नाट्यशास्त्र ऐसा प्रयोगशास्त्र है जो मुख्यतः अभिनय पर आधारित है

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‘नाट्यशास्त्र के आधुनिक अनुप्रयोग’ विषयक विशिष्ट व्याख्यान के दूसरे दिन विश्वविश्रुत विद्वान् प्रो. भरत गुप्त ने कहा कि नाट्यशास्त्र एक प्रयोगशास्त्र है जो मुख्यतः अभिनय आधारित है। इसमें कवि, अभिनेता व सहृदय श्रोता नाट्य के सूत्र हैं। इसमें काल आधारित ऐतिहासिक वर्णन, नाट्य क्रियाओं का उदाहरण के साथ व्याख्यान, प्रेम का वर्णन, वर्णाश्रम धर्म व निर्गुणवाद का दृष्टिकोण प्रकाशित होता है। नाट्यशास्त्र पंचम वेद है जो किसी भी समुदाय व सम्प्रदाय के प्रति आग्रह नही रखता। विद्वान् वक्ता ने इसके लोक कल्याण की भावना से ओत-प्रोत होने पर बल दिया। उद्देश्य पर चर्चा के साथ-साथ अन्य तार्किक प्रश्नों पर भारतीय चेतना के आधुनिक लक्ष्यों को बताया। इसमें फ्रिडम ऑफ एक्सप्रेशन को राज्याश्रय प्राप्त था जो मंचनिर्माण व उसकी जर्जरस्थापना से रक्षा द्वारा स्पष्ट है। कला का दुरूपयोग भरतमुनि को मान्य नहीं था।
प्रो. प्रेमचन्द होम्बल, पूर्व विभागाध्यक्ष, नृत्य विभाग, संगीत एवं मंचकला संकाय, का.हि.वि.वि. अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि नाट्यशास्त्र की हस्तमुद्राओं के प्रयोग तंजौर के मंदिर में 14-15वीं शती में मिलते हैं। आज आवश्यकता है लोकभाषा में ध्रुवाओं की रचना व उनकी सांगीतिक प्रस्तुति की। भारतीय नाट्य परम्परा, नाट्यशास्त्र आधुनिक प्रयोग बहुभाषी व बोलचाल की भाषा में होने चाहिए। जो नाट्यशास्त्र को जीवन्त बना सके।
धन्यवादज्ञापन प्रो. सदाशिव कु. द्विवेदी तथा कार्यक्रम का संचालन डॉ. ज्ञानेन्द्र नारायण राय ने किया। व्याख्यान में मुख्य रूप से प्रो. रेवती साकलकर, प्रो. विधिनागर, आईजीएनसीए के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अभिजित दीक्षित, डॉ. अनूपपति तिवारी, डॉ. अमित कुमार पाण्डेय, डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. अवधेश कुमार सिंह, हिन्दू स्टडीज तथा एन.एस.डी., वाराणसी के छात्र-छात्राओं के साथ ही विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के भारी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

Prof. Sadashiv Kumar Dwivedi
Professor, Dept. of Sanskrit &

Coordinator

Bharat Adhyayan Kendra
Faculty of Arts
Banaras Hindu University
Varanasi 221005
9454860068

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