व्यंग्य

हम हैं राही लाक डाउन के

व्यंग्य नवेन्दु उन्मेष पहले हम प्यार के राही थे लेकिन अब हम लाक डाउन के राही हो गये हैं। जब गांव में रहते थे तो छोटा-मोटा धंधा...

कब्रिस्तान में कोरोना

नवेन्दु उन्मेष कोरोना को लेकर कब्रिस्तान में हलचल तेज हो गयी थी। प्रत्येक मुर्दा यह जानने को बेताब था कि आखिर कोरोना क्या है। कुछ मुर्दे...

कोरोना के जयचन्द

संतोष कुमार विदेशी हमलों की एक लम्बी परम्परा हमारे देश में पायी जाती है। हम हारते हुए देशी राजाओं की बहादुरी, विदेशी आक्रान्ताओं की क्रूरता...

Latest news

हमेशा आम जनता ही भुगतती है युद्ध का खामियाजा

युद्ध का खामियाजा हमेशा आम आदमी ही भुगतता है इंदौर। इतिहास गवाह है कि युद्ध, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, देशों के आर्थिक...

बड़े जोतदार जनता के मित्र नहीं हैं तो भूमि-प्रश्न अनसुलझा कैसे रह सकता है?

संपादकीय टिप्पणीः घुटे हुए और घाघ कॉमरेड्स मुझे करेक्ट करेंगे इस उम्मीद के साथ सकारात्मक ढंग से अपनी बातों को...

श्रमिकों बाजार का माल तुम्हारा है, दैत्याकार कारखाने तुम्हारे हैं

#काले धन की नयी खेप! धन कभी सफेद नहीं होता है धन श्रम शक्ति के लाल रक्त और रंगहीन पसीने से पैदा...

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संपादकीय टिप्पणीः घुटे हुए और घाघ कॉमरेड्स मुझे करेक्ट करेंगे...