मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी के लिए और श्रम कानूनों को स्थगित किए जाने के खिलाफ ऐपवा का प्रदर्शन

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• शारीरिक दूरी बनाकर, सोशल मीडिया में विरोध पोस्टर लगाकर,योगी सरकार के महिला विरोधी चेहरे के खिलाफ विरोध और मजदूरों के पक्ष में कविताएं पढ़कर विरोध दर्ज किया ।
ऐपवा की जिला सचिव स्मिता बागड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी जी की संवेदनाएं गायों के लिए साफ नजर आती है लेकिन।आज सड़कों पर हमारे प्रवासी मजदूर भूखे ठोकर खाते हुए सड़को पर है तब इनकी सम्वेदनाएँ कहां खो जाती है??
ऐपवा जिला अध्यक्ष डॉ नूरफतिमा ने आगरा और औरेया में 26 प्रवासी मजदूरों की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि योगी सरकार की लापरवाही की वजह से ही मजदूरों की मौतें हुई हैं और सीधे तौर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री ही इन मौते के जिम्मेदार हैं।
गांधी स्टडीज सेंटर से डॉ मुनीज़ा रफीक खान ने कहा कि महामारी की आड़ में सरकारें जनता के अधिकारों को छीनने का काम कर रही हैं। इसका ताजा उदाहरण है यूपी की योगी सरकार द्वारा श्रम क़ानूनों में भारी बदलाव / ट्रेड यूनियन के अधिकारों का हनन, महिला श्रमिकों को।मिलने वाली तमाम सुविधाओं में भारी कटौती और उनके छंटनी तक की जाएगी।


आज बनारस में ऐपवा जिला कार्यकारिणी ने यह विरोध दर्ज किया। जिसमें मुख्य रूप, ऐपवा सहसचिव सुजाता भट्टाचार्य, उपाध्यक्ष सुतपा गुप्ता, विभा प्रभाकर, आशु मीणा, सिंधौरा से विद्या, रिज़वाना, नूरजहां आदि शामिल थे।
सोशल मीडिया में जरिए विरोध प्रदर्शन में योगी के श्रम अध्यादेश के प्रतियां भी जलाई। ऐपवा कीमांगे विरोध प्रदर्शन में निम्नलिखित हैं


• सरकार की लापरवाही से प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के दौरान हुई मौतों पर ऐपवा गहरा दुःख और
शोक प्रकट करती है साथ ही उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करती है। योगी सरकार को इन मौतों के लिए जिम्मेदार मानती है। ऐपवा मांग करती है कि मृतक परिवार को 20 लाख रुपये मुआवजा सरकार सुनिश्चित करे।

• श्रम कानूनों के तीन साल तक स्थगित किये जाने का अध्यादेश योगी सरकार का तानाशाही रवैया है। इसे तत्काल वापस लेने की मांग हम करते हैं।
• प्रवासी मजदूरों और उनके परिवारों को समुचित भोजन के साथ तत्काल सुरक्षित घर वापसी कराई जाए। प्रति व्यक्ति 15 किलो के हिसाब से हर मजदूर परिवार को आगामी 6 माह तक राशन की गारण्टी की जाए। प्रत्येक मजदूर परिवार को दस हजार रुपये प्रति माह लोकडौन भत्ता दिया जाए।
• रोजगार के इच्छुक हर मजदूर को मनरेगा में काम की गारंटी करो . मजदूरी 500 रुपये करो।
• मनरेगा में महिलाओं के 50% आरक्षण की गारंटी करो।
• शराब की दुकानें घनी बस्तियों में हटाई जाएं, शराब के कारण महिलाओं पर हो रही घरेलू हिंसा पर तत्काल रोक लगाई जाए।
• महामारी से निपटने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन, मास्क, सेनेटाइजर की व्यवस्था की जाए।
• कोविड-19 से लड़ने के लिए हर गली मोहल्ले में सरकारी खर्च पर मुफ्त जांच प्रकिया को तेज किया जाए साथ ही पंचायत स्तर तक मेडिकल टास्क फोर्स का गठन किया जाए।
रिपोर्ट कुसुम वर्मा

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