कहानी

इलिका प्रिय की कहानीः मजदूरों का गांव

  गाड़ी की घर्र घर्र की आवाज उस शांत माहौल में गूंज रही थी। लोग नींद में उंघ रहे थे। किसी को बेहोशी आ रही...

रश्मि सुमन की कहानी चीख

आज बेहद ऊहापोह में थी लावण्या। मसान के करीब ही अवधूत की जटा में विराजित गंगा किनारे सीढ़ियों पर बैठ एक जीवन का अंत...

राजिंदर सिंह बेदी की कहानी क्वारनटीन

हिमालय के पांव में लेटे हुए मैदानों पर फैल कर हर चीज को धुंधला बना देने वाले कोहरे की तरह प्लेग के खौफ ने...

पुनर्जन्म

1. ई बुढ़वा झगड़ा रोप कर अपने तो दऊ पर गया आउर जिनगी भर का किचाइन माथे पर डाल गया, इमिरतिया बरसातू को साइकिल से...

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बड़े जोतदार जनता के मित्र नहीं हैं तो भूमि-प्रश्न अनसुलझा कैसे रह सकता है?

संपादकीय टिप्पणीः घुटे हुए और घाघ कॉमरेड्स मुझे करेक्ट करेंगे इस उम्मीद के साथ सकारात्मक ढंग से अपनी बातों को...

श्रमिकों बाजार का माल तुम्हारा है, दैत्याकार कारखाने तुम्हारे हैं

#काले धन की नयी खेप! धन कभी सफेद नहीं होता है धन श्रम शक्ति के लाल रक्त और रंगहीन पसीने से पैदा...

सत्ता के संरक्षण में विद्यार्थी परिषद के गुंडों ने स्टूडेंट्स के सिर फोड़े

भगतसिंह छात्र मोर्चा सत्ताधारी ABVP के गुंडों द्वारा CASR के कार्यकर्ताओं पर किए गए हमले की निंदा करता है...

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