलीभगत सामने न आ पाए। समाजवादी जनपरिषद से अफलातून ने कहा कि एक तरफ मोदी सरकार आदिवासियों पर जुल्म ढा रही और दूसरी तरफ आदिवासियों को लुभाने के लिए द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति के चुनाव में खड़ा कर रही है। यही द्रौपदी मुर्मू ने झारखंड की राज्यपाल रहते हुए कभी भी आदिवासियों पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ एक चूं तक नहीं की। मोदी सरकार ने झारखंड के ही एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी की भी हत्या कर दी। क्रूरता की हद यह है कि महीनों तक उन्हें पानी पीने वाला स्ट्रॉ तक नहीं दी गया। रजनीश भारती ने पुलिसिया दमन को चिन्हित करते हुए कहा कि जब भी आप सरकार के नीतियों का विरोध करेंगे तब सरकार पुलिस को आगे कर देती है। एक तरफ हम मेहनतकश लोग है दूसरी तरफ पुलिस जो स्वयं मजदूर- किसान परिवार से आते है। दोनों को आपस में लड़ाकर सरकार और कॉरपोरेट जनता को लूटते रहते है। कृपा वर्मा ने सोलिडेरिटी देते हुए अपनी बातचीत में कहा कि आज के दौर में कानून, संविधान सबका गला घोंटा जा रहा। संसद में बैठकर तमाम अपराधी जनता को लूटने का कानून बना रहे है। आज भारत की परिस्थिति श्रीलंका जैसी है। किसी भी तानाशाह का सिक्का ज्यादा दिन नही चलता है। ठीक हिटलर और मुसोलिनी की तरह इस सरकार को भी उखाड़ कर फेंका जाएगा। या फिर उनकी हालत श्रीलंका जैसी कर दी जाएगी और उन्हें अपनी जान बचाकर भागना पड़ा जाएगा। भगतसिंह छात्र मोर्चा से मानव उमेश ने अमीर अज़ीम की ‘सब याद रखा जाएगा’ कविता के माध्यम से अपनी बातचीत में कहा कि आज जो भी सरकार के खिलाफ बोल रहे है उन्हें दबाया जा रहा। चाहे हिमांशु कुमार हो, तीस्ता सीतलवाड़ हो, स्टेन स्वामी हो या भीमा कोरेगांव के तमाम राजनैतिक बंदी हो। हम जब भी प्रोटेस्ट करते है तो भारी संख्या में पुलिस हमें रोकने के लिए जुट जाती है। आखिर हमारे बोलने से, हमारे लिखने से या हमारे पढ़ने इन्हें क्या दिक्कत है? साफ समझ आता कि यह शोषक वर्ग चाहता है कि उनके जुल्म तो होते रहे लेकिन उसे बोलने वाला कोई न हो। इन गिरफ्तारियों के माध्यम से सरकार हर बोलने वाले को डराना चाहती है लेकिन हम इनसे डरने वाले नहीं है। इसके बाद शहजादे जी ने कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए अपनी बातचीत में कहा कि जब- जब सरकार द्वारा जनता का दमन हुआ है तब तब जनता ने ईंट का जवाब पत्थर से देते हुए उसी सरकार को उखाड़ फेंका है। संविधान के माध्यम से हर एक नागरिक को मौलिक अधिकार दिया गया है लेकिन वास्तव में कोई अधिकार लागू नहीं होता। आज हर एक वर्ग चाहे मजदूर हो, किसान हो सभी इसी दमन का शिकार है। भगतसिंह छात्र मोर्चा से इप्शिता ने हिमांशु कुमार और रूपेश कुमार पर दमन का कारण बताते हुए कहा कि बस्तर में हिमांश कुमार ने CRPF, पुलिस और तमाम मशीनरी पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर किया कि वहां तमाम निर्दोष आदिवासियों को फर्जी एनकाउंटर के नाम पर मारा जा रहा। सोनी सोरी जैसी तमाम महिलाओं के साथ जघन्य बलात्कार किया जा रहा। लेकिन जब रूपेश कुमार और हिमांशु कुमार जैसे तमाम लोग इसके खिलाफ आवाज़ उठाते है तो पूरी व्यवस्था का असली भयानक चेहरा सामने आ जाता है। रूपेश कुमार झारखंड समेत तमाम आदिवासी इलाके में कॉरपोरेट दमन के खिलाफ मुखर रूप से लिख रहे थे इसलिए उन्हें 3 साल के अंदर दूसरी बार गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। आदिवासी लूट-खसोट की व्यवस्था से तंग आकर एक नई व्यवस्था की बात कर रहे, इस शासन-प्रशासन से तमाम तरीकों से लड़ रहे इसलिए उन्हें कुचला जा रहा। हमें भी एक नई व्यवस्था को गढ़ना होगा, इसके लिए संघर्ष करना होगा और जल-जंगल- जमीन को बचाना होगा।

कार्यक्रम में भगतसिंह छात्र मोर्चा के साथियों के तरफ से ‘गॉंव छोड़ब नाही जंगल छोड़ब नाही’ गीत प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में PS4, BCM, कम्युनिस्ट फ्रंट, सिटिजन फ़ॉर पीस, प्रलेस, PUCL, CYSS संगठन मौजूद रहे। इसके अलावा वी के सिंह, अनिल, मनीष शर्मा, शहजादी, आकांक्षा, अनुपम, विनय, संदीप, गणेश, अमर बहादुर, ब्रम्हनारायण, शशिकांत, कुलदीप तिवारी आदि मौजूद रहे। इस कार्यक्रम का संचालन अनुपम ने किया।
इस विरोध प्रदर्शन में गहरपुर, पुआरीकलां के रहने वाले और असंगठित कामकार यूनियन के एक्टिविस्ट वीरेंद्र राजभर ने भी विशेष रूप से हिस्सा लिया। 

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