फ्रेडरिक एंगेल्स के जन्मदिन पर पेरिस कम्यून की 150 वी जयंती का आयोजन

0
269
आज पटना के आईएमए हॉल में 8 क्रांतिकारी संगठनों ने मिलकर सर्वहारा के महान शिक्षक व नेता फ्रेडरिक एंगेल्स के जन्मदिन पर पेरिस कम्यून की 150 वी जयंती का आयोजन किया। करीब 300 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस आयोजन में परिचर्चा का मुद्दा था “पेरिस कम्यून के सबक और आज की चुनौतियां” इस विषय पर आम सहमति थी कि पेरिस कम्यून के अनुभव के आधार पर जो ऐतिहासिक सबक मिले हैं और जिसे हमारे शिक्षक मार्क्स, एंगेल्स तथा लेनिन ने विस्तार से बताया है और जिसके आधार पर रूस की समाजवादी क्रांति को आगे बढ़ाया गया, उसी को केंद्र में रखकर चर्चा को आगे बढ़ाना है। शुरुआती दौर में मोटे तौर पर इस स्प्रिट को आगे बढ़ाया गया लेकिन बाद में कई वक्ताओं ने कुछ ऐसे प्रश्न को बहस के मुद्दे के तौर पर लाया जिसको लेकर वैचारिक मतभेद के साथ तीव्र विवाद खड़े हो गए। पहला मामला तो भारतीय राज्य के चरित्र के निर्धारण के प्रश्न पर सामने आया। एक साथी ने भारतीय राज्य के चरित्र में जनवादी क्रांति के संपन्न होने और ब्रिटिश शासन की नौकरशाही तथा चरित्र की मौजूदगी को केंद्र में रखकर बहस को आगे बढ़ाया। दूसरे साथी ने मतभेद जाहिर करते हुए कहा कि आज भारतीय राज्य के चरित्र पर बहस का मुद्दा नहीं होना चाहिए, क्योंकि जिनकी अलग समझ है उन्हें भी अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए। एक विरादराना संगठन के अतिथि ने आज के किसान आंदोलन के चरित्र को बहस के बीच ले आया। अध्यक्ष मंडल की तरफ से उन्हें पेरिस कम्यून के सबक और चुनौतियों के संदर्भ में ही बोले की सलाह दी गई।
आंदोलन के आयोजन की शुरुआत में ही यह तय किया गया था कि विभिन्न संगठनों के मजदूर प्रतिनिधि अपनी बात रखेंगे। यह बात इस दृष्टि से भी आवश्यक था कि मजदूर वर्ग के राज्य के निर्माण पर आयोजित समारोह में सीधे-सीधे मजदूर वक्ताओं की भागीदारी होनी चाहिए।सम्मेलन में उपस्थित विभिन्न संगठनों के मजदूर प्रतिनिधि इतने सक्षम थे कि एक दर्जन से ऊपर वक्ता की भागीदारी हो सकती थी। कुछ तो समय के अभाव में और कुछ मजदूर प्रतिनिधियों के महत्व को तीव्रता से महसूस कर पाने की कमजोरी के कारण हमारे मजदूर वक्ता अपनी बात नहीं रख पाए। यह इस आयोजन की कमजोरी मानी जानी चाहिए। हमें ऐसे आयोजनों में ज्यादा से ज्यादा आम मजदूर कार्यकर्ता को अपनी बात रखने के लिए आगे लाना चाहिए।
बिहार निर्माण व असंगठित श्रमिक यूनियन के मजदूर कार्यकर्ता विभिन्न चौक चौराहों पर लगातार पेरिस कम्यून के बारे में मजदूरों को बताते रहे हैं आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा।
पेरिस कम्यून का आज का आयोजन मजदूरों को मजदूर वर्ग की ताकत मजदूर वर्ग की ऐतिहासिक जिम्मेवारी और उपलब्धियों के बारे में बताने के लिए आयोजित हुआ था जिसमें ऐसी कमजोरियां रह गई फिर भी यह आयोजन काफी सफल माना जाएगा। इस आयोजन के अंदर उठे बहस के मुद्दों के बीच यह आवश्यक प्रतीत होता है कि सभी संगठन अपने चुने हुए प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ अलग से बैठक करके मजदूर वर्ग के मित्र शक्ति, भारतीय क्रांति के मुख्य प्रहार के केंद्र तथा मुख्य वर्ग शत्रु,भारतीय राज्य सत्ता के चरित्र आदि पर बात करें। पिछले दिन हम लोगों ने 1917 के रूसी समाजवादी क्रांति के 100वीं वर्षगांठ पर भी आयोजन किया थ। इस आयोजन के दौरान ऐसी बातें नहीं उठी थी।
लेकिन इन बहसों को भी सकारात्मक तौर पर लिया जाना चाहिए और इन मुद्दों पर सर्वहारा वर्ग की स्पिरिट के साथ वैचारिक बहस को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here