बिहारी एक्जिट पोल पर भारी

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  • नवेन्दु उन्मेष

जब ईवीएम से नतीजों का जिन निकला तो एक्जिट पोल करने वाले अपना बिस्तर लेकर भागते हुए नजर आये। भागते हुए ऐसे ही एक एक्जिट पोल वाले ने मुझसे कहा कि मान गये गुरु कि बिहारी कहता कुछ है और करता कुछ है। यही कारण है कि दिल्ली में सब्जी बेचने वाला बिहारी भी कहता है आरा जिला घर बा, कऊन बात के डर बा। सत्तर बिगहा में पुदीना लगल बा।

जब ईवीएम से नतीजों का जिन निकला तो एक्जिट पोल करने वाले अपना बिस्तर लेकर भागते हुए नजर आये। भागते हुए ऐसे ही एक एक्जिट पोल वाले ने मुझसे कहा कि मान गये गुरु कि बिहारी कहता कुछ है और करता कुछ है। यही कारण है कि दिल्ली में सब्जी बेचने वाला बिहारी भी कहता है आरा जिला घर बा, कऊन बात के डर बा। सत्तर बिगहा में पुदीना लगल बा। मतलब साफ है कि दिल्ली में थोड़ी सी सब्जी बेचकर गुजारा करने वाला बिहारी भी गांव के खेत में सत्तर बिगहा में पुदीना लगाने का दंभभर लेता है। इसे कहते है असली बिहारी

बिहारियों ने  विधान सभा चुनाव में एक्जिट पोल का जनाजा निकाल दिया। कहावत भी है एक बिहारी सब पर भारी। तो इसी कहावत को सार्थक करते हुए बिहारी एक्जिट पोल पर भी भारी पड़ गये। मतगणना के बाद एक्जिट पोल के नतीजों की घोषणा करने वाले अब अपने गिरेबान में झांक रहे हैं कि कहां चूक हो गयी। वैसे भी बिहार क्रांतिकारियों की भूमि रही है। बिहारी कब कौन सी क्रांति कर दे कोई नहीं जानता। इसी क्रांति का नतीजा है कि उसने पूरे एक्जिट पोल के नतीजों को ही बदल कर रख दिया।

एक्जिट पोव के नतीजों को देखने से ऐसा लग रहा था कि कोरोना महामारी ने नीतिश सरकार के जाने का पलीता लगा दिया है,  लेकिन धन्य हैं बिहारी की एक्जिट पोल में कहा कुछ और ईवीएम में डाला कुछ और। जब ईवीएम से नतीजों का जिन निकला तो एक्जिट पोल करने वाले अपना बिस्तर लेकर भागते हुए नजर आये। भागते हुए ऐसे ही एक एक्जिट पोल वाले ने मुझसे कहा कि मान गये गुरु कि बिहारी कहता कुछ है और करता कुछ है। यही कारण है कि दिल्ली में सब्जी बेचने वाला बिहारी भी कहता है आरा जिला घर बा, कऊन बात के डर बा। सत्तर बिगहा में पुदीना लगल बा। मतलब साफ है कि दिल्ली में थोड़ी सी सब्जी बेचकर गुजारा करने वाला बिहारी भी गांव के खेत में सत्तर बिगहा में पुदीना लगाने का दंभभर लेता है। इसे कहते है असली बिहारी। बिहारियों ने ऐसे पूरी दुनियां में शिक्षा नहीं बांटा। भगवान महावीर यहीं पैदा हुए और दुनिया को बताया कि अहिंसा परमोधर्म:।  गौतम बुद्ध को भी यहीं एक पेड़ के नीचे शिक्षा मिली जिसे उन्होंने पूरी दुनियां में फैलाया। महात्मा गांधी को भी स्वतंत्रता आंदोलन को आगे बढ़ने के लिए बिहारियों का सहारा लेना पड़। जयप्रकाश नारायण ने भी संपूर्ण क्रांति का नारा देकर आजादी के बाद इंदिरा गांधी की सत्ता बदल दी थी। इसी प्रकार इस बार बिहारियों ने एक्जिट पोल के नतीजों की घोषणा करने वालों के नतीजों की कलई खोलकर रख दी।

बिहारियों की संघर्षशीलता से महाराष्ट्र में बाल ठाकरे को भी डर लगता था तभी तो उनको कहना पड़ा था- एक बिहारी सौ बीमारी, इसके बाद सरकार हमारी। जाहिर है जिन देशों में बिहारी मजदूर के रूप में गये वहां जाकर उस देळ की सत्ता पर कब्जा कर लिया। इस लिए बाल ठाकरे को भी लगता था कि अगर ज्यादा संख्या में बिहारी मुंबई पहुंच गये तो उनकी राजनीति का क्या होगा?

खैर अब तो बिहार विधान सभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं और एक्जिट पोल भी बिहार से दुम दबाकर भाग चुका है। अब देखना है कि बिहार में का बा के नतीजों का भविष्य में क्या परिणाम नयी सरकार निकाल पाती है। ताकि अगले चुनाव तक लोग कह सकें कि बिहार में सब कुछ बा।

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