इलाज की सख्त जरूरत है सेंट्रल कोलफील्ड  लिमिटेड ढोरी सेंट्रल अस्पताल को

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बेरमो।मिनी रत्न कंपनी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के ढोरी सेंट्रल अस्पताल में चिकित्सकों के प्राइवेट प्रैक्टिस के अलावा लूट और भ्रष्टाचार इस कदर चल रही है कि इस अस्पताल को इलाज की सख्त जरूरत है।
कुल 60 शैय्या वाले इस अस्पताल में 18 चिकित्सक पदस्थापित है। जब से ढोरी क्षेत्रीय अस्पताल को ढोरी सेंट्रल अस्पताल में उत्क्रमित किया गया है, तब से यहां जीवन रक्षक दवाओं के लिए एक बड़ा फंड दिया जाने लगा है लेकिन यहां मरीजों को दवा नहीं मिल पाता। यही कारण है कि यहां के दवा दुकानों में मरीजों की भीड़ लगी होती है। ECG, अल्ट्रासाउंड एवं पैथोलॉजी विभाग में जांच करने वाले लोग मरीजों से बगैर पैसा लिए काम नहीं करते। यहां पदस्थापित चिकित्सक अस्पताल में बगैर फी.. लिए मरीजों का कोई काम नहीं करते।
यहां के औसतन चिकित्सक अपने-अपने क्वार्टर में प्राइवेट नर्सिंग होम बनाए हुए हैं, जहां मरीजों को मुंह मांगी फी.. लेकर देखा करते हैं। खासकर लगभग 20-20 वर्षों से इसी अस्पताल में पदस्थापित डॉ. अरविंद कुमार (नेत्र विशेषज्ञ), डॉ. रोहित कुमार शर्मा, डॉ. अभिमन्यु साकेत (हड्डी विशेषज्ञ), डॉ. आर.एन झा इत्यादि कुछ ऐसे चिकित्सक है जो सुबह से देर संध्या तक अपने-अपने क्वार्टरों में प्राइवेट प्रैक्टिस किया करते हैं जबकि इन्हें कंपनी से नन प्रैक्टिस अलाउंस भी मिला करता है। ऐसे चिकित्सक अपने-अपने क्वार्टरों में ऑपरेशन थिएटर भी बना रखा हैं। जितनी महंगी मशीनें अस्पताल में नहीं है, उससे ज्यादा महंगी मशीनें इनके क्वार्टर में बनी नर्सिंग होम में लगी हुई है। इनके क्वार्टरों में सुबह से ही मरीजों की भीड़ लगी होती है। यहां के नेत्र चिकित्सक डॉ. अरविंद कुमार की रोज लगभग एक से डेढ़ लाख रुपए की कमाई हो जाया करती हैं।शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ झा अपने आवास में टोकन नम्बर से पहले मरीजो से फीस वसूली करवाने का धंधा वर्षों से चला रहे हैं ,यहाँ नीम हकीम खतरे जान वाली कहावत चरितार्थ होती है अबतक जानकारी के अभाव कई मासूम बच्चों की जान खतरे में पड़ चुकी है? ऐसे चिकित्सकों को सिर्फ प्राईवेट प्रैक्टिस करके थन उगाही करने से मतलब है ।चर्चा है इनका पैरवी काफी उपर तक है जिसके बल पर कई बार स्थानांतरण होने बाद भी अंगद की पैर की तरह जमे हुए हैं ।
इसके अलावा इस अस्पताल प्रबंधन से मिलकर सिविल एवं E&M के अधिकारी बगैर प्लानिंग के एक ही काम को बार-बार करने के नाम पर राशि को दोनों हाथों से लूट रहे हैं। सेंट्रल अस्पताल में उत्क्रमित होने के बाद ही सर्वप्रथम अस्पताल कैंपस में गाड़ी रखने के लिए सैड बनाया गया जिसमें लाखों रुपए की निकासी की गई,  तुरंत बाद उक्त सैड को तोड़कर उक्त स्थान को थोड़ा ऊंचा कर एक बड़ा सैड बनाया गया। सैड के सामने की खाली जमीन को कंक्रीट कर दिया गया और राशि की निकासी कर ली गई। ठीक तुरंत बाद उक्त पूरी सैड को तोड़कर एक कैंटीन बनाने की योजना बनाई गई जिसका फाउंडेशन भी जमीन से चार-पांच फीट ऊंचा करके छोड़ दिया गया है और राशि की निकासी कर ली गई है। ठीक इसी तरह E&M विभाग के द्वारा बिजली का तार और खंभा बराबर इधर-उधर हटाया और गाड़ा जाता है और राशि की निकासी कर ली जाती है।
यहां के जनरेटर रूम को तोड़ दिया गया है और अच्छी और दुरुस्त जनरेटर को हटाकर नई जनरेटर लगा दी गई है। ठीक इसी तरह से बिजली का व्यवस्थित रूप से लगा ट्रांसफार्मर को हटाकर जहां अस्पताल की शौचालय के लिए बनी एक बड़ी टंकी है वही गंदे नाले झाड़ियों के बीच सकरा जगह पर बनाने की योजना चल रही है जबकि अस्पताल के पिछवाड़े में चिकित्सकों के क्वार्टरों के पास एक खुली जगह में इसे व्यवस्थित किया जा सकता है।
बाहारहाल ऐसा लगता है कि यहां नेत्र चिकित्सक डॉ अरविंद कुमार के साथ-साथ लंबे अरसे से जमे चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए पूरी अस्पताल को इलाज की सख्त जरूरत है।
चंद्रशेखर कुमार की रिपोर्ट

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