देश स्तरीय आह्वान पर 16 जन संगठनों द्वारा पूरे पंजाब में रोष प्रदर्शन

3
136

22 मई 2020, चंडीगढ़। आज ट्रेड यूनियनों द्वारा देश-भर में रोष प्रदर्शन के आह्वान पर पंजाब के 16 मज़दूर-मुलाज़िम, किसान, नौजवान, विद्यार्थी संगठनों ने 16 जिलों में 56 जगहों पर रोष प्रदर्शन किए। कई जगहों पर इनमें शामिल संगठनों द्वारा ट्रेड यूनियनों के साथ संयुक्त रोष प्रदर्शन भी किए गए। यह जानकारी आज मज़दूर नेताओं — राजविन्दर सिंह, लछमण सिंह सेवेवाला, जगरूप सिंह, प्रमोद कुमार और किसान नेताओं जोगिन्द्र सिंह उगराहाँ, कंवलप्रीत सिंह पन्नू द्वारा जारी साझा प्रेस विज्ञप्ति में दी गई।

रोष प्रदर्शनों को संबोधित करते हुए जननेताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार तथा विभिन्न राज्य सरकारों ने कोरोना संकट को बहाना बनाकर मज़दूर वर्ग पर तीखा राजनीतिक-आर्थिक-सामाजिक हमला किया है। विभिन्न राज्यों में 8 घंटों की जगह 12 घंटे कार्यदिवस लागू करने समेत अन्य क़ानूनी श्रम अधिकारों का हनन किया गया है और किया जा रहा है। पंजाब में भी बारह घंटे कार्यदिवस लागू करने की तैयारी है। भाजपा की उत्तर प्रदेश सरकार ने तो लगभग सभी श्रम कानून ख़त्म करने का ऐलान कर दिया है। ज़रूरत तो इस बात की थी कि कमज़ोर श्रम कानूनों को मज़दूरों के पक्ष में मज़बूत बनाया जाए, परंतु सरकारें न सिर्फ़ इन्हें और कमज़ोर बनाने पर तुली हैं, बल्कि अब तो ख़त्म ही कर रही हैं। यह प्रक्रिया पहले ही जारी थी, परंतु कोरोना संकट के बहाने और लॉकडाउन का फ़ायदा उठाकर इस मज़दूर विरोधी और देशी-विदेशी पूँजीवादी एजेंडे को अंजाम दिया जा रहा है। इस तरह सरकारें पूँजीपतियों को मज़दूरों से मनमर्ज़ी लूट-खसोट और अन्य बेइंसाफ़ी करने की पूरी छूट दे रही हैं।

नेताओं ने कहा कि सरकारों ने कोरोना संकट के हल के लिए उचित कदम उठाने की जगह इसे और भी गंभीर बनाया है। उन्होंने दोष लगाया कि हुकूमत द्वारा कोरोना से बचाव के बहाने जनता पर थोपे गए ग़ैर-जनवादी और दमनकारी लॉकडाउन के ज़रिए मज़दूरों-मेहनतकशों को भुखमरी, शारीरिक कमज़ोरी, कोरोना और अन्य बीमारियों से नुकसान का ख़तरा बढ़ाने, पैदल व साइकिलों से लंबे सफरों, पुलिस दमन, नाजायज गिरफ़्तारियों, हादसों, आत्महत्याओं आदि मुसीबतों के मुँह में धकेलने की आपराधिक भूमिका निभाई गई है, जिसके लंबे समय तक भयानक नतीजे मज़दूरों तथा अन्य जनता को भुगतने पड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि जनता की समस्याएँ दूर करने की जगह सरकारें ‘‘देश’’ तथा ‘‘राज्य’’ को कोरोना और लॉकडाउन से हुए नुकसान का बहाना बनाकर आर्थिक पैकेज के नाम पर पूँजीपतियों को सरकारी ख़ज़ाना लुटा रही हैं और बिजली क्षेत्र समेत तमाम जन-सेवाओं के उपक्रमों के मुकम्मल निजीकरण के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। सरकारें जनता पर नए टेक्स थोपने की तैयारी कर रही हैं। खेती को राहत के नाम पर खेती उपभोग उत्पाद उद्योगपतियों को लुटाए जा रहे हैं। दूसरी तरफ़ जनता को कोरोना संकट, लॉकडाउन और अन्य भयानक मुसीबतों के मुँह में धकेलकर बड़ा राजनीतिक-आर्थिक हमला किया जा रहा है।

रोष प्रदर्शनों को टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन, पॉवर कॉम एंड ट्रांस्को ठेका मुलाज़िम यूनियन, पंजाब खेत मज़दूर यूनियन, टेक्नीकल सर्विसि‍ज़ यूनियन, भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहाँ), किसान संघर्ष कमेटी पंजाब, मोल्डर एंड स्टील वर्कर्ज़ यूनियन, जल सप्लाई एवं सेनिटेशन कंट्रैक्ट वर्कर्ज़ यूनियन पंजाब (रजि. नं 31), नौजवान भारत सभा (ललकार), पी.एस.यू. (शहीद रंधावा), नौजवान भारत सभा, पी.एस.यू. (ललकार), कारख़ाना मज़दूर यूनियन, गुरु हरगोबिंद थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत ठेका मुलाज़िम यूनियन आज़ाद, ठेका मुलाज़िम संघर्ष कमेटी पॉवर कॉम (ज़ोन बठिंडा) और पंजाब रोडवेज़/पनबस कंट्रैक्ट वर्कर्ज़ यूनियन के नेताओं — जसविंदर सिंह सोमा, रछपाल सिंह, हरजिंदर सिंह, लखविंदर सिंह, सुखवंत सिंह, गुरपाल सिंह नंगल, अश्वनी कुमार घुद्दा, छिंदरपाल सिंह, हरिंदर कौर बिंदु, बलिहार सिंह, हरमेश मालड़ी, वरिंदर सिंह मोमी, गुरविंदर सिंह पन्नु, रेशम सिंह, हुशियार सिंह सलेमगढ़, गुरप्रीत सिंह, सुखविंदर सिंह सुख्खी आदि ने संबोधित किया।

जारीकर्ता —
राजविन्दर सिंह,
लछमण सिंह सेवेवाला,
जगरूप सिंह,
प्रमोद कुमार,
जोगिन्द्र सिंह उगराहाँ,
कंवलप्रीत सिंह पन्नू

संपर्क – 8360766937

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here