झारखंड के धनबाद कोयलांचल में फर्जीवाड़ाः चाउमिन बेचने वाले पर 16 करोड़ रुपये का जीएसटी बकाया

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विशद कुमार

झारखंड के धनबाद में एक बड़ा ही रोचक मामला प्रकाश में आया है। एक चाउमिन विक्रेता के खिलाफ वाणिज्य राजस्व कर विभाग की ओर से 16 करोड़ रुपये की वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) चोरी का मामला दर्ज कराया गया है। यह मामला सामने तब आया जब धनबाद के धनसार स्थित दुहाटाड़ के सर्वश्री नारायणी ट्रेडर्स के प्रोपराइटर विक्की बनर्जी के खिलाफ जीएसटी चोरी करने की शिकायत धनसार थाना में दर्ज करायी गयी है।
लेकिन जब पुलिस सर्वश्री नारायणी ट्रेडर्स के आफिस को ढूंढने दुहाटाड़ गई तो यह जानकर भौचक रह गई कि दुहाटाड़ में इस नाम का कोई कंपनी है ही नहीं।
बता दें कि सर्वश्री नारायणी ट्रेडर्स कोयला कारोबार की कंपनी है। अलबत्ता सर्वश्री नारायणी ट्रेडर्स के प्रोपराइटर विक्की बनर्जी के बारे में पूछताछ करने पर पता चला कि विक्की बनर्जी नाम का एक आदमी तो है लेकिन वह धनबाद के हीरापुर हटिया में ठेले पर चाउमिन बेचने का काम करता है। जब विक्की बनर्जी को दबोचा गया तो उसने जो बयान दिए जिसे जानकर सबके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा। विक्की ने पूछताछ में बताया कि वह हीरापुर हटिया में ठेले पर चाउमिन बेचने का काम करता है। कुछ दिन पहले धनबाद के ही नावाडीह निवासी सत्यनारायण सिन्हा मेरे पास आए और बोले कि ‘चे’ नाम की एक कंपनी है, जिसमें तुम्हें जोड़ना चाहते हैं। इस कम्पनी से तुम्हें हर महीने 10,000 रुपये कमीशन मिलेगा। बनर्जी ने बताया कि सत्यनारायण सिन्हा कंपनी में जोड़ने के नाम पर मुझसे मेरा आधार कार्ड ,पैन कार्ड, फोटो और मेरे नाम से मोबाइल सिम ले गये। इसके बाद मुझे वह कई महीने तक कमीशन के नाम पर 10,000 रुपये का भुगतान भी किया। बीच-बीच में वह मुझसे कमीशन देने के नाम पर मुझसे चेक पर हस्ताक्षर करवाते थे।
इसके बाद से पुलिस सत्यनारायण सिन्हा नामक शख्स की तलाश में छापेमारी कर रही है। लेकिन उसका कहीं अता पता नहीं है।
वहीं कंपनी के मालिक विक्की बनर्जी की पत्नी से भी पूछताछ की गयी, तो उसने बताया कि हमें नहीं पता कि सत्यनारायण सिन्हा धोखे से हमारा कागजात लेकर हमारे साथ इतना बड़ा धोखा करेगा। विक्की बनर्जी ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कथित प्रोपराइटर विक्की बनर्जी का कहना है कि वह बेकसूर है और उसके कागजात को सत्यनारायण सिन्हा ने झांसे में लेकर उसके साथ धोखाधड़ी की है। इस मामले को लेकर स्थानीय पुलिस का भी कहना है कि प्रथम दृश्या इसके कागज के मुताबिक इसे फंसाया गया है, पुलिस द्वारा आरोपियों को पकड़ने के लिए अगातार छापेमारी की जा रही है।
वाणिज्य राजस्व कर पदाधिकारी अफसाना खानम के अनुसार, दुहाटाड़ के सर्वश्री नारायणी ट्रेडर्स के प्रोपराइटर विक्की बनर्जी के खिलाफ जीएसटी चोरी करने की शिकायत धनसार थाना में दर्ज करायी गयी है। इस संबंध में धनसार पुलिस ने उत्पादक वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) अधिनियम 2017 के तहत कांड संख्या 167/ 20 धारा 406, 420, 471, 120 बी, 132(1) बी,132(1) ई, 132(1) आई के तहत मामला दर्ज कर लिया है। वाणिज्य कर अधिकारी अफसाना खानम ने बताया कि प्रोपराइटर विक्की बनर्जी के नाम पर सर्वश्री नारायणी ट्रेडर्स कंपनी दुहाटाड़ में चल रही थी, जिसमें 15 करोड़ 90 लाख 22 हजार 138 रुपये का कोयला का व्यवसाय किया गया, लेकिन जीएसटी विवरण नहीं दिया गया और न ही सरकार को टैक्स दिया गया। इस मामले में दुहाटाड़ जाकर छानबीन की गयी, तो पता चला कि यहां इस नाम की कोई कंपनी ही नहीं है।
अफसाना खानम के अनुसार, प्रोपराइटर विक्की से पूछताछ में उसने बताया कि वह बेकसूर है और उसके कागजात को धनबाद के नावाडीह निवासी सत्यनारायण सिन्हा ने झांसे में लेकर उसके कागजात के साथ धोखाधड़ी की है। अपने बयान में प्रोपराइटर विक्की बनर्जी का कहना है कि वह हीरापुर हटिया में ठेले पर चाउमिन बेचने का काम करता है। कुछ दिन पहले नावाडीह धनबाद निवासी सत्यनारायण सिन्हा मेरे पास आए और बोले कि चे नाम की एक कंपनी है, जिसमें तुम्हें जोड़ेंगे। इस कम्पनी से तुम्हें हर महीने 10,000 रुपये कमीशन मिलेगा। बता दें कि
बता दें कि विक्की बनर्जी दो साल पहले बैट्री वाटर बनाने वाली एक कंपनी में मजदूरी का काम करता था। कुछ ही दिनों बाद उसने धनबाद में चाउमिन बेचने का काम शुरू किया था। सत्यनारायण सिन्हा के साथ विक्की बनर्जी की मिली भगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता। यहां सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी कंपनी जब विक्की बनर्जी के नाम पर है, तो जाहिर है बैंक का खाता में भी विक्की बनर्जी का ही नाम होगा, जो बिना उसकी उपस्थिति के वह खाता नहीं खुल सकता था। कई अनुत्तरित सवाल हैं जिसे कितनी ईमानदारी खोजा जाएगा कहना मुश्किल है।
वैसे कोयलांचल क्षेत्र का यह कोई पहला मामला नहीं है। यहां फर्जी नाम से कई कंपनियां चल रही हैं। इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस या प्रशासन और बीसीसीएल के पदाधिकारियों को नहीं है ऐसा नहीं है, क्योंकि इस फर्जीबाड़े में सबका अपना अपना हिस्सा है। अगर ईमानदारी से इन मामलों की जांच हो तो कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे, लेकिन शायद ऐसा होगा नहीं।

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