श्रम कानूनों को तीन साल तक स्थगित करने का योगी सरकार का अध्यादेश अलोकतांत्रिक : माले

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लखनऊ, 8 मई। भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने श्रम कानूनों को तीन साल तक स्थगित करने वाले योगी सरकार के अध्यादेश को अलोकतांत्रिक बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इसे वापस लेने की मांग करते हुए कहा है कि महामारी के इस दौर में भी संघ व भाजपा साम्प्रदायिकता का वायरस फैलाने से लेकर कारपोरेट की सेवा करने और श्रमिक-विरोधी फैसले थोपने से बाज नहीं आ रही है।

गुरुवार को जारी बयान में पार्टी ने कहा कि कड़े संघर्षों से हासिल मजदूरों के अधिकारों पर चोट करने वाले इस अध्यादेश का औचित्य ठहराने के लिए सरकार द्वारा दयावान होने का नाटक किया गया है। मसलन, कहा गया है कि कोरोना संकट के चलते गृह राज्य लौट रहे प्रवासी मजदूरों को स्थानीय स्तरों पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए श्रम कानूनों को स्थगित करने की जरूरत है। यानी मजदूरों पर फायर करने के लिए उन्हें ही धोखे की टट्टी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि मकसद पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाना है। इस अध्यादेश के लागू होने पर उद्योगपतियों को श्रमिकों के शोषण की खुली छूट मिल जाएगी।

इसी तरह से भाजपा शासित राज्य कर्नाटक में भी प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य ले जाने के लिए खड़ी श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को बुधवार को बिल्डरों और कारपोरेट के इशारे पर अचानक से रदद् कर घरवापसी की इच्छा रखने वाले श्रमिकों को बंधुआ मजदूर की श्रेणी में ला खड़ा कर दिया गया है। यही नहीं, कई राज्यों में श्रमिकों से आठ के बजाय 12 घंटे रोजाना काम लेने के लिए कानून में बदलाव करने की कवायद की जा रही है।

बयान में पार्टी ने कहा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों समेत उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारियों के वेतन-भत्तों में कोरोना संकट की आड़ में पहले ही कटौती की गई है। जबकि इसी संकट में कारपोरेट के 68 हजार करोड़ रुपये के बैंक कर्जों की माफी दी गई है। प्रवासी श्रमिकों के पास 40 दिन से ऊपर हो चुके लॉकडाउन में न तो रोजगार है न खाने को अनाज न हाथों में पैसा है। इसके बावजूद उनसे घर वापसी के लिए ट्रेनों का किराया वसूला जा रहा है और जब इस अमानवीय कार्रवाई पर सवाल उठाये जाते हैं, तो केंद्र सरकार द्वारा 85-15 प्रतिशत की हिस्सेदारी बताकर 100 फीसदी झूठ बोला जाता है। इस झूठ में योगी सरकार की भी हां में हां है।

भाजपा सरकार कोरोना महामारी के चलते अर्थव्यवस्था में छाई मंदी का सारा बोझ मेहनतकशों के कंधों पर डाल देना चाहती है। महामारी के दौर में योगी सरकार निजी व सरकारी संपत्ति नुकसान प्रतिपूर्ति जैसे अध्यादेश को मंजूरी देकर नागरिकों को डराने और लोकतंत्र पर बंदिशें लगाने का काम कर रही है। वहीं मोदी सरकार कोरोना संकट की आड़ में देशवासियों पर खुफिया नजर रखने के लिए आरोग्य सेतु एप को माध्यम बना रही है। महामारी फैलाने का ठीकरा संघ-भाजपा के लोग चीन के बाद मुसलमानों पर फोड़ने का काम बखूबी कर चुके हैं।

मोदी-योगी सरकार की उपरोक्त जनविरोधी कार्रवाइयों का शुक्रवार (आठ मई) को कोरोना सतर्कता मापदंडों का पालन करते हुए घरों से ही प्रदेशव्यापी विरोध किया जाएगा। महामारी के दौर में ‘घर से काम करने (वर्क फ्रॉम होम)’ की तरह ही आठ मई को ‘घर से प्रतिवाद (प्रोटेस्ट फ्रॉम होम)’ किया जायेगा।

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