बोकारो के विस्थापितों ने प्रशानिक भवन के गेट को किया जाम, एसडीओ को दिया मांग पत्र 

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विशद कुमार
बोकारो (झारखंड) के विस्थापित अप्रेंटिस संघ ने पारंपरिक हथियारों के साथ आज 20 फरवरी को अपनी मांगों को लेकर बीएसएल प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार को जाम कर दिया। इसके पूर्व विस्थापितों ने जुलूस बनाकर जाहेर गढ़ से प्रशासनिक भवन पहुंचे। इस दौरान विस्थापितों को आगे बढ़ने से रोकने के क्रम में होम गार्ड व सीआईएसएफ के जवानों के साथ नोक झोंक तथा धक्का मुक्की भी हुई। बावजूद इसके विस्थापितों ने प्रशानिक भवन के गेट को जाम कर दिया और नारेबाजी करने लगे। धरना कार्यक्रम को संबोधित करते अमजद हुसैन ने कहा कि बीएसएल प्रबंधन अप्रेंटिस करा कर सीधे नियोजन देने की बात की थी। परंतु अब वह सीधे नियोजन देने की बात से मुकर रहा है।तरह तरह के बहाने बना रहा है। अगर  प्रबंधन की बात मान ली जाए तो समझ लेना होगा कि बीएसएल में किसी भी विस्थापित अप्रेंटिस का निजोजन नहीं होने वाला है। क्योंकि हमारा प्रशिक्षण इतना विलंब से शुरू हुआ है कि अधिकतर लोगों की उम्र सीमा समाप्त हो गयी है, या होने वाली है। यानी प्रबंधन ने विस्थापितों को ठगा है, ये पूरी तरह से विस्थापित विरोधी नीति है।सबसे दुखद पहलू यह है कि हम बेरोजगार विस्थापित युवक प्रशिक्षण करके दर दर की ठोकरें खा रहे हैं और प्रबंधन रिटायर्ड कर्मियों को बुला कर काम करवा रहा है। जिस कारण प्लांट में आये दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
कार्यक्रम को अरविंद कुमार, दुर्गा चरण महतो, सुनील कुमार, रवि शंकर, प्रदीप सोरेन, प्रमोद कुमार ने भी संबोधित किया। वहीं एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट प्रभाष दत्ता के द्वारा एक सप्ताह के अंदर सकारात्मक त्रिपक्षीय वार्ता कराने के बाद गेट जाम को स्थगित कर दिया गया। मौके पर अमोध कुमार, सद्दाम, निलेश, विनोद किस्कु, सोमनाथ मुखर्जी समेत सैकड़ों बेरोजगार विस्थापित अप्रेंटिस मौजूद थे।
संघ की मुख्य मांगे हैं-
1. प्लांट ट्रेनिंग पूरा कर चुके सभी विस्थापित अप्रेंटिस को बीएसएल में अविलंब सीधे बहाली की जाये।
2. सभी विस्थापित अप्रेंटिस का प्लांट ट्रेनिंग के बाद बीएसएल में नियोजन सुनिश्चित की जाए।
3. सभी तरह के बहालियों में विस्थापितों के लिए अधिकतम उम्र सीमा को पूर्व की भांति 45 वर्ष किया जाए।
4. तीसरी सूची तथा बाकी अन्य विस्थापितों की ट्रेनिंग अविलंब प्रारंभ करवाई जाए।
कार्यक्रम के पूर्व अनुमंडल पदाधिकारी
चास, बोकारो को एक पत्र देकर अपनी स्थिति दर्शाते हुए कहा गया था कि हम बेेरोजगार विस्थापितों का कहना है कि अपने हक व अधिकार के लिए वर्षों से बोकारो इस्पात प्रबंधन के विरूद्ध हम आंदोलन करते आ रहे हैं। परंतु विस्थापित विरोधी मानसिकता वाले कुछ अधिकारियों ने हमे हमेशा ठगने का काम किया है। बोकारो इस्पात संयंत्र की स्थापना के समय प्रथम प्रबंध निदेशक केएम जॉर्ज ने हमसे वादा किया था प्लांट निर्माण में अपना जमीन दान कीजिए, चतुर्थ श्रेणी की नौकरी आपके लिए सुरक्षित व आरक्षित रहेगी। महोदय हमारे बाप दादाओं ने अपना घर-बारी, खेत-खलिहान, जो उनके तथा उनके पूर्वजों के जीवन यापन का एकमात्र साधन था, उसे बोकारो इस्पात संयंत्र के निर्माण हेतु न्योछावर कर दिया, यह सोचकर कि उनके बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा। हमारे जीविकोपार्जन का एकमात्र साधन बोकारो इस्पात संयंत्र के निर्माण हेतु दे दिया गया। डीपीएलआर के माध्यम से मात्र कुछ विस्थापितों को सीधे नियोजन देने के बाद प्रबंधन ने इस प्रावधान को एक साजिश के तहत बंद कर दिया।
डीपीएलआर के माध्यम से ही सीधी नियुक्ति की मांग को लेकर हम लगातार आंदोलनरत रहे। चरणबद्व व जोरदार आन्दोलन के बाद प्रबंधन ने कहा कि नियोजन मिलेगा, पर सीधे नियोजन नही दे सकते हैं, बल्कि ट्रेनिंग करा कर लेंगे। परीक्षा लेने की कोई बात नही हुई थी। बावजूद इसके वर्ष 2016 में अप्रेंटिस ट्रेनिंग कराने के लिए विस्थापितो से ऑनलाइन आवेदन मांगा गया। हज़ारों विस्थापित एसएससी स्तर की लिखित परीक्षा से गुजरे। फिर सभी की सूची बनाकर DPLR भेज कर सत्यापित कराया गया तथा एक परिवार से एक आदमी, जो उम्र में सबसे बड़ा हो, का चयन हुआ, अर्थात योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि उम्र के आधार पर अप्रेंटिस ट्रेनिंग के लिए चयन किया गया है। फिर तीन सूची बनाकर जिसमें पहला 500, दूसरा 400, तीसरा 600 यानि कुल 1500 विस्थापितो को ट्रेनिंग कराने की बात तय हुई।
हमलोगों की ट्रेनिंग दो वर्ष विलंब से शुरू हुई। विलंब से ट्रेनिंग शुरु होने की वजह से हमारी अधिकतम उम्र सीमा समाप्ति के कगार पर है।
बता दें कि प्रथम सूची के 500 विस्थापितों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। नियोजन की बात पर बीएसएल प्रबंधन ने चुप्पी साध ली है, कोई पहल नहीं किया जा रहा है। हम विस्थापितों की स्थिति दिनोंदिन बद से बदतर होती जा रही है। प्रबंधन की टाल मटोल के कारण विस्थापित या तो आत्महत्या कर रहे हैं या पलायन करने को मजबूर हैं। हम विस्थापित अप्रेंटिस के पास करो या मरो के अलावा और कोई रास्ता नही बचा है।
इसलिए आगामी दिनांक 20/02/2021 को संघ के द्वारा बोकारो इस्पात संयंत्र के प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार को बंद कर उसके समक्ष पारंपरिक हथियारों के साथ एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। जिसकी हर तरह की जवाबदेही बीएसएल प्रबंधन की होगी।
 पत्र की प्रतिलिपि डायरेक्टर इंचार्ज बोकारो, इस्पात संयंत्र, पुलिस अधीक्षक बोकारो, डीपीएलआर और स्थानीय मिडिया को प्रेषित की गई थी।

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