देशभर में मजदूरों की भुखमरी तथा उनके ऊपर हो रहे पुलिस दमन के खिलाफ कार्रवाई हो

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पिछले कई दिनों से गुजरात के सूरत शहर के बाद कर्नाटक तमिलनाडु और अब उड़ीसा में मजदूर अपनी भुखमरी, बदहाली और घर वापस जाने के लिए सड़क पर उतर आएं हैं. पुलिस ने मज़दूरों पर लाठियां और आंसू गैस के गोले चलाए, उन्हें खदेड़-खदेड़ कर पिटा गया। यह बहुत ही शर्मनाक और अमानवीय घटना है। हम इसकी कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हैं और बिहार राज्य सरकार से इसमें हस्तक्षेप करने की मांग करते हैं।
प्रवासी मजदूरों ने अपने-अपने राज्य सरकारों से वापस बुलाने की गुहार लगाई थी। जनता तथा मजदूरों के आंदोलन के दबाव में आकर सरकार ने बसों एवं ट्रेनों से मजदूरों को वापस लाने का निर्णय किया लेकिन मजदूरों की इतनी दयनीय दशा में भी सरकार उनसे किराया वसूल रही है। इस पर भी 5 मई को कर्नाटक सरकार ने बिल्डर पूंजीपतियों के कहने पर दक्षिण-पश्चिम रेलवे के श्रमिक ट्रेन को बिहार आने से रोक दिया जो कि जन दबाव में अब फिर शुरू हो रहा है.और उस पर प्रतिबंध लगा दिया है। मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार का परिणाम है कि 2000 किलोमीटर दूर तक की यात्रा पर मजदूर पैदल ही निकल गए हैं. इसका परिणाम है कि जगह जगह रास्ते में उनकी मौत हो रही है. अभी अभी महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में रेल ट्रैक पर 15 मजदूरों की मौत दिल को दहलाने वाली खबर है. फिर भी यह पूंजीवादपरस्त सरकारें मजदूरों के आने के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं कर रही है, न ही रास्ते में भूखे मजदूरों और बच्चों को सरकार की तरफ से खिलाने की कोई व्यवस्था कर रही है.
हम केंद्र एवं राज्य सरकारों से मजदूरों के हित में निम्नलिखित मांग करते हैं –
1. पूंजीपतियों के पक्ष में सरकारें 12 घंटे काम करने का जो अध्यादेश ला रही है, उसे वापस ले और काम के घंटे 8 से घटाकर 6 करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को काम मिल सके।
2. प्रवासी मजदूरों के घर वापसी को सुरक्षित तरीके से सुनिश्चित किया जाए। उनके लिए बसों, ट्रेनों एवं हवाई जहाज की व्यवस्था की जाए। उनसे किसी भी प्रकार का कोई शुल्क ना लिया जाए।
3. जो मजदूर अपनी इच्छा से विभिन्न राज्यों के औद्योगिक क्षेत्रों में ही रहना चाहते हैं, उनके लिए रहने ,इलाज तथा खाने-पीने की समुचित व्यवस्था की जाए।
4. सभी प्रवासी तथा ग्रामीण मजदूरों और गरीब छात्रों को
₹2000 बेरोजगारी भत्ता
दिया जाए।
5. केंद्र सरकार यह घोषणा करे कि जब तक लॉकडाउन है किसी भी मजदूर से मकान मालिक किराया न ले।
6. भूख से मरने वाले मजदूरों के परिवारों को ₹500000 राज्य तथा सरकार देने की घोषणा करें।
7. कोरोना वायरस से बचने के लिए सरकार मजदूरों को मास, साबुन, सैनिटाइजर तथा अन्य आवश्यक सामग्री निशुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था करे।
निवेदक
अरविंद सिन्हा AIFTUnew
अजय कुमार एटक
गणेश सिंह, CITU
इंद्रजीत कुमार भगत सिंह छात्र युवा संगठन
नरेंद्र कुमार

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