तुम्हारे प्रेम में मैंने हज़ारों माफ़ीनामे लिख रक्खे हैं

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तुम्हारे प्रेम में मैंने हज़ारों माफ़ीनामे लिख रक्खे हैं
फिर भी माफ़ी वीर तो केवल एक ही है
सेल्युलर वाले
माफ़ करना मुझे, ओ प्रेयसी
वो माफ़ी वीर का खिताब मैं नहीं जीत पाया
अजल से अबद तक
केवल और एक मात्र माफ़ी वीर वही रहने वाला है
जिसे पागल, अपना खुदा घोषित कर चुके हैं।
– अतहर
युवा कवि

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