कोरोना के कहर के बीच घर वापस लौट रहे प्रवासियो की मदद कर रहे ये युवा

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वाराणसी: रोहनियां/राजातालाब के युवाओ के जज्बे को सलाम, कोरोना संक्रमण की वजह से 24 मार्च को लॉक डाउन की घोषणा कर दी गई। उससे पहले 22 मार्च को सांकेतिक एक दिवसीय लॉक डाउन था। उस दिन से ही मनरेगा मजदूर यूनियन और आशा ट्रष्ट से जुड़े ये युवा बेसहारों व प्रवासियों को भोजन सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराने में जुटा हुआ है।

आराजी लाइन के युवाओं में सामुदायिक सेवा भावना के जो संस्कार उनको पीढ़ी दर पीढ़ी मिलते आए हैं वह संकटकारी समय में अवश्य परिलक्षित होते हैं। इस विपदा के समय में युवा एकजुट हो जाते हैं और उनकी एकजुटता सिर्फ और सिर्फ मानव कल्याण के लिए होती है। अकाल, बाढ़ और चक्रवाती तूफान, बेमौसम बारिश के रूप में आई प्राकृतिक आपदा रही हो या फिर पूरे विश्व को अंधकार में डुबोने वाला कोरोना वायरस का संक्रमण हो। इन विपरीत परिस्थितियों में मदद के लिए उठने वाले हाथों में इन युवाओं के हाथ अवश्य होते हैं।
मौजूदा कोरोना संक्रमण की वजह से 24 मार्च को लॉक डाउन की घोषणा कर दी गई। उससे पहले 22 मार्च को सांकेतिक एक दिवसीय लॉक डाउन था। उस दिन से ही ये युवा बेसहारों व प्रवासियों को भोजन सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराने में जुट गया। यह कार्य निजी और सामूहिक दोनों रूप से हो रहा है। भोजन, नाश्ता, मजदूरो, ग्रामीणों को मास्क, साबुन घर वापस लौट रहे प्रवासियों को सूखे मेवे, बिस्कुट पैकेट व पानी वितरण के अलावा वंचित समुदाय की भी सेवा की जा रही है।
इसी क्रम में विगत दो दिनों से रखौना, मोहनसराय वायां राजातालाब राष्ट्रीय राजमार्ग पर अन्य राज्यों, शहरों से लौट रहे प्रवासियो को आशा ट्रष्ट और मनरेगा मजदूर यूनियन की ओर से मजदूरों को खाना और नाश्ता खिलाया जा रहा है। इसमें यहां के युवाओं ने पूरी मदद की। उक्त सेवा कार्य में मनरेगा मजदूर यूनियन के संयोजक सुरेश राठौड़, सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता, मनोज, रेनू, महेंद्र, श्रद्धा, प्रियंका, मुश्तफा एवं अन्य कार्यकर्ता जुड़े हुए हैं।

रिपोर्ट राजकुमार गुप्ता वाराणसी

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