अमर पंकज की गज़ल

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(डाॅ अमर नाथ झा)
दिल्ली विश्वविद्यालय
मोबाइल–9871603621
मौत से कम कुछ नहीं हैवानियत की है सज़ा
देवि कर दे वध असुर का बेटियों को ले बचा
मान मर्दन रक्तबीजों का करो तुम आज फिर
नारियाँ अबला नहीं दुर्गा हैं सबको दो बता
छल ही जिनका बल है केवल आततायी दैत्य हैं
खड्ग काली पान कर उनका रुधिर उनको मिटा
भूल की हमने असुर को भी मनुज सम मानकर
कर नहीं सकता असुर धर्माचरण था क्या पता
मत ‘अमर’ पीछे तू हट करना तुझे है अरि दमन
बन शिवा संहार कर कर नव सृजन नव सृष्टि का

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