विपक्ष से भी विज्ञापन कराने की अद्भुत कला

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      आप विवेकसम्पन्न हैं । इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है । ज़रा रुकिए । थोड़ा सा ठहरिए । आगे जो मैं कहने जा रहा हूँ । उसे सुन कर शायद आप को पुनः अपने सोचने – समझने की प्रक्रिया को टटोलना पड़े ।
                  बात यह है कि आप का पाला आरएसएस के तेज तर्रार धूर्त से है । इसे इतने हल्के में मत लीजिये कि यह मूर्ख या अनपढ़ है । वह झूठ को सच मनवाने की कला में माहिर है । वह त्रासदियों पर ताली , थाली , शंख बजवाने ; मोमबत्ती जलवाने और पटाखे छुड़वाने में सिद्धहस्त है । वह बचपन में मगरमछ पकड़ कर घर ले जाता है । वह कुल आठ जमात पास करके बीए या शायद एम  की डिग्री प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखा सकता है । यह तो हुआ उसका व्यक्तिगत पक्ष । यह व्यक्ति ऐतिहासिक झूठ भी बोल लेता है । आप ने कभी सोचा वह ऐसा क्यों करता है ?क्या यह सब मूर्खता के कारण होने वाली स्वाभाविक गलतियां हैं । यदि हां तो फिर आप के विवेक को सलाम । यदि नहीं तो आइए दो चार कदममेरे साथ चलिए । समझने की कोशिश करते हैं कि यह आदमी जो वाकई निरा मूर्ख है वो इतनी बड़ी चालाकी क्यों करता है ? अब आप कहेंगे कि मैं खुद अब इस आदमी को निरा मूर्ख क्यों कह रहा हूँ जबकि मैं तो इसकी धूर्तता पर बात कर रहा था । इसके मूर्ख होने की बस एक वजह है कि इसका आरएसएस से जुड़ा हुआ होना। बाकी यह आदमी बहुत तेज तर्रार चालाक है ।इतना तेज तर्रार कि विपक्षियों से भी अपना विज्ञापन करवा सकता है । इस आदमी की इस कला का मैं फैन हो गया हूँ । लेकिन इसकी जल्द से जल्द मृत्यु की कामना भी करता हूँ । जो कि एक न एक दिन तो पूरी हो ही जाएगी । खैर इसका मरना कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होगा ।
                आप ने कभी सोचा कि यह आदमी बड़ी बड़ी ऐतिहासिक और व्याकरणिक गलतियां क्यों करता है ? आप को सोचना चाहिए । आप ऐसा क्यों नहीं सोच पा रहें हैं इसके पीछे एक बड़ा कारण यह है कि आप ने इस आदमी को ही व्यवस्था मान लिया है । इस लिए इसकी हर गलती पर आप की  पैनी नज़र रहती है । यह आदमी गलती करता है । आप तुरन्त उस गलती को लपक लेते हैं । लग जाते हैं इस आदमी की मट्टी पलीत करने में । आप मट्टी पलीत कीजिये । यह आप का हक़ है । लेकिन यह भी तो सोचिए यह आदमी जिसे हर समस्या पर घेरा जा सकता है । वह आप को ऐतिहासिक या व्याकरणिक झूठ बोल कर नया कंटेट क्यों दे रहा है ? वो भी एक के बाद एक । क्या आप को यह सब इतना आसान नज़र आता है । दरअसल यही है इसका कौशल । यही है इसकी विपक्षियों के मुख से भी अपना विज्ञापन करवाने की कला ।
                  इन्होंने पहला ऐतिहासिक झूठ बोला कि
राम मन्दिर बनाएंगे, रामराज्य लाएंगे ।
आप ने इस मौके को तुरन्त लपका । आप को लोकतंत्र , धर्मनिर्पेक्षता , समाजवाद , दलित , स्त्री , अल्पसंख्यंक और आदिवासियों के हितों की चिंता सताने लगी । आप ने कहना शुरू कर दिया रामराज्य आ गया तो ये हो जाएगा । वो हो जाएगा ।
इन्होंने कहा हिन्दू राष्ट्र बनाएंगे ।
आप फिर थर थर कांपने लगे । हिन्दू राष्ट्र बन गया तो ये हो जाएगा । वो हो जाएगा ।
       अब आप इन दो उदाहरणों से देखिए इस आदमी ने कैसे आपकी सोचने समझने की प्रक्रिया को अपने लिए इस्तेमाल किया । इसने बड़ी चालाकी से अपने शब्द आप की भाषा में घुसेड़ दिए । आप की भाषा से समकालीन मुद्दे गायब होने लगे । आप विपक्ष में होकर भी इस आदमी के द्वारा दिये गए कंटेट पर बहस करने लगे । कविताएं लिखने लगे । गोष्ठियां करने लगे । अब हुआ ये की सारी बहस का केंद्र राम हो गए । राम पर बात आप किसी पक्ष में खड़े हो कर करें उसका टोटल लाभ बीजेपी को ही मिलेगा । यही कारण है कि वह गोरखनाथ , कबीर और नानक को इक्कठा बैठा देता है । यही कारण है कि वह नाले से गैस निकाल कर चाय बनवा लेता है । यही कारण है कि वह जब तन पर कपड़ा भी नहीं होता था तब सर्जरी का ईजाद कर लेता है । एरोप्लेन , इंटरनेट , डिजिटल कैमरा ।आलू से सोना बनाने की मशीन भी इसी आदमी के पास है । जो इसने अपने आई टी सैल के साथ मिलकर राहुल गांधी के मत्थे मढ़ दी । न जाने क्या क्या ? न जाने कब कब ?
         अब कुछ व्याकरणिक भूलें  अभी बुद्धिजीवियों ने दो मौके लपके हुए हैं । एक वो टेलीप्रॉम्प्टर दूसरा बेटी पढाओं की जगह पटाओ । साथियों यही है विज्ञापन की कला । सारा फेसबुक ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया माध्यम इस बहाने मोदी मोदी से भरे पड़े हैं । जो आदमी व्यंग्य की भाषा जानता हो । वो आदमी ऐसी भूलें कर सकता है भला । जो आदमी लाशों के गणित के सहारे संसद में बहुमत का गणित सिद्ध कर सकता हो । वह आदमी ऐसी कोताही कर सकता है भला । जिसका बहुमत ही भाषा पर टिका हो । वह ऐसी भूलें कैसे कर सकता है ? वो भारत के पढ़े लिखे विवेकसम्पन्न क्रांति क्रांति चाहने वाले वर्ग के सामने ।
यह आदमी पूंजीवादी व्यवस्था का सबसे श्रेष्ठ एजेंट है । यह फासीवादी भी है । यह रो कर भी दिखा सकता है । यह घर में घुस कर भी मार सकता है । यह चौराहे पर खुद को जिंदा जलाने के लिए भी बोल सकता है । दलित भाइयों के लिए गोली भी खा सकता है । ये अलग बात है कि जिस राज्य में यह सांसद है । उसी राज्य में हाथरस भी है । यह भाषा का कमाल ही तो जानता है । आप इस आदमी के इसी कमाल के शिकार हैं ।
         साथियों यह गलतियां नहीं हैं । यह रणनीति है । आप की भाषा में अपना प्रचार कराने की कला है । आप को इस ओर ध्यान देना पड़ेगा । पूंजीवादी सरकारों को जनहित के मुद्दों पर ही घेरा जा सकता है । इसके अलावा किसी ओर मैदान में लड़ेंगे तो मुंह की खाएंगे ।।।
रवि निर्मला सिंह
पूर्व महासचिव
दलित लेखक संघ

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