त्वरित टिप्पणी

ट्विटर के मुकाबले फेसबुक अधिक लोकतांत्रिक है

ट्विटर पर अब ब्लू टिक के पैसे देने होंगे। यानी प्रामाणिकता खरीदनी होगी। यह खरीदी हुई प्रामाणिकता कितनी प्रामाणिक होगी, वह एक अलग सवाल...

विद्यानंद चौधरी की कविताः घटना नही पर एक सवाल

घटना नही पर एक सवाल घटनाओं ने नही सवालों ने गढ़े और लिखे इतिहासौ के पन्ने घटनाओं ने दिखाए सिर्फ तय किए रास्ते सवालों ने बनाई नई राहें जैसे...

बिहार में संघर्ष का रास्ता छोड़ मंत्रियों के पीछे दुमा हिला रहे हैं भाकपा-माले (लिबरेशन) के नेतागण

क्या भूतपूर्व कामरेड कविता कृष्णन कभी मार्क्सवादी लेनिनवादी थीं? या वह शुरू से ही उत्तर आधुनिकतावादी दृष्टिकोण से लैस उदारवादियों की तरह वर्ग संघर्ष...

गाँधी के विज्ञान के साथ असहमति पर उनकी जन-परकता को सलाम

तमाम असहमतियों के बावजूद, साम्प्रदायिकता व फ़ासिज़्म से लड़ने में, गांधी एक बड़े प्रतीक के रूप में हम सबके साथ हैं. गांधी आज भी...

Latest news

हमेशा आम जनता ही भुगतती है युद्ध का खामियाजा

युद्ध का खामियाजा हमेशा आम आदमी ही भुगतता है इंदौर। इतिहास गवाह है कि युद्ध, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, देशों के आर्थिक...

बड़े जोतदार जनता के मित्र नहीं हैं तो भूमि-प्रश्न अनसुलझा कैसे रह सकता है?

संपादकीय टिप्पणीः घुटे हुए और घाघ कॉमरेड्स मुझे करेक्ट करेंगे इस उम्मीद के साथ सकारात्मक ढंग से अपनी बातों को...

श्रमिकों बाजार का माल तुम्हारा है, दैत्याकार कारखाने तुम्हारे हैं

#काले धन की नयी खेप! धन कभी सफेद नहीं होता है धन श्रम शक्ति के लाल रक्त और रंगहीन पसीने से पैदा...

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युद्ध का खामियाजा हमेशा आम आदमी ही भुगतता है इंदौर।...

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संपादकीय टिप्पणीः घुटे हुए और घाघ कॉमरेड्स मुझे करेक्ट करेंगे...