साझा संस्कृति मंच की अगुवाई में बनारस के नागरिक समाज ने विरोध प्रदर्शन किया

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सामाजिक राजनैतिक कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न के मुद्दे पर साझा संस्कृति मंच की अगुवाई में बनारस के नागरिक समाज ने विरोध प्रदर्शन किया। उत्पीड़न न रुकने पर आंदोलन की चेतावनी के साथ सौंपा ज्ञापन पत्र।
#बनारस में किसान व नागरिक नेताओं पर दमन और गुंडा एक्ट जैसी कार्रवाई तत्काल वापस ले शासन-प्रशासन।
आज दिनांक 20 /01/2021 को साझा संस्कृति मंच की अगुवाई में बनारस के सामाजिक राजनैतिक कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न के मुद्दे पर बनारस के नागरिक समाज ने शास्त्री घाट पर विरोध प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन के बाद भारी संख्या में पंहुचे लोगो ने राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन पत्र भी दिया। सामाजिक राजनैतिक कार्यकर्ताओ पर उल- जुलूल मुकदमे और पुलिसिया कार्यवाही के मुद्दे पर प्रदर्शन में खासा आक्रोश दिखा। प्रदर्शन स्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा की बनारस में नागरिक समाज के वे प्रतिनिधि जो गाँधीजी के सुझाए रस्ते पर शांतिपूर्ण ढंग से और लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में एक जागरूक नागरिक की भूमिका निबाहने को सदैव तत्पर रहते हैं , ऐसे लोगो पर पुलिस द्वारा गुंडा एक्ट की कार्यवाही की जा रही है। दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के खिलाफ बनारस में किसान नेता लिखे बोले ऐसा दबाव बनाया जा रहा है। जो की बेहद तानाशाही से भरी अन्यायपूर्ण कार्यवाही है। ग्रामीण क्षेत्रो में किसान नेताओ के घर पुलिस दिन रात दबाव बना रही है की नए कानूनों के समर्थन में आएं। ऐसा न करने पर पुलिस मुकदमो में फंसाने की धमकी दे रही है।
ज्ञातव्य है वरिष्ठ समाजवादी किसान नेता रामजनम भाई पर गुंडा एक्ट कार्यवाही की नोटिस दी गयी है। ट्रेड यूनियन नेता एस पी राय को भी गुंडा ऐक्ट की नोटिस दी गयी है।
ताज्जुब की बात है और बेहद निंदनीय भी की उक्त सामाजिक राजनैतिक कार्यकर्ताओं के बेटे , भतीजे आदि पर भी गुंडा एक्ट जैसी गंभीर आपराधिक धाराओं में कार्यवाही की जा रही है। पढ़ने लिखने वाले ये नवयुवक कल को नौकरी रोजगार से भी वंचित हो जाएंगे तो क्या योगी मोदी की सरकार इनके आजीविका की जिम्मेदारी लेगी ? इन नौजवानो के वर्तमान और भविष्य का जिम्मेदार कौन होगा ?
उपरोक्त के साथ ही जय शंकर सिंह, नंदाराम शास्त्री, निहालुद्दीन, राम जी सिंह और हंसराज पटेल आदि दर्जनों सामाजिक राजनैतिक कार्यकर्ताओ को गुंडा ऐक्ट की सम्मन नोटिस दी गयी है।
प्रदर्शन स्थल पर हुई सभा में कहा गया की सामाजिक कार्यकर्ता राजनीतिक कार्यकर्ता समाज के हक की आवाज होता है। लोकतंत्र में जनता के हक की आवाज उठाना हमारा धर्म है, उसके कारण अगर सत्ता और प्रसाशन कानून का दुरुपयोग करे तो क्या किया जाए ?
वरिष्ठ किसान नेता जयशंकर सिंह ने कहा की फासीवाद तानाशाही पूंजीवाद आदि के खिलाफ लड़ाईया तो कई लड़ी गयी है लेकिन किसानो के इस संघर्ष ने एकदम से पाला खींच दिया है। अब मामला आरपार का हो गया है। और इस दफे जीत छात्रों मजदूरों किसानो की ही होगी। इतिहास गवाह है। ये माफ़ी मांगने वाले मुखबिरी करने वाली वैचारिकी के लोग सीधी लड़ाई में हमेशा भाग खड़े हुए हैं।
अफलातून जी ने प्रशासन की कार्यवाही को हास्यास्पद बतलाते हुए कहा की गुंडा शब्द की परिभाषा बहुत सरल है। जो की इस निजाम को पता नहीं है। गुंडा वह होता है जो अपने से कमजोर को सताता है। और अपने से जबरे के तलवे चाटता है। ये लोग जिनपर गुंडा ऐक्ट की कार्यवाहियां की है ये गाँधी भगत सिंह किशन पटनायक राजनारायण के लोग है। ये किसी सताने वाले लोग नहीं है।
अभिव्यक्ति हमारा अधिकार हम लोकतंत्र के पहरेदार।, लोकतंत्र जिन्दाबाद संविधान जिन्दाबाद आदि नारे लिखी तख्तियों के साथ काफी संख्या में लोग मौजूद रहे। प्रेरणा कला मंच के रंगकर्मियों ने जनगीतों से समा बांध दिया।
सभा के दौरान एक अन्य वक्ता ने कहा की शहर के अलग अलग हिस्से में काम कर रहे किसान नेता लक्ष्मण प्रसाद, सुरेश राठौड़, नन्दलाल मास्टर आदि पर भी पुलिस और एल आई यु के अधिकारी पूछताछ के नाम पर धौंस जमा रहे है. जो की सर्वथा अनुचित है। बीते कल में ही दिल्ली की ओर जा रहे किसानो के एक जत्थे का स्वागत कर रहे जनसंगठन के नेताओं के घर पुलिस दबाव देने लगी। ये कार्यवाही बिलकुल ही अलोकतांत्रिक प्रकृति की है। वक्ताओं ने एकमत से पुलिस द्वारा दी जा रही धमकी पर गहरी आपत्ति जताई और तत्काल इस तरह की गैर कानूनी गैर लोकतांत्रिक गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग उठाई।
वक्ताओं ने कहा कि पूरे बनारस में सरकार के इशारे पर राजनीतिक-सामाजिक विपक्ष को पुलिस के जरिए दबाने की कोशिश हो रही जो कि गैर सांविधानिक है, पुलिस और प्रशासन का मूल काम संविधान की रक्षा करना है,सरकार के राजनीतिक हितों को साधना नही।
साझा संस्कृति मंच खुली अपील के माध्यम से कहना चाहता है की यदि सामाजिक राजनैतिक कार्यकर्ताओ के उत्पीड़न की कार्यवाही निरस्त नहीं हुई तो हमे इस मुद्दे पर आंदोलन को बाध्य होना होगा। बनारस का नागरिक समाज यह साफ़ कर देना चाहता है की हम अपने राजनीतिक-सामाजिक पहलकदमियाँ आगे भी जारी रखेंगे और प्रशासन हमारे इस जनतांत्रिक अधिकार को बाधित करने के बजाय इसकी रक्षा की गारंटी करे।
प्रतिरोध सभा में प्रमुख रूप से फादर आनंद , नन्दलाल मास्टर , सुरेश राठौड़ , महेंद्र , डॉ अनूप श्रमिक ,रंजू , सतीश सिंह, मनीष शर्मा,संजीव सिंह, नंदलाल शास्त्री, सुरेंद्र यादव, अफलातून ,दीनदयाल ,रवि शेखर , मुकेश झँझरवाला, धंनजय , शाहिद, फजललुर्रह्मान, सरिता पटेल ,संजय चौबे , गगन प्रकाश यादव, जयंत, धीरज शुक्ला , जयशंकर सिंह , डॉ जिया उल हक़, विवेक यादव, योगिराज, लक्ष्मण भाई, गगन प्रकाश यादव, प्रवाल जी, बोदा अंसारी, उर्मिला, प्रदीप सिंह ,राजेंद्र चौधरी , अहमद भाई, दीपक सिंह नीरज, सानिया अनवर , राजकुमार गुप्ता ,अवंतिका, प्रियेश, विवेक आदि सैकड़ो लोग शामिल रहे।
फादर आनंद
9598604926

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