किसानों की लड़ाई देश बचाने की लड़ाई है

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विशद कुमार
भागलपुर:कॉरपोरेट हितैषी, किसान विरोधी और तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली के बाहर सड़कों पर डटे किसानों के साथ एकजुटता जाहिर करने और आंदोलनकारी किसानों के दमन के विरोध में, भागलपुर स्टेशन चौक पर साझा नागरिक प्रतिवाद का आयोजन हुआ। जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पुतला फूंका गया व सभा की गई।
आयोजन “जनसंवाद मंच”, “सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार),”
“एसयूसीआई (सी)” और “गंगा मुक्ति आंदोलन” के साझा बैनर तले हुआ।
इस मौके पर बुद्धिजीवी डॉ. योगेन्द्र ने कहा कि तीनों काूनन खेती व किसानी को चौपट कर किसानों को कारपोरेटों का गुलाम बनाने के लिए है। केवल किसान गुलाम नहीं होंगे बल्कि मुल्क गुलाम होगा।
जनसंवाद मंच के गौतम मल्लाह और सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के रामानंद पासवान ने कहा कि नये कृषि कानूनों से आवश्यक खाद्य वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ेगी। पूंजीपति सस्ते दर पर किसानों का उत्पाद खरीदेंगे और फिर महंगा बेचेंगे। उन्हें मुनाफा लूटने की छूट मिलेगी।
एसयूसीआई (सी) के निर्मल कुमार और बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन (बिहार) के सोनम राव ने कहा कि लंबे समय से किसानों की मांग थी कि सरकार खेती के लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करे। सरकारी खरीद की गारंटी हो। लेकिन सरकार ने किसानों के हित में कदम उठाने की बजाय कॉरपोरेटों के हित में तीन कानून बना दिया।
समाजकर्मी अर्जुन शर्मा और परिधि के राहुल ने कहा कि किसानों की लड़ाई देश को बचाने की लड़ाई है। देश की आजादी व लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है। इस लड़ाई के साथ हर देशभक्त नागरिक को खड़ा होना चाहिए।
मौके पर मौजूद थे-गंगा मुक्ति आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ समाजकर्मी रामशरण, परिधि के उदय, सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के रिंकु यादव, अंजनी, महेश अंबेडकर, दीपक प्रभाकर, बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन (बिहार) के अभिषेक आनंद, ऋषि, एसयूसीआई (सी) के दीपक मंडल, प्रणव भारद्वाज, रुपेश यादव, जनसंवाद मंच के नीतीश यादव, दयानंद यादव, सामाजिक कार्यकर्ता सार्थक भरत, हिमांयू, सोहिल दास सहित अन्य कई लोगों अपने विचार व्यक्त किए।

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