महामारी व बिहार की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर एआईपीएफ का वेबिनार

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  • विशद कुमार
कोविड के हाहाकारी दूसरे चरण ने बिहार की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पूरी तरह पोल खोल दी है. कोरोना महामारी व बिहार की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर आज एआईपीएफ के बैनर से एक वेबिनार का आयोजन किया गया, जिसमें जाने-माने राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कई ख्याति प्रख्यात चिकित्सकों ने हिस्सा लिया और अपने विचार व्यक्त किए.
वेबिनार में मुख्य रूप से भाकपा-माले के बिहार राज्य सचिव कुणाल, प्रख्यात चिकित्सक व रूबन मेमोरियल अस्पताल के निदेशक डाॅ. सत्यजीत सिंह, पीएमसीएच के ईएनटी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डाॅ. पीएनपी पाल, प्रख्यात चिकित्सक व स्वास्थ्य आंदोलनकर्मी डाॅ. शकील और डीएमसीएच के पैथोलाॅजिकल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डाॅ. अजीत चैधरी ने अपने विचार व्यक्त किए. जबकि वेबिनार का संचालन एआईपीएफ के कमलेश शर्मा ने किया.
माले के राज्य सचिव कुणाल ने अपने संबोधन में कोविड के दूसरे चरण में सरकार के बेहद नकारात्मक रवैये की चर्चा की. कहा कि सरकार जो दावा कर रही है और हमलोग जो जमीनी सच्चाई देख रहे है, उसमें काफी अंतर है. उन्होंने जागरूकता, टीका व इलाज के तीन बिन्दुओं पर अपनी बातें रखीं.
कहा कि कोरोना के बारे में बहुत कुछ नहीं जानने के कारण भय व आतंक के माहौल में सरकार का पहला काम एक वैज्ञानिक सोच विकसित करने की थी, लेकिन ताली-थाली व घंटी बजवाने वाली सरकार ने पूरे देश में अंधवश्विास का माहौल बनाया. अभी पूरे देश में मेडिकल साइंस को मजाक बनाने के खिलाफ रामदेव के खिलाफ आंदोलन चल रहा है. टीकाकरण को लेकर गरीबों के बीच भारी अफवाह है. लेकिन यह अफवाह क्यों है? दरअसल, शासक व सामंती खेमे की ओर से यह अफवाह फैलाया जा रहा है. चंूकि टीका की मात्रा कम है इसलिए दबंग लोग भ्रम फैलाकर गरीबों को टीका से वंचित करने की साजिश रच रहे हैं.
सरकार ने पूरे दौर में बातचीत की प्रक्रिया का निगेशन किया. आज भी उसी तरह का माहौल बना हुआ है. ऐसा लगता है कि यह उनका प्राइवेट मामला है. जबतक नीचे के अस्पतालों की व्यवस्था ठीक नहीं होगी, इस समस्या का हल नहीं हो सकता है. सरकार मौत का आंकड़ा भी छुपा रही है. जबकि गांव-गांव में लोग इस बार बीमार पड़े. बहुत से लोगों में कोविड का लक्षण था, लेकिन जांच नहीं हुई. सरकार इन लोगों की मौत को कोविड से हुई मौत नहीं मान रही है. दरअसल, राजनीतिक सवालों व मुआवजा देने से बचने के लिए मौतों का आंकड़ा छुपाया जा रहा है. यदि सरकार नहीं मानती है कि कोविड के दूसरे चरण में बड़ी संख्या में लोग उसके शिकार हुए तो फिर तीसरी लहर की तैयारी कैसे होगी?
डाॅ. सत्यजीत सिंह ने कहा कि कोविड कोई नई चीज नहीं है, यह वायरस बहुत पहले से है. इसका कैरेक्टर म्यूटेशन का है. उसके प्रोटीन में बदलाव होने से म्यूटेशन होता है. 2012 में उसपर तेजी से कार्रवाई की गई थी, जिस कारण वह फैल नहीं पाया. इस बार डब्लूएचओ ने सही समय पर कार्रवाई नहीं की, चूक हुई, इस कारण यह हालत है. तीसरी लहर आने की संभावना है. वैक्सीन जिनको नहीं पड़ा है, वे खतरे में आ सकते हैं. ब्रिटेन में 70 प्रतिशत लोगों का टीकाकरण हो गया, इसलिए वहां तीसरी लहर नहीं आई.
वैक्सीन ही एक मात्र उपाय है, जिसके जरिए हम तीसरी लहर रोक सकते हैं. चंूकि 18 से कम उम्र के लोगों के लिए अभी टीका नहीं आ सका है, इसलिए बच्चों में संक्रमण की गंुजाइश बढ़ जाएगी. सरकार का रोल है कि ज्यादा से ज्यादा वैक्सीन लाए और एक निश्चित समय के भीतर सबका टीकाकरण करे. डाॅक्टरों के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित कर बीमारी को रोका जा सकता है. यहां डाॅक्टर का प्रोडेक्शन कम है. बिहार में एक भी आॅक्सीन का प्लांट नहीं है. यहां आॅक्सीजन बोकारो या जमशेदपुर से आता है. बिहार सरकार ने इस मामले में अव्वल दर्जे की कमजोरी दिखलाई. कोविड की दूसरी लहर के दौरान हम सोच नहीं पाते थे कि मरीज को कैसे बचायें. जब आॅक्सीजन सिलेंडर आया तो सिफारिश करके ऐसे-ऐसे अस्पतालों में भेजा गया जहां मरीज ही नहीं थे. उन्होंने कहा कि सामाजिक संस्थाओं में काम करने वालों को अपने-अपने गांव को मोटिवेट और भ्रम की स्थिति को दूर करना चाहिए.
डाॅ. पीएनपी पाल ने कहा कि महामारी में सबसे पहले दिमाग में यह बात आनी चाहिए कि तबीयत खराब होने पर वह कोरोना ही है. फिर उसी प्रकार से इलाज चलाना चाहिए. कहा कि समाज में वैज्ञानिक सोच का घोर अभाव है. यह बहुत अजीब लगता है कि लोग वैक्सीन का विरोध कर रहे हैं. आरएसएस के आदमी रामदेव एलोपैथ को नकारते हुए एलोपैथ बनाम आयुर्वेद की नितांत गलत बहस चला रहे हैं. ऐसे समय में यह बहस बहुत ही खतरनाक है. हमें समाज में पूरी तरह से साइंटिफिक एप्रोच का प्रचार करना होगा. कैंसर, ब्लड प्रेशर, शुगर सभी प्रकार रोगों से ग्रस्त लोगों को भी, जो 18 से ऊपर के हैं, तत्काल वैक्सीन ले लेना चाहिए. जो भी वैक्सीन उपलब्ध हो, उसे अविलंब ले लेना चाहिए. सभी की क्षमता लगभग बराबर है. यदि वैक्सीनेेशन नहीं होता है, तो थर्ड लहर की संभावना हमेशा बनी रहेगी. उन्होंने इस तथ्य पर भी प्रकाश डाला कि गर्भवती महिलाओं को छोड़कर दूध पिलाने वाली महिलाओं सहित सभी महिलायें टीका ले सकती हैं. उन्होंने मास्क पहनने, शारीरिक दूरी आदि के महत्व पर प्रकाश डाला.
डाॅ. शकील ने कहा कि कोरोना ने स्वास्थ्य व्यवस्था को राजनीतिक सेंटर में ला दिया है. पहले यह कोने की चीज हुआ करती थी. अभी नीति आयोग की रिपोर्ट आई है, उसमें हमारा राज्य स्वास्थ्य के मामले में सबसे निचले पायदान पर है. जबकि यहां पिछले 16 वर्षों से कमोबेश एक ही गठबंधन की सरकार है. यह सरकार झूठ का तंत्र चला रही है. इनके झूठ को पर्दाफाश करने का यह वक्त है. हमारे राज्य में आबादी के हिसाब से डाॅक्टर व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का आंकड़ा आखिर सबसे कमजोर क्यों है? सस्टनेबल विकास की बात करने वाली ये सरकारें आखिर स्वास्थ्य की ऐसी उपेक्षा क्यों कर रही है? यदि तीसरी लहर आ गई तो और अधिक जान जा सकती है. इसलिए हमें एक ओर सावधान रहना है और दूसरी ओर स्वास्थ्य के एजेंडे पर एक धारावाहिक आंदोलन खड़ा करना चाहिए. कोरोना व लाॅकडाउन के कारण 29 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे चले गए हैं. यह सही समय है जब सरकारों से पूछें कि आयुष्मान जैसी योजनाओं का क्या हुआ?
वेबिनार में कई लोगों ने कोविड से संबंधित सवाल पूछे और भ्रम व अफवाहों के खिलाफ जागरूकता अभियान में शामिल होने का संकल्प लिया. तकरीबन 80 लोग वेबिनार में शामिल हुए.

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