काशी के लेनिन ने मुसहरों में बाँटीं उन्नत नस्ल की बकरियाँ

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समग्र पुनर्वास एवं आर्थिक सशक्तिकरण के मद्देनजर अनेई ग्राम में 27 मुसहर महिलाओं को संस्था द्वारा बकरी पालन के लिए बकरी दी गई…..

वाराणसी,

जनमित्र न्यास/मानवाधिकार जननिगरानी समिति द्वारा इंटरनेशनल रिहैबिलिटेशन काउंसिल फॉर टार्चर विक्टिम (IRCT), के आर्थिक सहयोग से बडागांव ब्लाक के अनेई ग्राम के 27 मुसहर महिलाओं को ब्लैक बंगाल उन्नत नस्ल की बकरी बकरी पालन हेतु उपलब्ध कराया गया है | जिसके पुर्व बकरी पालकों का प्रशिक्षण अग्रिकाश एवं रमेदार बकरी फार्म संस्था द्वारा कराया गया जंहा 27 महिला बकरी पालकों का विशेषज्ञों द्वारा बकरी पालन का तकनीकी एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिलवाया गया |

आजीविका को समृध एवं आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से मुसहर परिवारों की महिलाओं को बकरी पालन से जोड़ने की योजना है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर होकर अपने बच्चों का पालन पोषण के साथ उनके भविष्य का निर्माण कर सकें |

जैसाकि हम जानतें हैं कि, मुसहर समुदाय अतिवंचित श्रेणी से सम्बध अशिक्षित आर्थिक रूप से कमजोर रहा है जिसके कारण मानव विकास सूचकांकों में बहुत ही निचले पायदान पर आता है | यह समुदाय ईट भठ्ठों और सूअर पालन से अपनी आजीविका चलाकर किसी तरह गुजर बसर करता है | विशेषज्ञों का मत है कि, जिन स्थानों पर सूअर पालन होता है उस स्थान का पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है जिसके कारण उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गम्भीर बिमारियों का शिकार होतें हैं जबकि जिस स्थान पर बकरी का पालन होता है वंहा का पर्यावरण स्वस्थ एवं स्वच्छ बन जाता है जिसका प्रभाव मानव के स्वास्थ्य पर अच्छा रहता है |

इस अवसर पर संस्था के निदेशक डा. लेनिन रघुवंशी ने कहाकि, मुसहर समुदाय समाज कि मुख्यधारा से हाशिए पर जीवन जीने को बाध्य है इनके बेहतरी के लिए जिनको मानव विकास सूचकाकों के नजरिए से बढ़ाने के लिए विशेष पहल और कार्यक्रम संचालन कि जरूरत है |

संस्था कि मैनेजिंग ट्रस्टी श्रुति नागवंशी संस्था पिछले 30 वर्षो से वंचित समुदाय के बीच स्थानीय स्वशासन, शासन एवं प्रशासन के साथ मिलकर उनके सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान एवं जीवन कौशल विकास में दक्षता लाने के लिए कार्य कर रही हैं । संस्था वृहद स्तर पर न सिर्फ उनके अधिकारों की पैरवी कर रही है बल्कि, उनके जीवन स्तर को समृध करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम एवं गतिविधियां संचालित करती है । मुसहर समुदाय के पास अगर बकरी है तो निश्चित ही छः माह की आयु से पूरक आहार के साथ बकरी का दूध बच्चो के पोषण को बढ़ावा देगा जिससे बच्चो के कुपोषण को कम किया जा सकता है | संस्था की मैनेजमेंट टीम के सदस्य शिरीन शबाना खान ने कहाकि, समुदाय के बीच दृष्टिकोण को समृध करने के लिए विभिन्न लोक विद्यालयों का आयोजन करके उनके ज्ञान व्यवहार अभ्यास में सतत विकास के लिए प्रयासरत रहती है जिससे जुड़कर स्थाई विकास कर सकें | अग्रिकाश और रामेदार बकरी फ़ार्म के रोहित सिंह ने कहा कि बकरी पालन भी एक कौशल है इस कौशल को जो शिख लेगा उसके लिए एक रोजगार मिल जाएगा | बकरी पालन के व्यवसाय में शुरुआती लागत कम होती है और इनके आवास व प्रबंधन पर भी कम खर्च आता है. बकरी पालको को आने वाले समय में किसी भी तरह के आर्थिक संकट से मुक्ति मिलेगी | इसके साथ बकरी का दूध का सेवन करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है जिससे आपकी इम्यूनिटी बढ़ती है और बीमार होने का खतरा कम होता है ब्लड में प्लेटलेट काउंट को बढ़ाने में बकरी का दूध काफी सहायता करता है |

इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्री प्रवीण सिंह ग्राम प्रधान अनेई, श्री दीपनारायन सिंह उर्फ़ दीपक सिंह ब्लाक प्रमुख बड़ागांव BDO, CDPO, MOIC, MO (पशु) ABSA बड़ागांव संस्था की तरफ से मंगला प्रसाद छाया कुमारी ज्योति प्रीतिम आदि उपस्थिति रहे | कार्यक्रम का संचालन आनन्द निषाद ने किया और धन्यवाद ज्ञापन संस्था की मैनेजमेंट टीम के सदस्य शिरीन शबाना खान ने किया |

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